
राजस्थान में अभी जीरा और मेथी दाना का सीजन चल रहा है. यहां इन दोनों फसलों की खेती बड़े पैमाने पर होती है. बदलते मौसम में इन फसलों पर कीटों का हमला हो रहा है. कई इलाकों में कीटों के प्रकोप की खबरें हैं. ऐसे में फसलों पर तुरंत और समय रहते कीटनाशकों के छिड़काव की सलाह दी गई है. इस बारे में भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने फसल एडवाइजरी जारी कर कुछ दवाओं के स्प्रे की सलाह दी है.
आईएमडी ने जीरे की फसल के लिए कहा है कि बीज बनने की अवस्था में किसानों को फसल की सिंचाई जरूर कर देनी चाहिए. अगर जीरे पर किसी तरह के कीट का प्रकोप दिख रहा है तो डाईमेथोएट 30 ईसी @ 1 एमएल प्रति लीटर पानी मिलाकर पौधों पर छिड़काव करें. इसके अलावा किसान चाहें तो एसीफेट 75 एसपी @750 ग्राम दवा पानी में मिलाकर प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें. किसान इन दोनों में किसी एक दवा के स्प्रे से कीटों को हमेशा के लिए खत्म कर सकते हैं.
राजस्थान में मेथी की खेती भी बड़े पैमाने पर होती है. उसके बारे में मौसम विभाग ने कहा है कि मेथी की फसल अगर बीज बनने की अवस्था में आ गई है तो उसमें सिंचाई जरूर कर देनी चाहिए. गेहूं को लेकर मौसम विभाग ने कहा है कि किसानों को सलाह दी जाती है कि गेहूं की फसल में बालियों में दूधिया अवस्था (95 दिन) पर सिंचाई करें. दीमक के हमले को नियंत्रित करने के लिए फसल में सिंचाई के साथ 4 लीटर क्लोरपाइरीफॉस 20 ईसी प्रति हेक्टेयर डालें.
किसानों को सलाह दी जाती है कि सरसों की फसल में बीज पकने की अवस्था (बुवाई के 95 दिन बाद) पर सिंचाई करें. एफिड के हमले को नियंत्रित करने के लिए मेलाथोइन 50 ईसी @ 1.25 लीटर या डायमेथोएट 30 ईसी @ 875 मिली प्रति हेक्टेयर का छिड़काव करें.
चना की फसल में फली छेदक कीट के संक्रमण के लिए अभी मौसम की स्थिति अनुकूल है. दिन का तापमान 28-30 डिग्री सेंटीग्रेड, रात का तापमान 09-11 डिग्री सेंटीग्रेड और बादल छाए रहते हैं तो फली छेदक कीट का हमला हो सकता है. ऐसे में किसानों को सलाह दी जाती है कि वे साफ मौसम में अगर 1.7-2.0 लार्वा प्रति मीटर पंक्ति लंबाई से ऊपर कीट की आबादी होने पर फ्लूबेंडियामाइड 20% wg @ 250 ग्राम या इमामेक्टिन बेंजोएट 5% एसजी @ 220 प्रति हेक्टेयर का छिड़काव करें.
नेपियर बाजरा के बारे में कहा गया है कि किसानों को सलाह दी जाती है कि वे गर्मियों के महीनों के दौरान हरे चारे की उपलब्धता बनाए रखने के लिए नेपियर घास की बुवाई के लिए खेत की तैयारी शुरू कर दें.
दिन का तापमान 28-30 डिग्री सेंटीग्रेड के बीच और सुबह में नमी और आंशिक बादल छाए रहने की स्थिति में जीरे की फसल में झुलसा का संक्रमण हो सकता है. इसलिए, किसानों को सलाह दी जाती है कि वे मौसम साफ होने पर थायोफैनेट मिथाइल 70% WP या मैन्कोजेब @ 02 ग्राम/लीटर पानी के साथ छिड़काव करें.
मौजूदा मौसम की स्थिति के कारण इसबगोल में डाउनी फफूंद रोग के संक्रमण की संभावना है. इसलिए, किसानों को सलाह दी जाती है कि वे भारी सिंचाई से बचें और रोग के प्रभावी नियंत्रण के लिए मेटिराम 55% + पाइराक्लोस्ट्रोबिन 5% WG @ 0.5 ग्राम/लीटर पानी का भी प्रयोग करें. किसानों को सलाह दी जाती है कि वे बागों में निमेटोड के प्रबंधन के लिए पेसिलोमाइसिस लिलासिनस लाभकारी कवक 1.5% @ 3 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर या नीम केक का उपयोग करें.