खरीफ सीजन से पहले सरकार का महा-मिशन, यूरिया-DAP का 'ओवरडोज' लेने वाले 100 जिलों पर लगेगा ब्रेक

खरीफ सीजन से पहले सरकार का महा-मिशन, यूरिया-DAP का 'ओवरडोज' लेने वाले 100 जिलों पर लगेगा ब्रेक

देश में खरीफ सीजन की शुरुआत से ठीक पहले 'खेत बचाओ अभियान' के तहत एक बड़ा फैसला लिया गया है. इसका सबसे पहला और मुख्य टारगेट देश के वो 100 जिले हैं, जहां यूरिया और डीएपी जैसी केमिकल खादों का सबसे ज्यादा 'ओवरडोज़'इस्तेमाल हो रहा है. रसायनों के इस अंधाधुंध इस्तेमाल से खेतों की मिट्टी बीमार होकर बंजर होने की कगार पर पहुंच गई है.

Khet bachao abhiyan fertilizer reductionKhet bachao abhiyan fertilizer reduction
जेपी स‍िंह
  • नई दिल्ली,
  • May 30, 2026,
  • Updated May 30, 2026, 4:43 PM IST

नई दिल्ली के पूसा स्थित नास (NASC) कॉम्प्लेक्स में आयोजित 'खरीफ सम्मेलन 2026' का दूसरा दिन भारतीय कृषि के लिए एक खास निर्णय लिया गया. देश के केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्रियों और केंद्र व राज्य के आला कृषि अधिकारियों की भारी मौजूदगी में एक बेहद महत्वपूर्ण योजना की रूपरेखा रखी गई. इस महामंथन का मुख्य एजेंडा था- हमारी बीमार होती मिट्टी की सेहत सुधारना और खेती को रसायनों के चंगुल से आज़ाद कराना. इसी मंच से 'उर्वरकों के विवेकपूर्ण उपयोग पर राष्ट्रीय अभियान' यानी 'खेत बचाओ अभियान' का आक्रामक शंखनाद किया गया.  1 से 30 जून 2026 तक चलने वाले इस देशव्यापी मिशन का मकसद सिर्फ खाद की खपत कम करना नहीं, बल्कि दम तोड़ती जमीन में फिर से जान फूंकना है.भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR) के प्रसार उप-महानिदेशक डॉ. राजवीर सिंह ने इस सम्मेलन में पूरी कार्ययोजना का ब्यौरा पेश किया, जिसने आने वाले कल की खेती की तकदीर बदलने की उम्मीद जगाई है.

100 जिलों में केमिकल खाद का ओवरडोज

आज ज्‍यादा पैदावार की अंधी दौड़ में हमारी धरती रसायनों के बोझ से कराह रही है. डॉ. राजवीर सिंह के मुताबिक, इस अभियान का सबसे पहला और कड़ा फोकस देश के उन 100 जिलों पर है, जहां डीएपी और  यूरिया का बेतहाशा और असंतुलित इस्तेमाल हो रहा है. आंकड़ों के आईने में देखें तो इस लिस्ट में 30 जिलों के साथ उत्तर प्रदेश सबसे ऊपर है.

इसके बाद पंजाब और मध्य प्रदेश के 11-11 जिले, और राजस्थान के 10 जिले शामिल हैं. इनके अलावा आंध्र प्रदेश (8), गुजरात (8), हरियाणा (7), कर्नाटक (5), पश्चिम बंगाल (4), बिहार (2), महाराष्ट्र (2), ओडिशा (1) और छत्तीसगढ़ (1) के ज़िले भी इस खतरे की ज़द में हैं. इन इलाक़ों की मिट्टी में रसायनों की मात्रा इस कदर बढ़ चुकी है कि अब वहां तुरंत 'इलाज' की सख़्त जरूरत है, वरना ये जमीनें हमेशा के लिए बंजर हो सकती हैं.

कागज़ पर नहीं, सीधे खेतों में उतरेगा एक्शन प्लान

इतने बड़े पैमाने पर बदलाव लाने के लिए एक बेहद मज़बूत और मुस्तैद सांगठनिक ढांचा तैयार किया गया है. पूरे देश में 1,657 से ज्‍यादा वैज्ञानिकों और अफसरों की टीमें गठित की गई हैं, जिनमें से 500 टीमें विशेष रूप से उन्हीं 100 प्रभावित ज़िलों में तैनात रहेंगी. कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस अभियान को और धार देते हुए सुझाव दिया कि टीमें हफ्ते में 3 दिन के बजाय पूरे 5 दिन गांवों का दौरा करेंगी.

इस रफ्तार से अभियान के दौरान 40,000 गांवों को सीधे कवर किया जाएगा और लगभग 50 लाख किसानों के दरवाजे तक दस्तक दी जाएगी. यह अभियान सिर्फ कागजी दावों तक सीमित न रहे, इसके लिए ICAR स्तर पर एक 'स्टीयरिंग कमेटी' और चौबीसों घंटे काम करने वाला 'मॉनिटरिंग सेल-कम-वॉर रूम' बनाया गया है. हर राज्य में एक नोडल अधिकारी तैनात है जो DAP और यूरिया के अंधाधुंध इस्तेमाल पर लगाम लगाने के लिए जमीनी स्तर पर पल-पल की निगरानी कर रहा है.

एक करोड़ किसानों तक सीधी दस्तक

खेत बचाओ अभियान' की असली ताक़त इसका जन-आंदोलन बनना है. इस मुहिम के तहत संपर्क और जागरूकता का एक ऐसा विशाल नेटवर्क तैयार किया गया है जो सीधे करोड़ों लोगों के जीवन को छूएगा. अभियान का लक्ष्य करीब 1.00 करोड़ किसानों तक सीधी पहुंच बनाना है. क्षमता विकास के तहत 5 लाख किसानों, 75 हज़ार खाद-बीज विक्रेताओं, 1.25 लाख सरपंचों व जनप्रतिनिधियों और 2.00 लाख FPO व महिला स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों को विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है.

किसानों का भरोसा जीतने के लिए देश भर के 75 हजार खेतों पर 'लाइव डेमो'  करके दिखाया जाएगा है कि कम रासायनिक खाद में भी उम्दा पैदावार कैसे ली जा सकती है. साथ ही, सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों के ज़रिए लगभग 3.50 करोड़ लोगों तक इस पैगाम को पहुंचाया जाएगा.

केमिकल में भारी कटौती से सुरक्षित होगा कल

इस अभियान का एक बड़ा दारोमदार 'नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग' (NMNF) को आगे बढ़ाना है, जिसके तहत अब तक तय लक्ष्य से ज़्यादा यानी 18,893 प्राकृतिक खेती क्लस्टर्स बनाए जा चुके हैं और 20.93 लाख किसान इससे जुड़ चुके हैं. देश भर के कृषि विज्ञान केंद्रों में बने मॉडल प्लॉट्स को देखकर किसानों को अपनी कम से कम 25% जमीन पर प्राकृतिक  खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है. इसके साथ ही, 'खाद्य तेल पर राष्ट्रीय मिशन' के तहत सरसों और सोयाबीन जैसी तिलहन फसलों की पैदावार बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है.

कर्नाटक के KVK बेलागावी की तर्ज पर बड़े पैमाने पर राइज़ोबियम, एज़ोटोबैक्टर और वर्मीकम्पोस्ट जैसे 'बायो-इनपुट्स' के उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है. साल 2026-27 के लिए तय 15-20 टन बायो-इनपुट के इस्तेमाल से रसायनों में 15 फीसदी और कीटनाशकों में 40 फीसदी तक की भारी कटौती होगी. कृषि मंत्री ने कहा कि शिवराज सिंह चौहान, यह अभियान महज एक सरकारी प्रोग्राम नहीं, बल्कि मिट्टी को बचाने और भारतीय कृषि को टिकाऊ और सुरक्षित भविष्य देने की एक संजीदा जद्दोजहद है.

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