खरीफ सीजन से पहले अलर्ट पर सरकार, यूरिया उत्पादन बढ़ाने के लिए गैस सप्लाई पर बड़ा ऐलान

खरीफ सीजन से पहले अलर्ट पर सरकार, यूरिया उत्पादन बढ़ाने के लिए गैस सप्लाई पर बड़ा ऐलान

मीडिया को संबोधित करते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि हमारे पास खाद का पर्याप्त भंडार है. हम खरीफ सीजन 2026 के लिए निश्चिंत हैं. उर्वरक विभाग ने एक बयान में कहा है कि  घरेलू उत्पादन बढ़ाने और समझदारी से विदेशों से खरीद करने की रणनीति अपनाकर किसानों को वैश्विक संकट के असर से बचाने की कोशिश की जा रही है.

यूरिया उत्पादन बढ़ाने पर जोर (AI- तस्वीर)यूरिया उत्पादन बढ़ाने पर जोर (AI- तस्वीर)
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Mar 20, 2026,
  • Updated Mar 20, 2026, 4:04 PM IST

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जंग के कारण भारत में गैस और उर्वरकों की सप्लाई पर असर पड़ा है. इसे देखते हुए भारत सरकार ने किसानों के लिए एक खास योजना बनाई है, ताकि खेती में कोई परेशानी न हो. दरअसल, सरकार अब देश में ही ज्यादा यूरिया बनाने पर जोर दे रही है और साथ ही जरूरत पड़ने पर दूसरे देशों से भी उर्वरक मंगाए जा रहे हैं. इसका मकसद ये है कि खरीफ सीजन 2026 की बुवाई से पहले किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद मिल सके. उर्वरक विभाग ने एक बयान में कहा है कि घरेलू उत्पादन बढ़ाने और विदेशों से खरीद करने की रणनीति अपनाकर किसानों को वैश्विक संकट के असर से बचाने की कोशिश की जा रही है.

खाद का पर्याप्त भंडार है: विदेश मंत्रालय

मीडिया को संबोधित करते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि हमारे पास खाद का पर्याप्त भंडार है. हम खरीफ सीजन 2026 के लिए निश्चिंत हैं. उन्होंने बताया कि उर्वरक विभाग ने मौजूदा हालात को देखते हुए पहले ही दुनिया भर से खाद खरीदने के लिए टेंडर जारी कर दिए थे, जिनका अच्छा रिस्पॉन्स मिला है. उम्मीद है कि ज्यादातर खाद की सप्लाई मार्च के अंत तक भारत पहुंच जाएगी. सरकार अलग-अलग देशों से खाद मंगाने की कोशिश कर रही है, ताकि किसानों को समय पर पर्याप्त खाद मिल सके.

यूरिया फैक्ट्रियों मिल रही है गैस

सरकार ने देखा कि कुछ यूरिया फैक्ट्रियों को गैस (LNG) कम मिल रही है, जिससे वे पूरी क्षमता से काम नहीं कर पा रही थीं. इस समस्या को देखते हुए सरकार ने तुरंत कदम उठाए. सबसे पहले सरकार ने तय किया कि खाना बनाने वाली गैस (LPG) की जरूरत पूरी होने के बाद यूरिया फैक्ट्रियों को गैस दी जाएगी, यानी उन्हें दूसरी प्राथमिकता दी गई है. सरकार ने ये भी कहा कि फैक्ट्रियों को पिछले 6 महीनों के औसत के हिसाब से कम से कम 70 फीसदी गैस दी जाएगी, ताकि उत्पादन जारी रह सके. इसके अलावा, फैक्ट्रियों से कहा गया है कि वे अप्रैल में होने वाला सालाना मेंटेनेंस काम अभी पहले ही कर लें, ताकि बाद में उत्पादन पर असर न पड़े. सरकार ने कंपनियों को यह सलाह भी दी है कि वे अमोनिया बेचने की बजाय उसका इस्तेमाल यूरिया बनाने में करें, ताकि किसानों के लिए खाद की कमी न हो.

उन्होंने कहा कि सहकारी संस्था IFFCO अपने 5 में से 3 संयंत्रों को पूरी यानी 100 प्रतिशत क्षमता पर चला पा रही है. ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि बाकी 2 संयंत्र अभी मरम्मत (मेंटेनेंस) के लिए बंद हैं, जिससे गैस की जरूरत कम हो गई है और उपलब्ध गैस से काम चल रहा है. सूत्रों के मुताबिक, सरकार गैस की सप्लाई को संतुलित करने के लिए बंद पड़े संयंत्रों की गैस जरूरत को चल रहे संयंत्रों की ओर मोड़ रही है, ताकि उत्पादन प्रभावित न हो. वहीं, एक कंपनी जो इस हफ्ते के अंत से 4 हफ्तों के लिए बंद होने वाली है, उसे अभी अपनी जरूरत का करीब 60 फीसदी गैस मिल रही है.

एलएनजी गैस खरीदने के लिए हुआ बड़ा सौदा

सरकार ने गुरुवार को बताया कि उसने बाहर यानी स्पॉट मार्केट से बोली लगाकर एलएनजी गैस खरीदने का बड़ा सौदा किया है. इससे यूरिया बनाने वाली फैक्ट्रियों को मिलने वाली गैस 23 फीसदी बढ़ जाएगी, यानी अब सप्लाई 32 से बढ़कर 39.31 MMSCMD हो जाएगी. इसका फायदा यह होगा कि फैक्ट्रियों की गैस की जरूरत का लगभग 76 प्रतिशत हिस्सा पूरा हो सकेगा, जो अभी करीब 62 फीसदी ही पूरा हो रहा था. सरकार ने गैस की कीमत नहीं बताई, लेकिन सूत्रों के मुताबिक यह करीब 18 डॉलर प्रति यूनिट (MMBtu) है, जबकि लंबे समय के समझौते में यह कीमत करीब 10 डॉलर होती है. इस कदम से यूरिया उत्पादन भी बढ़ने की उम्मीद है. अभी जहां रोजाना करीब 54,500 टन यूरिया बन रहा है, वह बढ़कर 67,000 टन प्रतिदिन तक पहुंच सकता है.

भंडार की स्थिति भी हुई बेहतर

उर्वरक विभाग ने यह भी कहा कि सक्रिय कदमों से पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में भंडार की स्थिति बेहतर हुई है. 19 मार्च तक, यूरिया का भंडार 55.22 लाख टन (लीटर) के मुकाबले 61.14 लाख टन (लीटर) था, डीएपी का भंडार 11.85 लाख टन (लीटर) के मुकाबले 24.24 लाख टन (लीटर) था, कॉम्प्लेक्स का भंडार 34.44 लाख टन (लीटर) के मुकाबले 57.21 लाख टन (लीटर) था और एसएसपी का भंडार 23.15 लाख टन (लीटर) के मुकाबले 24.80 लाख टन (लीटर) था. विभाग ने बताया कि केवल एमओपी का भंडार 14.13 लाख टन (लीटर) से घटकर 12.65 लाख टन (लीटर) रह गया है.

उद्योग जगत के सूत्रों ने बताया कि रूस, बेलारूस, मोरक्को और कनाडा ने यूरिया, डीएपी/टीएसपी और एमओपी बेचने की पेशकश की है, लेकिन सरकार फिलहाल यूरिया पर अधिक ध्यान केंद्रित करना चाहती है. अगर अगले एक-दो हफ्तों में स्थिति सामान्य हो जाती है, तो वास्तविक आवश्यकता के आधार पर आयात का निर्णय लिया जा सकता है. सूत्रों ने यह भी बताया कि इस बीच, आपसी सहमति से तय दर पर थोड़ी मात्रा में यूरिया का आयात भी किया जा सकता है.

MORE NEWS

Read more!