
छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में खाद बांटने में गडबड़ी को लेकर प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है. किसानों को तय नियमों के तहत उर्वरक उपलब्ध कराने और कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए कृषि विभाग ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है. यूरिया वितरण में गड़बड़ी पाए जाने के बाद जिले की चार निजी उर्वरक फर्मों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश जारी किए गए हैं. प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद जिले के खाद कारोबारियों में हड़कंप की स्थिति है.
उप संचालक कृषि एफ.आर. कश्यप ने उर्वरक निरीक्षक बागबाहरा और सरायपाली को संबंधित फर्म संचालकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं. छत्तीसगढ़ जनसंपर्क की प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक मेसर्स राजेश अग्रवाल सरायपाली, मेसर्स ओम फर्टिलाइजर सरायपाली, आर.एस. ट्रेडर्स बागबाहरा और जय मां भीमेश्वरी ट्रेडर्स सुनसुनिया फर्मों पर कार्रवाई होगी. जांच में सामने आया कि इन फर्मों ने 16 मार्च से 29 मार्च 2026 के बीच यूरिया वितरण के दौरान शासन द्वारा तय दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया.
जिला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि जिले में उर्वरक की बिक्री केवल पॉस (PoS) मशीन के जरिए ही की जाएगी. कलेक्टर विनय लंगेह ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि खाद वितरण व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखी जाए और किसी भी तरह की लापरवाही मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाए. प्रशासन का कहना है कि किसानों के हिस्से का खाद गलत तरीके से बेचने वालों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा.
महासमुंद जिले में यह पहली कार्रवाई नहीं है. इससे पहले भी उर्वरक वितरण में अनियमितता पाए जाने पर 26 निजी उर्वरक विक्रेताओं के लाइसेंस 21 दिनों के लिए निलंबित किए जा चुके हैं. कृषि विभाग लगातार निरीक्षण कर रहा है, ताकि किसानों को तय कीमत और सही प्रक्रिया के तहत खाद मिल सके.
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे हमेशा पॉस मशीन के माध्यम से ही उर्वरक खरीदें और हर खरीद पर पक्का बिल जरूर लें. विभाग ने यह भी कहा है कि यदि कोई विक्रेता यूरिया, डीएपी या अन्य उर्वरक निर्धारित दर से अधिक कीमत पर बेचता है तो इसकी शिकायत तुरंत अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, तहसीलदार या वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी से करें. प्रशासन का कहना है कि किसानों की शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी.