
अपनी अनोखी खुशबू, लाजवाब स्वाद और औषधीय खूबियों के लिए मशहूर काला नमक चावल अब किसानों की पसंद बनता जा रहा है. बाजार में बढ़ती मांग और कम लागत में बेहतर कमाई की संभावना को देखते हुए किसान इसकी खेती में नई तकनीकों को अपना रहे हैं. खास बात यह है कि कई किसान रासायनिक खादों से दूरी बनाकर जैविक खेती का रास्ता चुन रहे हैं. इसमें बीजामृत, जीवामृत, घनजीवामृत और सूखाघनजीवामृत जैसे जैविक उपाय मिट्टी की ताकत बढ़ाने के साथ-साथ फसल को स्वस्थ और उत्पादन को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं. ऐसे में आइए जानते हैं ये जैविक खाद कैसे बनाई जाती है.
डॉ राम चेत चौधरी के मुताबिक, काला नमक चावल की अच्छी और स्वस्थ फसल के लिए सबसे जरूरी है क्वालिटी वाले बीज. दरअसल, बुवाई से पहले बीजों का उपचार बीजामृत से करने पर बीजों में रोग लगने की संभावना कम होती है और अंकुरण क्षमता बेहतर होती है. वहीं, बीजामृत बनाने के लिए 5 किलो देशी गाय का गोबर, 5 लीटर गोमूत्र, 50 ग्राम चूना, खेत की मेड़ या पेड़ के नीचे की एक मुट्ठी मिट्टी और 20 लीटर पानी की जरूरत होती है. सभी चीजों को अच्छी तरह मिलाकर करीब 24 घंटे तक छांव में रखा जाता है. इसके बाद बीजों को इस घोल से उपचारित करके सुखाया जाता है और फिर बुवाई की जाती है.
फसल की अच्छी बढ़वार के लिए जीवामृत को जैविक खाद का खजाना माना जाता है. इसमें मौजूद लाभकारी सूक्ष्म जीव मिट्टी की उर्वरता बढ़ाते हैं और पौधों को जरूरी पोषक तत्व उपलब्ध कराने में मदद करते हैं. जीवामृत तैयार करने के लिए 10 किलो देशी गाय का गोबर, 10 लीटर गोमूत्र, 2 किलो गुड़, 2 किलो बेसन या किसी दाल का आटा, एक मुट्ठी खेत की मिट्टी और 200 लीटर पानी लिया जाता है. फिर सभी चीजों को एक ड्रम में मिलाकर 5 से 7 दिन तक छांव में रखा जाता है. इस दौरान रोजाना एक बार लकड़ी से घोल को चलाना जरूरी होता है. वहीं, तैयार जीवामृत को सिंचाई के पानी के साथ खेत डालने के काला नमक चावल का बंपर उत्पादन होता है.
वहीं, घनजीवामृत ठोस जैविक खाद के रूप में मिट्टी को लंबे समय तक पोषण देने का काम करता है. इसे खेत में डालने से मिट्टी की क्वालिटी बेहतर होती है और फसल को लगातार पोषक तत्व मिलते रहते हैं. घनजीवामृत बनाने के लिए 100 किलो देशी गाय का गोबर, 10 लीटर गोमूत्र, 2 किलो गुड़, 2 किलो बेसन और थोड़ी मात्रा में खेत की मिट्टी मिलाई जाती है. सभी सामग्री को अच्छी तरह मिलाकर छोटे-छोटे ढेर बना लिए जाते हैं. फिर कुछ दिनों तक छांव में रखने के बाद यह तैयार हो जाता है, जिसे खेत की तैयारी के समय मिट्टी में मिलाया जा सकता है.
पानी की कमी वाले क्षेत्रों में सूखाघनजीवामृत किसानों के लिए एक बेहतर विकल्प साबित हो सकता है. यह सूखी अवस्था में भी मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में मदद करता है. इसे बनाने के लिए अच्छी तरह सूखा हुआ गोबर, गोमूत्र, गुड़, बेसन और खेत की मिट्टी को मिलाकर छांव में सुखाया जाता है. तैयार सूखाघनजीवामृत को छोटे दानों के रूप में खेत में फसल की बढ़वार के समय डाला जा सकता है. प्राकृतिक खेती के इन तरीकों से किसान काला नमक चावल की फसल में मिट्टी की सेहत बनाए रखते हुए बेहतर उत्पादन हासिल कर सकते हैं.
किसान अगर बीज उपचार से लेकर फसल पोषण तक जैविक तरीकों को अपनाते हैं, तो काला नमक चावल जैसी पारंपरिक किस्मों की खेती को और अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है.