10 बीघा जमीन, 2 बोरी खाद: मध्य प्रदेश में आधार कार्ड की लाइन ने खोली व्यवस्था की पोल

10 बीघा जमीन, 2 बोरी खाद: मध्य प्रदेश में आधार कार्ड की लाइन ने खोली व्यवस्था की पोल

मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के खिलचीपुर में खाद की किल्लत के बीच किसानों की बेबसी सामने आई है. खाद लेने के लिए किसान आधार कार्ड और पट्टे की फोटो कॉपी जमीन पर बिछाकर अपनी बारी सुरक्षित कर रहे हैं. पर्याप्त खाद, अव्यवस्थित वितरण और बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर किसानों में भारी नाराजगी है.

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पंकज शर्मा
  • Rajgarh,
  • Aug 14, 2026,
  • Updated Aug 14, 2026, 2:24 PM IST

मध्य प्रदेश में खरीफ सीजन में खाद के लिए परेशान किसानों का गुस्सा गुरुवार को खिलचीपुर में खुलकर सामने आया. सोमवारिया स्थित कृषक सहकारी विपणन समिति के वेयर हाउस के बाहर सुबह से ही किसानों की लंबी कतार लगी रही. अपनी बारी तय रखने के लिए किसानों ने जमीन पर आधार कार्ड और पट्टे की फोटो कॉपी रख दी और कागज उड़ न जाएं, इसलिए उन पर पत्थर रख दिए. इसी दौरान लिंबोदा के किसानों ने खाद वितरण की व्यवस्था और किसानों की परेशानी को लेकर खुलकर नाराजगी जताई.

लिंबोदा गांव के किसान तरवर सिंह ने बताया कि वे बुधवार को आधार कार्ड की फोटो कॉपी लेकर खाद लेने पहुंचे थे. वहां पट्टे की फोटो कॉपी लाने को कहा गया. उन्होंने पट्टे की फोटो कॉपी भी करवाई और गुरुवार सुबह फिर खाद लेने पहुंच गए. सुबह से लाइन में लगने के बाद अब उन्हें मूल पट्टा लेकर आने के लिए कहा जा रहा है. उनका कहना है कि किसानों को दस्तावेजों के नाम पर बार-बार परेशान किया जा रहा है और वेयर हाउस पर पीने के पानी तक की व्यवस्था नहीं है.

किसान तरवर सिंह ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा- “मैं कह रहा हूं मुख्यमंत्री मोहन जी से, आप अभिनंदन ही करते रहोगे या कुछ किसानों की व्यवस्था करोगे? हमें इस सरकार को वोटे देते-देते यह दिन आ गए. अब मन नहीं करता, मैं खुली कह रहा हूं. आज तक नहीं दिया, पंजे में अब देना पड़ेगा, मजबूरी में.” तरवर सिंह का यह बयान खाद के लिए परेशान किसानों के बीच सामने आई नाराजगी को जाहिर करता है.

सुबह 6 बजे से बैठे किसान, कागजों से तय हो रही बारी

चांदपुरा के किसान प्रकाश वर्मा ने बताया कि वे सुबह 6 बजे से खाद लेने के लिए बैठे हैं. यहां किसानों की बारी जमीन पर कागज रखकर तय हो रही है. सुबह से भूखे-प्यासे बैठे किसानों को अब तक खाद नहीं मिली. उन्होंने बताया कि एक बीघा पर एक कट्ठा खाद दी जा रही है. इतनी कम मात्रा में खाद मिलने से खेती की जरूरत पूरी होना मुश्किल है.

10 बीघा जमीन, सिर्फ 2 बोरी खाद

गांव सेवनी से पहुंचे किसान प्रभुलाल तंवर ने बताया कि उनके पास 10 बीघा जमीन है, लेकिन उन्हें सिर्फ दो बोरी खाद दी जा रही है. वहीं 20 बीघा वाले किसान को तीन बोरी खाद देने की बात कही जा रही है. उन्होंने कहा कि इतनी कम मात्रा में खाद मिलने से फसल की जरूरत कैसे पूरी होगी. किसान सुबह से लाइन में लगे हैं, लेकिन पानी और दूसरी जरूरी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं.

पत्थर बने किसानों की लाइन का सहारा

खाद लेने के लिए किसानों की भीड़ बढ़ने के बाद वेयरहाउस के बाहर अलग ही तस्वीर देखने को मिली. किसानों ने अपनी बारी के लिए आधार कार्ड और पट्टे की फोटो कॉपी जमीन पर रख दी. हवा से कागज उड़ न जाएं, इसके लिए उन पर पत्थर रख दिए गए. महिलाएं और किसान इन्हीं कागजों के सहारे घंटों अपनी बारी का इंतजार करते रहे.

किसानों की मांग, पर्याप्त खाद मिले

किसानों का कहना है कि खाद के लिए सुबह से घंटों लाइन में लगना पड़ रहा है. पर्याप्त मात्रा में खाद नहीं मिलने और दस्तावेजों को लेकर बार-बार बुलाए जाने से परेशानी बढ़ रही है. किसानों ने पर्याप्त खाद उपलब्ध कराने, वितरण की प्रक्रिया स्पष्ट करने और वेयरहाउस पर पीने के पानी सहित जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है. किसानों का कहना है कि समय पर खाद नहीं मिली तो इसका सीधा असर फसल पर पड़ेगा.

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