
देश में खाद क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. पांच कंपनियों ने मिलकर अगले 10 वर्षों के लिए ग्रीन अमोनिया की सप्लाई के समझौते किए हैं, जिसके तहत कुल 6.7 लाख टन सालाना आपूर्ति की जाएगी. यह सप्लाई इफको (IFFCO), कोरोमंडल इंटरनेशनल (Coromandel International) और अन्य खाद कंपनियों के विभिन्न प्लांट्स को की जाएगी. यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण ऊर्जा और कच्चे माल की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है. ऐसे में ग्रीन अमोनिया की घरेलू उपलब्धता बढ़ाने से खाद उद्योग को स्थिरता मिलेगी और आयात पर निर्भरता कम होगी.
इस पूरे करार में ACME Cleantech सबसे बड़ा योगदान देने वाली कंपनी है, जिसने भारतीय सौर ऊर्जा निगम (SECI) के साथ 3.7 लाख टन प्रति वर्ष क्षमता के लिए समझौता किया है. कंपनी IFFCO, पारादीप फॉस्फेट्स, कोरोमंडल इंटरनेशनल और इंडोरामा इंडिया जैसे बड़े प्लांट्स को अलग-अलग दरों पर ग्रीन अमोनिया उपलब्ध कराएगी.
जैकसन ग्रीन और OCIOR, एनटीपीसी रिन्यूएबल एनर्जी, ओरियाना पावर और एससीसी इंफ्रास्टक्चर जैसी कंपनियां भी इस सप्लाई चेन का हिस्सा हैं. ये कंपनियां देश के अलग-अलग राज्यों में स्थित खाद इकाइयों को ग्रीन अमोनिया उपलब्ध कराएंगी, जिससे सप्लाई नेटवर्क और मजबूत होगा.
बोली प्रक्रिया के जरिए ग्रीन अमोनिया की कीमतें 49.75 रुपये से 64.74 रुपये प्रति किलोग्राम के बीच तय हुई हैं. यह अंतरराष्ट्रीय कीमतों के मुकाबले काफी प्रतिस्पर्धी है, जहां दर लगभग 110 रुपये प्रति किलोग्राम तक देखी जा रही है.
इस पहल के तहत कुल 7.24 लाख टन सालाना क्षमता विभिन्न डेवलपर्स को आवंटित की गई है, जिसकी सप्लाई देश की 13 खाद यूनिट्स से जुड़ी है. इससे गैर-यूरिया उर्वरकों के उत्पादन में ग्रीन अमोनिया का इस्तेमाल बढ़ेगा.
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि इस पहल से आने वाले 10 वर्षों में करीब 2.5 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा की बचत हो सकती है. साथ ही, यह कदम देश को ऊर्जा सुरक्षा और मजबूत सप्लाई चेन की दिशा में आगे ले जाएगा.
सरकार के राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन अमोनिया को बढ़ावा दिया जा रहा है. रिफाइनरी और खाद क्षेत्र में इनका इस्तेमाल बढ़ने से पारंपरिक प्राकृतिक गैस पर निर्भरता कम होगी और पर्यावरणीय लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिलेगी. (पीटीआई)