चीन ने बढ़ाई सख्ती, APEDA ने जारी किए नए नियम, अब हर खेप की होगी GMO जांच

चीन ने बढ़ाई सख्ती, APEDA ने जारी किए नए नियम, अब हर खेप की होगी GMO जांच

चीन को चावल निर्यात करने वाले व्यापारियों के लिए APEDA ने नई SOP जारी की है. अब हर चावल खेप की GMO जांच अनिवार्य होगी और निर्धारित नियमों का पालन करना होगा. यह कदम चीन द्वारा कुछ भारतीय कंसाइनमेंट्स पर उठाई गई आपत्तियों के बाद लिया गया है. जानिए नए नियमों का किसानों और निर्यातकों पर क्या असर पड़ेगा.

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क‍िसान तक
  • Noida,
  • Jun 14, 2026,
  • Updated Jun 14, 2026, 9:35 AM IST

भारत से चीन को चावल निर्यात करने वाले व्यापारियों के लिए एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है. कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) ने चीन को चावल निर्यात करने के लिए नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) जारी की है. यह नया नियम 9 जून 2026 से लागू कर दिया गया है और अब चीन भेजे जाने वाले हर चावल के खेप (कंसाइनमेंट) पर इसका पालन करना जरूरी होगा.

दरअसल, हाल के महीनों में चीन ने भारत से भेजे गए कुछ गैर-बासमती चावल के कंसाइनमेंट को यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया था कि उनमें GMO (जेनेटिकली मॉडिफाइड ऑर्गेनिज्म) की मिलावट हो सकती है. इसी विवाद के बाद APEDA ने नई प्रक्रिया लागू की है ताकि भविष्य में भारतीय चावल निर्यात को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े.

क्यों जरूरी पड़ा नया नियम?

भारत दुनिया के सबसे बड़े चावल निर्यातकों में शामिल है और चीन भारतीय टूटे हुए चावल (ब्रोकन राइस) का एक बड़ा खरीदार है. वहीं दूसरी ओर अफ्रीका के कई देशों में चावल आयात पर प्रतिबंध और सीमाएं बढ़ने लगी हैं, जिससे भारतीय निर्यातकों को नए बाजारों की जरूरत महसूस हो रही है.

ऐसे में चीन भारतीय चावल उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार बन गया है. APEDA का मानना है कि यदि चीन की गुणवत्ता संबंधी चिंताओं को दूर किया जाए तो भारतीय चावल निर्यात को बड़ा लाभ मिल सकता है.

निर्यातकों को क्या करना होगा?

नई SOP के अनुसार अब चीन को चावल केवल उन्हीं राइस मिलों और प्रोसेसिंग यूनिट्स से भेजा जा सकेगा जो पौधा संरक्षण, संगरोध एवं भंडारण निदेशालय (DPPQS) में पंजीकृत हैं. इसके अलावा निर्यातकों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि वे चीन की कस्टम एजेंसी GACC के नियमों का पालन करें.

चावल निर्यात से पहले फाइटोसैनिटरी सर्टिफिकेट प्राप्त करना भी अनिवार्य रहेगा. इसके साथ ही हर खेप की GMO जांच APEDA द्वारा मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में करानी होगी. जांच रिपोर्ट सही पाए जाने के बाद ही निर्यातक APEDA से Registration-cum-Allocation Certificate (RCAC) प्राप्त कर सकेंगे.

चीन को भरोसा दिलाने की कोशिश

APEDA और भारत सरकार ने चीन को स्पष्ट रूप से बताया है कि भारत में GMO चावल की खेती की अनुमति नहीं है. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और जेनेटिक इंजीनियरिंग अप्रूवल कमेटी (GEAC) ने भी पुष्टि की है कि देश में न तो GMO चावल के बीज उपलब्ध हैं और न ही इसकी व्यावसायिक खेती की जाती है.

इसके बावजूद चीन अपने रुख पर कायम रहा. इसी कारण APEDA ने सभी निर्यातकों के लिए एक समान परीक्षण प्रक्रिया लागू करने का फैसला किया ताकि किसी भी प्रकार का संदेह न रहे.

निर्यातकों ने मांगी राहत

राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बी. वी. कृष्णा राव ने नई SOP का स्वागत किया है. उनका कहना है कि चीन भारतीय चावल उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार है. हालांकि उन्होंने सुझाव दिया है कि पहले से तय किए गए निर्यात अनुबंधों और चल रही शिपमेंट्स को 31 जुलाई तक पुराने नियमों के तहत जारी रखने की अनुमति दी जानी चाहिए. उनका मानना है कि नई व्यवस्था को पूरी तरह लागू करने के लिए व्यापारियों को कुछ अतिरिक्त समय मिलना चाहिए.

लगातार बढ़ रहा है चीन को चावल निर्यात

पिछले कुछ वर्षों में चीन को भारतीय गैर-बासमती चावल का निर्यात तेजी से बढ़ा है. वर्ष 2025-26 में भारत ने चीन को लगभग 3.15 लाख टन गैर-बासमती चावल निर्यात किया, जिसकी कीमत 103.90 मिलियन डॉलर रही. वहीं 2024-25 में यह आंकड़ा 1.80 लाख टन था.

वर्ष 2020 के बाद चीन द्वारा कुछ व्यापारिक प्रतिबंध हटाने के बाद भारतीय चावल की मांग में तेजी आई है. यही वजह है कि सरकार और APEDA इस बाजार को सुरक्षित रखने के लिए विशेष प्रयास कर रहे हैं.

किसानों और निर्यातकों के लिए क्या मायने हैं?

नई SOP से शुरुआत में निर्यातकों को कुछ अतिरिक्त प्रक्रियाओं का पालन करना पड़ेगा, लेकिन इससे चीन में भारतीय चावल की विश्वसनीयता बढ़ेगी. यदि चीन का बाजार मजबूत बना रहता है तो इसका सीधा फायदा किसानों, राइस मिलों और निर्यात कारोबार से जुड़े लाखों लोगों को मिलेगा. सरकार का लक्ष्य फिलीपींस, इंडोनेशिया और चीन जैसे बड़े बाजारों में भारतीय चावल की हिस्सेदारी बढ़ाना है, जिससे भविष्य में निर्यात और किसानों की आय दोनों में वृद्धि हो सके.

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