यूरिया की आड़ में चल रहा था नकली कारोबार, पुलिस ने छापेमारी कर किया फैक्ट्री का पर्दाफाश

यूरिया की आड़ में चल रहा था नकली कारोबार, पुलिस ने छापेमारी कर किया फैक्ट्री का पर्दाफाश

उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी में नकली लिक्विड यूरिया बनाने वाली अवैध फैक्ट्री का खुलासा हुआ है. पुलिस और कॉपीराइट टीम ने छापेमारी कर सब्सिडी वाली यूरिया से तैयार किए जा रहे फर्जी उत्पाद को पकड़ा. मौके से 70 बोरी यूरिया, करीब 100 बाल्टी लिक्विड यूरिया और पैकिंग सामग्री बरामद हुई है. मामले की जांच जारी है.

कौशाम्बी में नकली यूरिया का बड़ा खेल उजागरकौशाम्बी में नकली यूरिया का बड़ा खेल उजागर
क‍िसान तक
  • Kaushambi,
  • Aug 05, 2026,
  • Updated Aug 05, 2026, 11:48 AM IST

उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी जिले में नकली लिक्विड यूरिया बनाने वाली एक अवैध फैक्ट्री का खुलासा हुआ है. पुलिस और कॉपीराइट टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए चरवा थाना क्षेत्र के पांसौर गांव में चल रही इस फैक्ट्री पर छापा मारा. आरोप है कि यहां किसानों को मिलने वाली सब्सिडी वाली यूरिया का इस्तेमाल कर नकली लिक्विड यूरिया तैयार की जा रही थी और उसे बाजार में असली उत्पाद बताकर बेचा जा रहा था.

अधिकारियों के अनुसार, इस नकली लिक्विड यूरिया को BS-6 इंजन वाली गाड़ियों में इस्तेमाल होने वाली यूरिया के नाम पर बेचा जा रहा था. छापेमारी के दौरान टीम को बड़ी मात्रा में तैयार लिक्विड यूरिया, यूरिया की बोरियां, खाली और भरे हुए डिब्बे, कंपनी के नाम के स्टिकर, रैपर और पैकिंग का सामान मिला है.

पुलिस और कॉपीराइट टीम ने मिलकर की कार्रवाई

मामले की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने EIPR इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की जांच टीम के साथ मिलकर पांसौर गांव में कार्रवाई की. टीम में कंपनी के इन्वेस्टिगेटर ऑफिसर पीयूष श्रीवास्तव और देवेंद्र प्रताप सिंह भी शामिल थे.

जांच के दौरान मौके पर एक पूरा प्लांट मिला, जहां लंबे समय से नकली लिक्विड यूरिया तैयार करने का काम चल रहा था. फैक्ट्री में मशीनों और अन्य सामान की मदद से यूरिया को नए पैक में भरकर बाजार में बेचने की तैयारी की जा रही थी.

70 बोरी यूरिया और 100 बाल्टी लिक्विड यूरिया बरामद

छापेमारी के दौरान टीम ने करीब 70 बोरी यूरिया और लगभग 100 बाल्टी तैयार लिक्विड यूरिया बरामद की है. इसके अलावा बड़ी संख्या में खाली डिब्बे, पैकिंग सामग्री और कंपनियों के नाम वाले लेबल भी मिले हैं.

अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती जांच में सामने आया है कि सब्सिडी वाली यूरिया का गलत इस्तेमाल कर उसे दूसरे उत्पाद के रूप में तैयार किया जा रहा था. यह किसानों और आम लोगों दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकता है.

नकली यूरिया से किसानों और वाहनों को नुकसान का खतरा

जिला कृषि अधिकारी शिवशंकर चौधरी ने बताया कि इस मामले की सूचना मिलने के बाद टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की. उन्होंने कहा कि नकली लिक्विड यूरिया बनाने का यह काम अवैध तरीके से किया जा रहा था.

उन्होंने बताया कि इस तरह के नकली उत्पाद किसानों को नुकसान पहुंचा सकते हैं. वहीं, अगर इन्हें BS-6 वाहनों में इस्तेमाल किया जाता है तो इससे गाड़ी के इंजन पर भी खराब असर पड़ सकता है. सही गुणवत्ता वाला उत्पाद न मिलने से वाहन की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है.

फैक्ट्री संचालक मौके से फरार, जांच जारी

कार्रवाई के दौरान फैक्ट्री संचालक मौके से फरार हो गया. अधिकारियों के मुताबिक, फैक्ट्री से जुड़े लोग कोई जरूरी दस्तावेज भी नहीं दिखा सके हैं. शुरुआती जांच में पूरा मामला अवैध कारोबार का लग रहा है. फिलहाल कृषि विभाग, GST विभाग, पुलिस और कॉपीराइट टीम मामले की जांच कर रही है. आरोपियों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम समेत अन्य कानूनी धाराओं में कार्रवाई की तैयारी की जा रही है.

अधिकारियों ने कहा है कि किसानों और उपभोक्ताओं को नुकसान पहुंचाने वाले ऐसे अवैध कारोबार के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी.

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