
खरीफ सीजन में यूरिया और डीएपी खाद के लिए किसानों को अब लंबी कतारों, टोकन की परेशानी और जबरन खाद का कॉम्बो लेने जैसी दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ेगा.किसानों की समस्याओं को देखते हुए राज्य शासन ने उर्वरक वितरण व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है. इसके तहत ‘ई-विकास 2.0’ (वितरण एवं कृषि उर्वरक आपूर्ति समाधान) प्रणाली लागू की गई है.नई व्यवस्था का उद्देश्य किसानों को उनकी जरूरत के अनुसार खाद उपलब्ध कराने के साथ-साथ वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी और आसान बनाना है.
अब तक किसानों की प्रमुख शिकायतों में से एक यह थी कि उन्हें जरूरत सिर्फ यूरिया या डीएपी की होती थी, लेकिन कई बार दूसरे उर्वरक भी साथ लेने के लिए कहा जाता था. इससे किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता था. ई-विकास 2.0 में अब किसान अपनी जरूरत के अनुसार कोई भी उर्वरक स्वतंत्र रूप से खरीद सकेंगे.किसी दूसरे उर्वरक के साथ अनिवार्य रूप से टैगिंग या कॉम्बो लेने की व्यवस्था खत्म कर दी गई है. यानी किसान को जिस खाद की जरूरत है, वह उसी की खरीद कर सकेगा.
पहले आईसीएआर की निर्धारित सीमा से अधिक उर्वरक की मांग करने पर किसान को पोर्टल पर करीब 50 शब्दों में इसका कारण बताना पड़ता था. ग्रामीण क्षेत्रों के कई किसानों के लिए यह प्रक्रिया कठिन साबित होती थी. नई व्यवस्था में इसे आसान कर दिया गया है. अब अतिरिक्त खाद की जरूरत होने पर किसान को लंबा कारण लिखने के बजाय ड्रॉपडाउन मेनू से निर्धारित कारण का चयन करना होगा.इसके साथ ही खाद की मात्रा की गणना प्रति हेक्टेयर बैग के आधार पर स्पष्ट रूप से दिखाई जाएगी.पोर्टल पर फसलवार उर्वरक समूहों की जानकारी भी उपलब्ध रहेगी, जिससे किसानों को अपनी फसल के अनुसार सही खाद का चयन करने में सुविधा होगी.
प्राकृतिक आपदा, कीट प्रकोप या मौसम की वजह से यदि किसी किसान की फसल खराब हो जाती है और उसे दोबारा बोवनी करनी पड़ती है, तो ऐसी स्थिति में अतिरिक्त खाद की जरूरत हो सकती है.इसके लिए ई-विकास 2.0 में ‘एक्सेप्शनल हैंडलिंग’ की सुविधा जोड़ी गई है. इसके माध्यम से किसान दोबारा खाद की मांग कर सकेगा. इस मांग को तहसीलदार या अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) द्वारा 48 घंटे के भीतर अनुमोदित किया जा सकेगा.
डबल लॉक केंद्रों पर पहले प्रतिदिन 300 टोकन की सीमा होने के कारण कई किसानों को समय पर टोकन नहीं मिल पाता था. दूर-दराज के गांवों से आने वाले किसानों को कई बार बिना खाद लिए वापस लौटना पड़ता था.अब यह सीमा समाप्त कर दी गई है। मांग के अनुसार 300 से अधिक टोकन भी जनरेट किए जा सकेंगे. साथ ही केंद्रों पर उपलब्ध बफर स्टॉक की ऑटोमेटेड निगरानी की व्यवस्था की गई है. यदि किसान किसी कारण से टोकन की निर्धारित तारीख पर खाद लेने नहीं पहुंच पाता है, तो टोकन जनरेट होने के 24 घंटे बाद उसे ऑनलाइन कैंसिल करने की सुविधा भी उपलब्ध होगी.
किसानों को डिजिटल सुविधा देने के लिए सरकार जल्द ही WhatsApp Bot शुरू करने जा रही है. इसके जरिए किसान अपने मोबाइल से WhatsApp पर केवल ‘HELP’ या ‘मदद’ लिखकर जानकारी प्राप्त कर सकेंगे.इसके माध्यम से किसानों को खाद के टोकन, नजदीकी रिटेलर, उपलब्ध खाद का स्टॉक, खाद उठाने की तारीख और टोकन की वैधता जैसी जानकारी मोबाइल पर मिल सकेगी. इस सुविधा से किसानों को बार-बार खाद केंद्रों के चक्कर लगाने की जरूरत कम होगी और घर बैठे खाद से जुड़ी जरूरी जानकारी मिल सकेगी.
ई-विकास पोर्टल या खाद खरीद से जुड़ी किसी समस्या के समाधान के लिए किसान शासकीय कार्य दिवसों में सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक हेल्पलाइन नंबर +91 78802 23344 पर संपर्क कर सकते हैं.
किसानों को खाद की उपलब्धता और दूसरी जरूरी प्रक्रियाओं के लिए समय रहते तैयार करने के उद्देश्य से 20 अगस्त से 15 सितंबर तक जिले की पंचायतों में विशेष शिविर लगाए जाएंगे. कलेक्टर नेहा मीना के मार्गदर्शन में एग्रीस्टेक, पैक्स सदस्यता और अग्रिम उर्वरक उठाव अभियान चलाया जा रहा है.इन शिविरों में कृषि, राजस्व, सहकारिता और पंचायत विभाग के अधिकारी गांवों तक पहुंचकर किसानों की समस्याओं का समाधान करेंगे.
प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे बोवनी के समय खाद के लिए होने वाली भीड़ और संभावित परेशानी से बचने के लिए इन विशेष शिविरों का लाभ उठाएं. किसान समय रहते अपनी दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी कराने के साथ खाद का अग्रिम उठाव भी कर सकते हैं. नई ई-विकास 2.0 व्यवस्था के लागू होने से सरकार का लक्ष्य खाद वितरण को अधिक पारदर्शी, सरल और किसान-केंद्रित बनाना है. खास तौर पर जबरन कॉम्बो, टोकन की सीमित संख्या और अतिरिक्त खाद के लिए जटिल प्रक्रिया जैसी समस्याओं को दूर करने से किसानों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है.