कश्मीर के पेड़ों पर मंडराया नए कीट का खतरा, चिनार के पेड़ों को बना रहा निशाना

कश्मीर के पेड़ों पर मंडराया नए कीट का खतरा, चिनार के पेड़ों को बना रहा निशाना

कश्मीर में पॉपलर और विलो पेड़ों पर नए कीट Drosicha turkistanica के हमले से किसानों की चिंता बढ़ गई है. यह कीट पेड़ों का रस चूसकर उन्हें कमजोर करता है और ज्यादा संक्रमण में पेड़ सूख सकते हैं. विशेषज्ञों ने बाहर से आने वाली पौध सामग्री की सही क्वारंटीन, जांच और निगरानी मजबूत करने की जरूरत बताई है.

कश्मीर के पेड़ों पर मंडराया नए कीट का खतराकश्मीर के पेड़ों पर मंडराया नए कीट का खतरा
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Aug 21, 2026,
  • Updated Aug 21, 2026, 11:05 AM IST

कश्मीर घाटी में पॉपलर और विलो यानी चिनार जैसी महत्वपूर्ण पेड़ प्रजातियों पर एक नए कीट के हमले ने किसानों और वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है. इस कीट का नाम ड्रोसिका तुर्किस्तानिका (Drosicha turkistanica) बताया गया है. यह कीट पेड़ों का रस चूसकर उन्हें कमजोर करता है. अगर इसका हमला ज्यादा बढ़ जाए तो पेड़ सूख भी सकते हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि घाटी में बाहर से आने वाली पौध सामग्री के साथ नए कीटों के पहुंचने का खतरा बढ़ रहा है.

दक्षिण कश्मीर में पहली बार दिखा नया कीट

माउंटेन रिसर्च सेंटर फॉर फील्ड क्रॉप्स (MRCFC), खुडवानी के प्रोफेसर बशीर अहमद राथर के मुताबिक, Drosicha turkistanica कश्मीर क्षेत्र के लिए नया कीट है. इसकी मौजूदगी दक्षिण कश्मीर के कुछ इलाकों में सामने आई है. किसानों के अनुसार, पॉपलर और विलो के पेड़ों पर इसका हमला सबसे पहले कुलगाम में देखा गया और इसके बाद दक्षिण कश्मीर के दूसरे इलाकों से भी इसकी शिकायतें सामने आने लगीं.

यह कीट पेड़ों से रस चूसता है. इससे पेड़ धीरे-धीरे कमजोर होने लगते हैं. अगर समय रहते इसका नियंत्रण नहीं किया गया तो गंभीर संक्रमण की स्थिति में पेड़ों के सूखने का खतरा भी बढ़ सकता है.

पौध सामग्री के साथ घाटी में पहुंच रहे नए कीट

विशेषज्ञों ने इस मामले में सबसे बड़ी चिंता बाहर से आने वाली पौध सामग्री को लेकर जताई है. प्रोफेसर बशीर अहमद राथर का कहना है कि पौध सामग्री की सही तरीके से जांच और क्वारंटीन नहीं होने पर नए कीट और बीमारियां एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में पहुंच सकती हैं.

कश्मीर में खेती और बागवानी के लिए अलग-अलग जगहों से पौधे और रोपण सामग्री लाई जाती है. अगर इन पौधों की जांच ठीक से नहीं की जाती है और उनमें पहले से कोई कीट या बीमारी मौजूद है, तो उसके घाटी में फैलने का खतरा रहता है. एक बार नया कीट स्थानीय वातावरण में स्थापित हो जाए तो उसे नियंत्रित करना किसानों के लिए काफी मुश्किल और महंगा हो सकता है.

पॉपलर की खेती से होती है किसानों की कमाई

कुलगाम और दक्षिण कश्मीर के कई इलाकों में पॉपलर के पेड़ किसानों की आय का महत्वपूर्ण जरिया हैं. अरवानी के किसान गुलाम नबी ने बताया कि इलाके के बहुत से लोगों की कमाई पॉपलर की खेती और इसके पेड़ों पर निर्भर है.

ऐसे में पेड़ों पर नए कीट का हमला किसानों के लिए सिर्फ पेड़ों की बीमारी का मामला नहीं है, बल्कि उनकी आमदनी से भी जुड़ा हुआ है. अगर कीट तेजी से फैलता है और पेड़ों को नुकसान पहुंचाता है, तो किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है.

कश्मीर में पहले भी फैल चुका है नया कीट

कश्मीर में यह पहला मामला नहीं है जब बाहर से आए किसी कीट ने किसानों की चिंता बढ़ाई हो. इससे पहले घाटी के सेब के बागों में एप्पल लीफ माइनर नामक कीट की मौजूदगी सामने आई थी. किसानों के अनुसार, इसकी शुरुआत शोपियां से हुई और बाद में यह घाटी के दूसरे सेब उत्पादक इलाकों में भी देखा गया.

सेब की खेती में इस कीट के फैलने से किसानों की लागत बढ़ी है. कीट से बचाव के लिए किसानों को अतिरिक्त कीटनाशक का छिड़काव करना पड़ रहा है. इससे खेती पर होने वाला खर्च बढ़ जाता है और किसानों की कमाई पर भी असर पड़ता है.

हाई डेंसिटी एप्पल प्लांटेशन से भी जुड़ी चिंता

कश्मीर में पिछले कुछ वर्षों में हाई डेंसिटी यानी अधिक पौधे लगाने वाली सेब की खेती को बढ़ावा मिला है. इसके लिए दूसरे देशों और क्षेत्रों से नई किस्मों और पौध सामग्री को घाटी में लाया गया है. इनमें इटली और अमेरिका से लाई गई रोपण सामग्री भी शामिल है. शोपियां के सेब किसान तारिक अहमद का कहना है कि अगर पौध सामग्री लाने और उसकी जांच के दौरान तय नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया तो नए कीट और बीमारियों के घाटी में पहुंचने का खतरा बढ़ सकता है.

उनका कहना है कि एप्पल लीफ माइनर के कारण किसानों को अतिरिक्त कीटनाशक का इस्तेमाल करना पड़ रहा है. इससे उत्पादन लागत बढ़ रही है. किसानों के अनुसार, हर साल इस कीट की वजह से बड़ी मात्रा में अच्छी गुणवत्ता वाले सेब को नुकसान पहुंचता है.

क्वारंटीन व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि कश्मीर में बागवानी और पेड़-पौधों की खेती को बढ़ाने के साथ-साथ पौध सामग्री की सुरक्षा पर भी उतना ही ध्यान देना जरूरी है. किसानों को नई और बेहतर किस्मों के पौधे मिलना जरूरी है, लेकिन इनके साथ किसी नए कीट या बीमारी के घाटी में पहुंचने का खतरा नहीं होना चाहिए.

इसके लिए बाहर से आने वाले पौधों की अच्छी तरह जांच, क्वारंटीन प्रक्रिया और लगातार निगरानी जरूरी है. अगर पौध सामग्री में कोई कीट या बीमारी मिलती है तो उसे खेतों और बागों तक पहुंचने से पहले ही रोकना ज्यादा आसान होता है.

किसानों की लागत और उत्पादन पर पड़ सकता है असर

नए कीटों के फैलने का सबसे बड़ा असर किसानों की खेती की लागत पर पड़ सकता है. कीटों को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त दवाओं और छिड़काव की जरूरत पड़ती है. इससे किसानों का खर्च बढ़ता है. इसके अलावा, अगर कीट पेड़ों या फलों को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं तो उत्पादन और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो सकते हैं.

कश्मीर की अर्थव्यवस्था में बागवानी और पेड़ आधारित खेती की महत्वपूर्ण भूमिका है. इसलिए पॉपलर, विलो और सेब जैसे प्रमुख पौधों पर नए कीटों की निगरानी करना बेहद जरूरी है. विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते इन कीटों की पहचान और रोकथाम की जाए तो किसानों को बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है.

बाहर से आने वाली पौध सामग्री पर निगरानी जरूरी

कश्मीर में नए कीटों का सामने आना एक बड़ी चुनौती की ओर इशारा करता है. किसानों को बेहतर पौध और नई किस्में उपलब्ध कराना जरूरी है, लेकिन इसके साथ यह भी सुनिश्चित करना होगा कि बाहर से आने वाली पौध सामग्री पूरी तरह सुरक्षित हो.

विशेषज्ञों के मुताबिक, मजबूत क्वारंटीन व्यवस्था, पौध सामग्री की नियमित जांच और खेतों में लगातार निगरानी से नए कीटों को फैलने से रोका जा सकता है. पॉपलर और विलो पर सामने आए इस नए कीट ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि कश्मीर में बाहर से आने वाले पौधों की जांच और निगरानी को और मजबूत करने की जरूरत है.

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