Fertilizer Supply: खाद को लेकर कैसी है भारत की तैयारी, खरीफ सीजन में किसानाें पर क्‍या होगा असर?

Fertilizer Supply: खाद को लेकर कैसी है भारत की तैयारी, खरीफ सीजन में किसानाें पर क्‍या होगा असर?

खरीफ सीजन से पहले उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ रही है. सरकार ने भंडार पर्याप्त बताया है, लेकिन विशेषज्ञों ने वैश्विक कीमतों, गैस आपूर्ति और ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ने से किसानों की लागत और आय पर असर पड़ने की आशंका जताई है.

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क‍िसान तक
  • Noida,
  • Mar 29, 2026,
  • Updated Mar 29, 2026, 7:10 PM IST

पश्चिम एशिया में जारी अमेरिका-इजरायल-ईरान तनाव अब चौथे हफ्ते में पहुंच चुका है और इसका असर भारत के उर्वरक सेक्टर पर साफ दिखने लगा है. आधिकारिक तौर पर सरकार भले ही पर्याप्त भंडार होने का दावा कर रही हो, लेकिन जमीन पर गैस आपूर्ति की कमी और लॉजिस्टिक्स बाधाएं यूरिया उत्पादन को प्रभावित कर रही हैं. उर्वरक मंत्री जे पी नड्डा ने संसद में कहा कि किसानों के लिए पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध है और किसी तरह की घबराहट की जरूरत नहीं है. सरकार ने सभी जरूरी कदम उठाए हैं, ताकि मांग के समय किसानों को खाद की कमी न हो.

स्टॉक मजबूत, लेकिन चुनौती बरकरार

23 मार्च तक देश में 53.08 लाख टन यूरिया, 21.80 लाख टन डीएपी, 7.98 लाख टन एमओपी और 48.38 लाख टन कॉम्प्लेक्स उर्वरक का स्टॉक मौजूद है. पिछले साल 1 अप्रैल 2025 को यूरिया का स्टॉक 55.96 लाख टन था यानी इस बार शुरुआती स्थिति लगभग समान है. लेकिन, इंडस्‍ट्री इस बात को लेकर सतर्क है कि उत्पादन पर दबाव बढ़ने की स्थिति में आगे स्टॉक कैसे बने रहेंगे.

खरीफ में बढ़ती मांग से दबाव बढ़ने के संकेत

बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले खरीफ सीजन में यूरिया की जरूरत 185.4 लाख टन आंकी गई थी, लेकिन बिक्री 193.2 लाख टन तक पहुंच गई यानी मांग अनुमान से ज्यादा रही. ऐसे में अगर इस बार सप्लाई में कोई रुकावट आती है तो स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है.

गैस संकट से घरेलू उत्पादन पर असर

मार्च के पहले 24 दिनों में भारत ने 24.23 लाख टन उर्वरक उत्पादन किया, जिसमें 13.55 लाख टन यूरिया शामिल है. पश्चिम एशिया संकट के चलते गैस आपूर्ति प्रभावित हुई है. सरकार ने अतिरिक्त गैस खरीदकर आपूर्ति को 65 प्रतिशत से बढ़ाकर करीब 80 प्रतिशत तक लाने की कोशिश की है, लेकिन यह अभी भी पूरी क्षमता से कम है.

इनपुट लागत बढ़ने से होगा यह असर

एग्रीटेक कंपनी Arya.ag के को-फाउंडर और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर आनंद चंद्रा के मुताबिक, जब वैश्विक बाजार में उर्वरकों की कीमतें बढ़ती हैं तो उसका पहला असर सीधे खेत तक पहुंचता है. उन्होंने कहा कि छोटे किसानों के लिए इनपुट लागत में 10-15 प्रतिशत की बढ़ोतरी भी फसल चयन और आय दोनों को प्रभावित कर सकती है. इससे किसान कम उर्वरक इस्तेमाल करने, फसल बदलने या कार्यशील पूंजी पर दबाव झेलने को मजबूर हो सकते हैं.

नियंत्रित कीमतें राहत, लेकिन जोखिम बाकी

सरकार ने उर्वरकों की खुदरा कीमतों को नियंत्रित रखा है, जिससे फिलहाल सीधा असर सीमित रह सकता है. लेकिन अगर राज्यों में कालाबाजारी बढ़ती है या गैर-सब्सिडी वाले उर्वरकों की कीमतें बढ़ती हैं तो दबाव बढ़ सकता है. इसके अलावा डीजल और बिजली की लागत में संभावित बढ़ोतरी किसानों पर अतिरिक्त बोझ डाल सकती है.

ट्रांसपोर्ट और सप्लाई चेन पर दबाव

आनंद चंद्रा ने यह भी कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी या सप्लाई में कमी से ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ती है, जिसका असर पूरी एग्री वैल्यू चेन पर पड़ता है. इससे कुछ फसलों की मांग कमजोर हो सकती है या कीमतों का फायदा किसानों तक देर से पहुंच सकता है. उन्‍होंने कहा कि ऐसे माहौल में किसानों के लिए स्टोरेज सुविधा, समय पर फाइनेंस और मजबूत बाजार लिंक बेहद जरूरी हैं. इससे वे कीमतों के उतार-चढ़ाव के बीच बेहतर फैसले ले सकते हैं और अपनी आमदनी को सुरक्षित रख सकते हैं.

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