इम्पोर्टेड यूरिया पर सब्सिडी 128% बढ़ी, सरकार का बोझ 48 हजार करोड़ रुपये के पार

इम्पोर्टेड यूरिया पर सब्सिडी 128% बढ़ी, सरकार का बोझ 48 हजार करोड़ रुपये के पार

भारत में 2025-26 के दौरान इम्पोर्टेड यूरिया पर सरकारी सब्सिडी एक साल में 128.4 प्रतिशत बढ़कर 47,956.24 करोड़ रुपये पहुंच गई. RTI के जरिए मिले आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक बाजार में ऊंची कीमतों, डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी और आयात पर निर्भरता के कारण सरकार का सब्सिडी बोझ लगातार बढ़ रहा है. हालांकि किसानों के लिए यूरिया की कीमत फिलहाल स्थिर रखी गई है, लेकिन इसकी लागत का बड़ा हिस्सा सरकार उठा रही है.

Urea Crisis India Hormuz TensionUrea Crisis India Hormuz Tension
बिश्वजीत
  • New Delhi,
  • Aug 07, 2026,
  • Updated Aug 07, 2026, 6:44 PM IST

2025-26 में इम्पोर्टेड यूरिया के लिए भारत का सब्सिडी भुगतान दोगुने से ज़्यादा हो गया, जिससे पता चलता है कि किसानों को खाद की ज्यादा वैश्विक कीमतों से बचाने की लागत बढ़ रही है. एग्रीकल्चर एक्सपर्ट विजय सरदाना ने इस दबाव को US डॉलर के मुकाबले रुपये के कमजोर होने और US-ईरान युद्ध से पैदा होने वाले रुकावट के जोखिमों से जोड़ा है.

फर्टिलाइजर डिपार्टमेंट के RTI जवाब के अनुसार, सरकार ने 2025-26 में इम्पोर्टेड यूरिया के लिए 47,956.24 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी, जबकि 2024-25 में यह 21,000 करोड़ रुपये थी. यह सिर्फ एक वित्त वर्ष में 128.4% की बढ़ोतरी है.

सरकार के सब्सिडी बिल पर बढ़ता बोझ

यह आंकड़ा इसलिए अहम है क्योंकि यूरिया भारतीय किसानों द्वारा सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला फर्टिलाइजर है. किसान यूरिया के 45-किलो के बैग के लिए एक तय, कम कीमत चुकाते हैं, जबकि सरकार फर्टिलाइजर कंपनियों को उस कीमत और इसे बनाने या इम्पोर्ट करने की असल लागत के बीच का अंतर चुकाती है.

आसान शब्दों में कहें तो, जब विदेशी बाजारों से खरीदा गया यूरिया महंगा हो जाता है, तो किसान पर तुरंत पूरा बोझ नहीं पड़ता. इसके बजाय, सरकार का सब्सिडी बिल बढ़ जाता है.

वहीं दूसरी ओर, देश में बने यूरिया के लिए दी जाने वाली सब्सिडी 2024-25 में 1,03,319.50 करोड़ रुपये से घटकर 2025-26 में 94,219.50 करोड़ रुपये हो गई. यानी इसमें 8.8% की कमी आई.

इम्पोर्टेड यूरिया पर बहुत अधिक खर्च

इन आंकड़ों को एक साथ देखने पर एक चिंताजनक बदलाव दिखता है. भारत ने घरेलू यूरिया सब्सिडी पर कम खर्च किया लेकिन इम्पोर्टेड यूरिया पर बहुत अधिक खर्च किया. कुल यूरिया सब्सिडी—घरेलू और इम्पोर्टेड मिलाकर—2024-25 में 1,24,319.50 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 1,42,175.74 करोड़ रुपये हो गई, जो लगभग 14.4% की बढ़ोतरी है.

अंतरराष्ट्रीय खाद व्यापार पर डॉलर का बहुत अधिक असर होता है. जब US डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होता है, तो भारत को उतनी ही मात्रा में इम्पोर्टेड यूरिया के लिए ज्यादा रुपये चुकाने पड़ते हैं. करेंसी का यह असर सरकार के सब्सिडी के बोझ को काफी बढ़ा सकता है. RTI के जवाब से यह भी पता चलता है कि 2026-27 के शुरुआती महीनों में, 23 जुलाई तक, सरकार ने इम्पोर्टेड यूरिया सब्सिडी के लिए 27,722.45 करोड़ रुपये और देश में बने यूरिया के लिए 32,746.51 करोड़ रुपये जारी कर दिए थे.

उर्वरक विभाग ने कहा है कि वह महीने-दर-महीने सब्सिडी का डेटा नहीं रखता है और चालू वित्त वर्ष के लिए संशोधित अनुमान अभी तैयार नहीं हुए हैं.

किसानों के लिए यूरिया की मौजूदा कीमत सुरक्षित बनी हुई है. लेकिन RTI के आंकड़े बताते हैं कि दुनिया भर में जारी टकराव, डॉलर से जुड़ी लागत और इम्पोर्ट पर निर्भरता की वजह से भारत के सरकारी खजाने के लिए यह सुरक्षा लगातार महंगी होती जा रही है.

MORE NEWS

Read more!