
अप्रैल महीने का आखिरी सप्ताह आते ही गर्मी ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं. तापमान लगातार बढ़ रहा है, तेज धूप और गर्म हवाओं ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है. ये मौसम सिर्फ आम लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि किसानों के लिए भी चिंता का कारण बन जाता है. खासकर जायद सीजन की फसलों की देखभाल इस समय बड़ी चुनौती बन जाती है. तेज गर्मी की वजह से खेतों की मिट्टी जल्दी सूखने लगती है, जिसका सीधा असर फसलों की बढ़वार पर पड़ता है. कई बार पौधे कमजोर पड़ जाते हैं, पत्तियां मुरझाने लगती हैं और उत्पादन घटने का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है. अगर समय रहते कुछ खास उपाय अपनाए जाएं, तो जायद सीजन में भी अच्छी पैदावार ली जा सकती है और नुकसान से बचा जा सकता है.
जायद सीजन में मुख्य रूप से खीरा, ककड़ी, तरबूज, खरबूजा, लौकी, करेला, भिंडी, मूंग, सूरजमुखी और मक्का जैसी फसलें उगाई जाती हैं. इन फसलों को अधिक गर्मी में बचाने के लिए सबसे जरूरी है समय पर सिंचाई करना. किसान सुबह जल्दी या शाम के समय हल्की सिंचाई करें, ताकि पौधों को पर्याप्त नमी मिल सके और पानी जल्दी सूखे नहीं. वहीं, दोपहर में सिंचाई करने से बचना चाहिए, क्योंकि तेज धूप में पानी जल्दी उड़ जाता है.
फसलों की जड़ों में नमी बनाए रखने के लिए मल्चिंग करना बहुत फायदेमंद होता है. इसके लिए सूखी घास, पुआल, पत्तियां या प्लास्टिक मल्च का उपयोग किया जा सकता है. इससे मिट्टी ठंडी रहती है, नमी बनी रहती है और खरपतवार भी कम उगते हैं. खासकर सब्जी वाली फसलों में यह तरीका काफी फायदेमंद माना जाता है.
गर्मी के मौसम में पौधों को पोषण देना भी जरूरी होता है. ऐसे में किसान जैविक खाद, गोबर की सड़ी खाद, वर्मी कम्पोस्ट या संतुलित उर्वरकों का इस्तेमाल करें. साथ ही अधिक मात्रा में यूरिया डालने से बचें, क्योंकि ज्यादा गर्मी में यह पौधों को नुकसान पहुंचा सकती है. सूक्ष्म पोषक तत्वों का छिड़काव भी फायदेमंद रहता है. इसके अलावा नाजुक पौधों पर शेड नेट का इस्तेमाल भी किया जा सकता है. इससे पौधों पर सीधी धूप का असर कम होता है.
गर्मी में कीट और रोगों का खतरा भी बढ़ जाता है, इसलिए किसान नियमित रूप से फसल की निगरानी करें. पत्तियों के मुड़ने, पीला पड़ने या कीट दिखने पर तुरंत कृषि विशेषज्ञ की सलाह लें. वहीं, जरूरत पड़ने पर जैविक या अनुशंसित दवाओं का ही प्रयोग करें. अगर किसान मौसम को ध्यान में रखकर सिंचाई, पोषण और सुरक्षा के उपाय अपनाते हैं, तो भीषण गर्मी में भी जायद फसलों से अच्छा उत्पादन ले सकते हैं. सही देखभाल से न केवल उपज बढ़ेगी, बल्कि किसानों की आमदनी भी बेहतर होगी.