मध्य प्रदेश में मूंग की खेती बनी किसानों की आय का सहारा, कीट-रोग नियंत्रण के लिए एडवाइजरी जारी

मध्य प्रदेश में मूंग की खेती बनी किसानों की आय का सहारा, कीट-रोग नियंत्रण के लिए एडवाइजरी जारी

मध्य प्रदेश में ग्रीष्मकालीन मूंग की फसल किसानों के लिए आय का महत्वपूर्ण स्रोत बनती जा रही है. बेहतर उत्पादन के साथ यह मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ाती है. हालांकि, कीट और रोगों के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए दलहन विकास निदेशालय ने किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की है, जिसमें फसल की सुरक्षा और बेहतर उत्पादन के लिए जरूरी उपाय बताए गए हैं.

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मध्य प्रदेश में मूंग की खेती बनी किसानों की आय का सहारा, कीट-रोग नियंत्रण के लिए एडवाइजरी जारीमूंग और उड़द की फसल में कीट का खतरा. (सांकेतिक तस्वीर)

मध्य प्रदेश में ग्रीष्मकालीन मूंग की फसल किसानों के लिए आय का एक मजबूत स्रोत बनकर उभर रही है. प्रदेश के बड़े क्षेत्र में इसकी खेती की जाती है, जिससे किसानों को अच्छा उत्पादन मिलने के साथ उनकी आय में भी लगातार वृद्धि हो रही है. मूंग न केवल पोषण के लिहाज से महत्वपूर्ण दलहनी फसल है, बल्कि यह मिट्टी की उर्वरता सुधारने में भी सहायक मानी जाती है.

हालांकि, मूंग की फसल में कई प्रकार के कीट और रोगों का प्रकोप देखने को मिलता है, जो समय पर नियंत्रण न होने पर उत्पादन को काफी नुकसान पहुंचा सकते हैं. इसे ध्यान में रखते हुए दलहन विकास निदेशालय ने किसानों के लिए विस्तृत एडवाइजरी जारी की है, जिसमें प्रमुख कीट-रोगों की पहचान और उनके नियंत्रण के उपाय बताए गए हैं.

चने की इल्ली का प्रकोप

यह एक बहुभक्षी कीट है, जो फसल की शुरुआती अवस्था में ही पत्तियों को नुकसान पहुंचाना शुरू कर देता है. इसकी सुंडी फलियों में गोल छेद कर अंदर दाने को खाती है, जबकि शरीर का कुछ हिस्सा बाहर दिखाई देता है. इससे सीधे उत्पादन पर असर पड़ता है.

तंबाकू इल्ली से फसल को खतरा

तंबाकू इल्ली भी बहुभक्षी कीट है, जिसकी सुंडी पत्तियों के क्लोरोफिल को खाकर पौधे की वृद्धि रोक देती है. यह तेजी से पूरे खेत में फैलकर भारी नुकसान पहुंचा सकती है.

फली भेदक कीट का प्रभाव और नियंत्रण

फली भेदक कीट कई फसलों को प्रभावित करता है, लेकिन मूंग में इसका प्रकोप अधिक देखा जाता है.

नियंत्रण के उपाय

  • 2–3 वर्ष के अंतराल में गर्मी के मौसम में गहरी जुताई करें
  • समय पर बुवाई और कम अवधि वाली किस्मों का चयन करें
  • 5% फेरोमोन ट्रैप का उपयोग करें
  • वयस्क पतंगों को आकर्षित करने के लिए प्रकाश ट्रैप लगाएं

जैविक नियंत्रण

  • एन.पी.वी 250 मि.ली/हेक्टेयर
  • 0.017% टी फॉस + 0.5% गुड़ मिलाकर दो बार छिड़काव

रासायनिक नियंत्रण

प्रोफेनोफॉस 50% EC @ 1250 मि.ली/हेक्टेयर छिड़काव

सफेद मक्खी का नियंत्रण

सफेद मक्खी फसल का रस चूसकर पौधों को कमजोर कर देती है और वायरस रोग फैलाने का भी काम करती है.

नियंत्रण के उपाय

बीज उपचार: थायमेथॉक्झाम 70 WS @ 3 ग्राम/किग्रा बीज

खेत और मेड़ों को खरपतवार मुक्त रखें

थायमेथॉक्झाम 25 WG @ 100 ग्राम/हेक्टेयर छिड़काव

पीला मोजेक वायरस रोग से बचाव

यह मूंग की सबसे खतरनाक बीमारियों में से एक है, जो पत्तियों को पीला कर देती है और उत्पादन घटा देती है.

नियंत्रण के उपाय

  • रोगरोधी किस्मों का चयन करें
  • संक्रमित पौधों को तुरंत उखाड़कर नष्ट करें
  • बीज उपचार: थायमेथॉक्झाम 70 WS @ 3 ग्राम/किग्रा
  • डायमेथोएट 30 EC @ 750 मि.ली/हेक्टेयर छिड़काव

पाउडरी मिल्ड्यू रोग का प्रबंधन

इस रोग में पत्तियों और अन्य भागों पर सफेद पाउडर जैसा दिखाई देता है. अधिक संक्रमण होने पर पत्तियां पीली होकर गिर जाती हैं और फसल समय से पहले पक जाती है, जिससे उपज घटती है.

नियंत्रण के उपाय

  • कार्बेन्डाजिम @ 1 ग्राम/लीटर पानी
  • या केराथोन @ 1 मि.ली/लीटर पानी में घोलकर छिड़काव
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