रबी सीजन में खाद कालाबाजारी पर बड़ी कार्रवाई, बिहार में 118 दुकानों के लाइसेंस रद्द

रबी सीजन में खाद कालाबाजारी पर बड़ी कार्रवाई, बिहार में 118 दुकानों के लाइसेंस रद्द

बिहार में रबी सीजन के दौरान उर्वरक कालाबाजारी पर कृषि विभाग ने सख्त कार्रवाई करते हुए 118 प्रतिष्ठानों के लाइसेंस रद्द किए हैं. हालांकि 17.79 लाख किसानों को बीज वितरण के सरकारी दावों के बावजूद किसान गुणवत्ता और वितरण प्रणाली से असंतुष्ट नजर आ रहे हैं.

खाद की कालाबाजारी पर एफआईआर और सीधी प्रशासनिक कार्रवाई का प्रावधानखाद की कालाबाजारी पर एफआईआर और सीधी प्रशासनिक कार्रवाई का प्रावधान
अंक‍ित कुमार स‍िंह
  • Patna,
  • Feb 02, 2026,
  • Updated Feb 02, 2026, 2:16 PM IST

बिहार में रबी सीजन में उर्वरकों की कालाबाजारी को रोकने के लिए कृषि विभाग की ओर से इस बार बड़ी कार्रवाई की गई है. बीते कुछ सालों में जहां अन्य राज्यों की तरह बिहार में भी रबी सीजन में उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर किसानों में असंतोष देखने को मिल रहा था, वहीं इस साल उर्वरकों की कालाबाजारी पर कृषि विभाग ने रबी सीजन में कड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 118 प्रतिष्ठानों के लाइसेंस रद्द किए हैं. इस बार इस सीजन में राज्य के लगभग 17.79 लाख किसानों को विभिन्न फसलों के कुल 6.65 लाख क्विंटल बीज का वितरण किया गया है. लेकिन बीज वितरण में किसानों का एक वर्ग और किसान नेता उसकी गुणवत्ता और वितरण प्रणाली से नाखुश भी नजर आ रहे हैं.

जनवरी में इतने जिलों में लाइसेंस रद्द

इस बार रबी सीजन में उर्वरकों की अनुपलब्धता से ज्यादा उर्वरक प्रतिष्ठानों के लाइसेंस रद्द करने की घटनाएं अधिक सुनने को मिली हैं. रबी सीजन में कृषि विभाग द्वारा जिन 118 प्रतिष्ठानों के लाइसेंस रद्द किए गए हैं, उनमें से केवल जनवरी महीने में 16 जिलों के कुल 41 उर्वरक विक्रेताओं (प्रतिष्ठानों) के लाइसेंस रद्द किए गए हैं. इनमें पटना, गया, जहानाबाद, अरवल, औरंगाबाद, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर, पश्चिमी चंपारण, सीतामढ़ी, शिवहर, समस्तीपुर, मुंगेर, शेखपुरा, बांका, सुपौल और अररिया शामिल हैं. रबी 2025-26 के दौरान अब तक 42 उर्वरक प्रतिष्ठानों पर प्राथमिकी दर्ज की गई है.

राज्य में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं उर्वरक

कृषि मंत्री रामकृपाल यादव द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, राज्य में बीते 30 जनवरी तक कुल 1.71 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 1.64 लाख मीट्रिक टन डीएपी, 2.10 लाख मीट्रिक टन एनपीके, 0.44 लाख मीट्रिक टन एमओपी और 1.06 लाख मीट्रिक टन एसएसपी उपलब्ध हैं. वहीं इस बार राज्य में कुछ स्थानों को छोड़ दिया जाए तो राज्य के लगभग सभी जिलों में उर्वरकों को लेकर किसी तरह की बड़ी घटना सुनने को नहीं आई है.

बीज वितरण के आंकड़ों के बीच किसानों में मायूसी

कृषि विभाग के आंकड़ों पर अगर नजर डालें तो रबी मौसम में गेहूं, चना, मसूर, अलसी, मटर, सरसों, स्वीट कॉर्न, बेबी कॉर्न, हरा मटर सहित अन्य फसलों के प्रमाणित बीज अनुदानित दर पर राज्य के लगभग 17.79 लाख किसानों को विभिन्न फसलों के कुल 6.65 लाख क्विंटल बीज का वितरण किया जा चुका है. हालांकि इन सरकारी आंकड़ों के बावजूद भी राज्य के कई ऐसे किसान हैं, जिनका मानना है कि वास्तविकता में जिन किसानों को बीजों की सबसे ज्यादा जरूरत है, उन्हें अब भी नहीं मिल पा रहे हैं.

किसान नेता अशोक प्रसाद कहते हैं कि कृषि विभाग से मिलने वाले बीजों का उपयोग खेती के लिए कम और निजी उपयोग के लिए ज्यादा किया जाता है. वहीं विभाग की ओर से उन क्षेत्रों में बीजों का वितरण किया जाता है, जिन क्षेत्रों में उनकी खेती होती ही नहीं है या न के बराबर होती है. सरकार को तो पहले अपनी पॉलिसी में सुधार लाने की जरूरत है और इसके साथ ही कई बीजों पर मिलने वाला अनुदान बाजार मूल्य से काफी अधिक होता है.

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