
बरेली की प्रमुख फूड और एफएमसीजी कंपनी 'बीएल एग्रो' (BL Agro) ने तंजानिया में 7,000 करोड़ रुपये के भारी-भरकम निवेश के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी धमाकेदार शुरुआत की है. यह निवेश अगले 10 वर्षों के दौरान खाद्य तेल (एडिटिव ऑयल), डेयरी, कृषि, रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में किया जाएगा. कंपनी का लक्ष्य साल 2030 तक 30,000 करोड़ रुपये का बिजनेस ग्रुप बनने का है.
बीएल एग्रो के प्रबंध निदेशक (MD) आशीष खंडेलवाल ने पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि तंजानिया को उसके विशाल लैंड बैंक और अनुकूल जलवायु के कारण पहले विदेशी जगह के रूप में चुना गया है. तंजानिया सरकार कंपनी को 99 साल के पट्टे (लीज) पर रियायती दरों पर 7 लाख हेक्टेयर जमीन दे रही है. साथ ही, कृषि और पशुपालन गतिविधियों के लिए तंजानिया सरकार इस जमीन के एक हिस्से में जॉइंट वेंचर पार्टनर के रूप में भी जुड़ेगी.
पहले चरण में कंपनी तंजानिया में वेजिटेबल ऑयल कॉम्प्लेक्स पर लगभग 1,500 करोड़ रुपये का निवेश करेगी. इस प्लांट की प्रोसेसिंग क्षमता 1,100 टन प्रतिदिन होगी, जो मुख्य रूप से सूरजमुखी के तेल (सनफ्लॉवर ऑयल) पर केंद्रित होगा. इस प्लांट के अप्रैल 2027 तक शुरू होने की उम्मीद है.
शुरुआती दौर में यहां बनने वाले उत्पादों को 'नौरिश' (Nourish) ब्रांड के तहत केवल तंजानिया के स्थानीय बाजार में ही बेचा जाएगा, क्योंकि वहां की रोजाना की मांग करीब 1,100 टन है. हालांकि, भविष्य में पड़ोसी देशों को भी आपूर्ति करने की योजना है.
तंजानिया में दूध की कम उत्पादकता (मात्र 1-1.5 लीटर प्रति गाय रोजाना) को सुधारने के लिए कंपनी भारत की तर्ज पर वहां भी गायों के प्रजनन और जेनेटिक्स प्रोग्राम पर करीब 2,000 करोड़ रुपये का निवेश करेगी. कंपनी वहां केवल भारत की गिर गायों की नस्ल ले जाएगी, ताकि बेहतर जलवायु के चलते वहां दूध की पैदावार बढ़ाई जा सके.
तंजानिया में कृषि उत्पादकता (प्रति हेक्टेयर 800-900 किलो) भारत (2-2.5 टन) की तुलना में काफी कम है. कंपनी वहां कृषि कौशल को बढ़ाने और मशीनीकरण को बढ़ावा देने के लिए काम करेगी. आयात पर निर्भर रहने के बजाय ट्रैक्टर और कृषि उपकरण स्थानीय स्तर पर ही विकसित किए जाएंगे.
भारत में 'बेल कोल्हू' और 'नौरिश' जैसे लोकप्रिय ब्रांड्स के साथ अपनी पहचान बनाने वाली बीएल एग्रो के इस कदम से भारत और तंजानिया के बीच व्यापार और तकनीक सहयोग को एक नया आयाम मिलने की उम्मीद है. तंजानिया की उच्चायुक्त अनीसा के म्बेगा ने भी इस प्रस्ताव का स्वागत करते हुए इसे स्थानीय किसानों के सशक्तिकरण और रोजगार बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है.