
देश में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए कई तरह के प्रयास किए जा रहे हैं ताकि देश के किसान लंबे समय तक खेती कर सकें और बेहतर उपज हासिल कर सकें. इसके साथ ही जहरीले रसायन के इस्तेमाल से उत्पादित इन फसलों का उपभोग करने वाले लोग भी गंभीर बीमारियों से बचे रहेंगे. इसे देखते हुए राज्य और केंद्र सरकार समय समय पर कुछ कुछ कीट, खरपतवार और दवाओं के इस्तेमाल पर बैन लगाती है. इसी तर्ज पर ओडिशा सरकार ने हर्बीसाइड पैराक्वाट को बैन कर दिया है. इसका इस्तेमाल खर-पतवार को नष्ट करने के लिए किया जाता है और यह बेहद ही जहरीला होता है. इसे देखते हुए इस पर बैन लगाया गया है.
वहीं एक अधिकारी ने बताया कि पैराक्वाट नामक शाकनाशी का उपयोग घर या सामुदायिक भवनों के लॉन, वाणिज्यिक जगंलों में खरपतवार जैसे अवांछित पौधों को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है. उन्होंने यह भी कहा कि कभी कभी इसका प्रयोग पानी में मौजूद खर-पतवार को नियंत्रित करने के लिए सीधे पानी में ही किया जाता है जो काफी नुकसानदायक साबित हो सकता है. ऐसा इसलिए क्योंकि पानी के साथ बहकर यह जहरीला पदार्थ कई खेतों और तालाबों मे जाता है जिससे जलीय जीवों को भी नुकसान होता है.
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शाकनाशी पर प्रतिबंध को लेकर एक अधिकारी ने कहा कि सार्वजनिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए और मानव स्वास्थ्य और जानवरों पर रसायन के प्रतिकूल प्रभाव को रोकने के लिए यह निर्णय लिया गया है. उन्होंने कहा कि प्रतिबंध आदेश प्रभावी होने के साथ ही इस जहरीले रसायन पैराक्वाट की बिक्री, निर्माण और उपयोग को पूरे प्रदेश में प्रतिबंधित कर दिया गया है. कीटनाशक अधिनियम, 1968 के प्रावधानों के अनुसार, प्रतिबंध प्रारंभ में दो महीने की अवधि के लिए प्रभावी होगा. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अनुसंधान संस्थानों और अन्य हितधारकों से वैज्ञानिक राय लेने के बाद केंद्र सरकार को ओडिशा में इस रसायन पर स्थायी प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव भी देगी.
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ओडिशा सरकार की 'मो सरकार' (मेरी सरकार) पहल के तहत प्रतिक्रिया प्राप्त करने के बाद, मुख्यमंत्री कार्यालय ने कृषि और किसान अधिकारिता विभाग को इस रसायन के जहरीलेपन और मानव जीवन को इससे होने वाले किसी भी प्रकार के नुकसान को रोकने के लिए पैराक्वाट पर प्रतिबंध लगाने के मामले की जांच करने की सलाह दी.
एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय में, राज्य सरकार ने अब अधिकृत डीलरों द्वारा कीटनाशकों और कृषि रसायनों की बिक्री के लिए कृषि और संबंधित सरकारी विभागों के नामित अधिकारियों के साथ-साथ ओयूएटी और कृषि अनुसंधान संस्थानों के वैज्ञानिकों द्वारा प्रिस्क्रिप्शन को अनिवार्य कर दिया है. 'पीटीआई' को एक अधिकारी ने कहा, कृषि विभाग द्वारा विस्तृत दिशानिर्देश तैयार किए जाएंगे, इससे अनुसंधान वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार कीटनाशकों और कृषि रसायनों का उचित उपयोग हो सकेगा, जिससे किसानों और पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम किया जा सकेगा.