मूंगफली की खेती से पाएं अधिक मुनाफा, जून-जुलाई में बुवाई के साथ अपनाएं ये जरूरी टिप्स

मूंगफली की खेती से पाएं अधिक मुनाफा, जून-जुलाई में बुवाई के साथ अपनाएं ये जरूरी टिप्स

जून-जुलाई के खरीफ सीजन में मूंगफली की खेती से अधिक उत्पादन पाने के लिए जानें सही बुवाई समय, बीज उपचार, खाद प्रबंधन, सिंचाई और कीट नियंत्रण के आसान और असरदार उपाय.

यूपी एग्रीज योजना के तहत झांसी को मूंगफली के क्लस्टर के रूप में विकसित कर रही योगी सरकारयूपी एग्रीज योजना के तहत झांसी को मूंगफली के क्लस्टर के रूप में विकसित कर रही योगी सरकार
क‍िसान तक
  • New Delhi,
  • Jun 12, 2026,
  • Updated Jun 12, 2026, 12:38 PM IST

मूंगफली की खेती का सीजन चल रहा है जो जून से जुलाई तक चलेगी. यह खेती खरीफ यानी बरसात के दिनों में की जाती है. इसमें मध्य जून से लेकर जुलाई के पहले या दूसरे हफ्ते तक इसकी बुवाई की जाती है. कुछ किसान इसके बाद भी करते हैं, लेकिन उससे पैदावार कम मिलने की आशंका रहती है. अधिक उत्पादन लेने के लिए किसानों को सलाह दी जाती है कि वे जुलाई के दूसरे हफ्ते तक मूंगफली की खेती जरूर कर दें. इसके अलावा, कुछ और जरूरी बातें हैं जिनका ध्यान रखकर किसान मूंगफली से अधिक उत्पादन हासिल कर सकते हैं.

मूंगफली की अधिक पैदावार के लिए आप नीचे बताई गई बातों का ध्यान रख सकते हैं-

मिट्टी और खेत की तैयारी 

मूंगफली के लिए अच्छी जल निकासी वाली, हल्की रेतीली दोमट या रेतीली चिकनी दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है, जिसका pH 5.5 से 7.0 के बीच हो. खेत की तैयारी के लिए गर्मियों में गहरी जुताई करें ताकि खरपतवारों के बीज और कीटों को नष्ट किया जा सके.

बीज की क्वालिटी और उपचार 

अच्छी क्वालिटी वाले प्रमाणित बीजों का उपयोग करें. बुवाई से पहले बीजों को कार्बोक्सिन 37.5% + थायरम 37.5% DS @ 2-3 ग्राम/किग्रा बीज से उपचारित करें. दीमक और सफेद लट से बचाव के लिए इमिडाक्लोप्रिड 600 FS @ 6.5 मिली/किग्रा बीज का उपयोग करें. इसके बाद, राइजोबियम और PSB कल्चर से भी उपचारित करें.

बुवाई के तरीके और बीज दर 

अधिक उपज के लिए क्रिस्स-क्रॉस बुवाई, ब्रॉड-बेड और फरो विधि (BBF) या रिज और फरो विधि का उपयोग करें. गुच्छेदार किस्मों के लिए 30 सेमी X 10 सेमी की दूरी और 100-110 किग्रा/हेक्टेयर बीज दर की सिफारिश की जाती है. अर्ध-फैलने वाली और फैलने वाली किस्मों के लिए 40-45 सेमी X 10 सेमी या 30 सेमी X 15 सेमी की दूरी और 100-210 किग्रा/हेक्टेयर बीज दर (100-दाने के वजन के आधार पर) की सिफारिश की जाती है.

खाद और उर्वरक 

अच्छी उपज के लिए बुवाई से 3-4 सप्ताह पहले 10 टन/हेक्टेयर अच्छी सड़ी हुई गोबर की खाद डालें. मिट्टी की उर्वरता के आधार पर नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटेशियम की अनुशंसित खुराक का उपयोग करें. कैल्शियम और सल्फर की कमी को दूर करने के लिए बुवाई के समय 500 किग्रा/हेक्टेयर जिप्सम का प्रयोग करें.

खरपतवार प्रबंधन 

बुवाई के बाद पहले 35 दिनों तक खरपतवारों से फसल को बचाना महत्वपूर्ण है. 20-25 दिनों और 35-40 दिनों के बाद दो बार हाथ से निराई करें. रासायनिक खरपतवार नियंत्रण के लिए बुवाई के 2 दिनों के भीतर डिक्लोसुलम 84% WDG @ 20-25 ग्राम/हेक्टेयर या पेंडिमेथालिन+इमाज़ेथापायर 32 EC @ 1.0 किग्रा सक्रिय तत्व/हेक्टेयर का प्रयोग करें. बाद के चरणों में खरपतवारों को नियंत्रित करने के लिए क्विज़ालोफॉप एथिल @ 0.50 किग्रा सक्रिय तत्व/हेक्टेयर या इमाज़ेथापायर @ 0.50 किग्रा सक्रिय तत्व/हेक्टेयर का प्रयोग करें.

जल प्रबंधन 

फूल आने (20-40 DAS), फली बनने और विकसित होने (40-70 DAS), फली भरने और पकने (70-100 DAS) के चरण मिट्टी की नमी के प्रति सबसे संवेदनशील होते हैं. इसलिए इन सभी चरणों में मिट्टी की नमी का पूरा ध्यान रखना चाहिए और सिंचाई की अच्छी व्यवस्था करनी चाहिए. ड्रिप सिंचाई से 25-40% तक उपज बढ़ सकती है और 40-50% पानी की बचत होती है.

कीट और रोग प्रबंधन 

सफेद लट, तंबाकू इल्ली, ग्राम पॉड बोरर, रेड हेयरी कैटरपिलर, लीफमाइनर, एफिड, जैसिड और थ्रिप्स जैसे प्रमुख कीटों के लिए उचित प्रबंधन उपाय अपनाएं. एस्परगिलस सीडलिंग ब्लाइट, कॉलर रोट, लीफ स्पॉट, रस्ट और स्टेम रोट जैसे प्रमुख रोगों के लिए प्रतिरोधी किस्मों का उपयोग करें और बीज उपचार और फफूंदनाशकों का प्रयोग करें.

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