सिंजेंटा ऑस्‍ट्रेलिया में खरपतवारनाशी पैराक्वाट की बिक्री करेगी बंद, एग्रोकेमिकल कंपनी का नए नियमों के बाद फैसला

सिंजेंटा ऑस्‍ट्रेलिया में खरपतवारनाशी पैराक्वाट की बिक्री करेगी बंद, एग्रोकेमिकल कंपनी का नए नियमों के बाद फैसला

ऑस्‍ट्रेलिया में एग्रोकेमिकल कंपनी सिंजेंटा ने नए नियामकीय प्रतिबंधों और बढ़ती लागत का हवाला देते हुए पैराक्वाट खरपतवारनाशी की बिक्री बंद करने का फैसला किया है. हालांकि, जेनेरिक पैराक्वाट उत्पाद किसानों के लिए बाजार में उपलब्ध रहेंगे. यह रसायन 70 से अधिक देशों में पहले से प्रतिबंधित है.

Syngenta to stop Paraquat based herbicide sale in australiaSyngenta to stop Paraquat based herbicide sale in australia
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Jul 25, 2026,
  • Updated Jul 25, 2026, 6:06 PM IST

एग्रोकेमिकल कंपनी सिंजेंटा ने ऑस्‍ट्रेलिया में अपने पैराक्वाट आधारित खरपतवारनाशी (हर्बिसाइड) की बिक्री बंद करने का फैसला किया है. कंपनी का कहना है कि ऑस्‍ट्रेलियाई नियामक की ओर से लागू किए गए नए नियमों और बढ़ती सप्‍लाई लागत के कारण यह कारोबार अब व्यावसायिक रूप से लाभकारी नहीं रह गया है. हालांकि, बाजार में अन्य कंपनियों के जेनेरिक पैराक्वाट उत्पाद किसानों के लिए उपलब्ध रहेंगे. पैराक्वाट का उत्पादन स्विट्जरलैंड की कंपनी सिंजेंटा कई दशकों से करती रही है. इस केमिकल को लंबे समय से पार्किंसन रोग के बढ़ते खतरे से जोड़कर देखा जाता रहा है. इसी वजह से यह यूरोपीय संघ सहित 70 से अधिक देशों में बैन है. यूरोपीय संघ ने वर्ष 2007 में ही इसके इस्‍तेमाल पर रोक लगा दी थी.

ऑस्‍ट्रेलिया में खेती में अब भी होता है इस्तेमाल

द‍ि गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार, ऑस्‍ट्रेलिया में पैराक्वाट का घरेलू इस्‍तेमाल पहले से प्रतिबंधित है, लेकिन कृषि क्षेत्र में इसका इस्तेमाल अब तक व्यापक स्तर पर होता रहा है. खासतौर पर अनाज, गन्ना और कपास जैसी फसलों की बड़े पैमाने पर होने वाली खेती में किसान इसका इस्‍तेमाल करते हैं. ऑस्‍ट्रेलियन पेस्टीसाइड्स एंड वेटरिनरी मेडिसिन्स अथॉरिटी (एपीवीएमए) ने अपनी समीक्षा में कहा कि मंजूर तरीके से इस्‍तेमाल किए जाने पर उपलब्ध वैज्ञानिक साक्ष्य पैराक्वाट और पार्किंसन रोग के बीच सीधे संबंध स्थापित नहीं करते हैं.

एपीवीएमए ने पैराक्वाट के इस्‍तेमाल से होने वाले तीव्र विषाक्त प्रभाव और पशुओं के लिए संभावित जोखिम को देखते हुए कई नए प्रतिबंध लागू किए हैं. नए नियमों के तहत बैकपैक स्प्रेयर के इस्तेमाल को चरणबद्ध तरीके से समाप्त किया जाएगा. इसके अलावा उपयोगकर्ताओं के लिए अतिरिक्त व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) पहनना अनिवार्य किया गया है और प्रति हेक्टेयर अधिकतम छिड़काव की सीमा भी काफी कम कर दी गई है.

सिंजेंटा ने बताई कारोबार बंद करने की वजह

सिंजेंटा एएनजेड के प्रबंध निदेशक डेविड वैन राइसवाइक ने कहा कि कंपनी एपीवीएमए की तय समयसीमा के अनुसार अपने पैराक्वाट उत्पादों की बिक्री और इस्‍तेमाल को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करेगी. उन्होंने कहा कि कड़े नियामकीय प्रतिबंध, जटिल होती आपूर्ति श्रृंखला और लगातार बढ़ती लागत के कारण पैराक्वाट उत्पाद अब व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य नहीं रह गए हैं.

पहले जारी रखने की थी योजना

एपीवीएमए के नए नियम घोषित होने के समय सिंजेंटा ने कहा था कि पैराक्वाट से अस्वीकार्य पर्यावरणीय प्रभाव नहीं पड़ता है, हालांकि, नए नियमों से कई फसलों में इसका उपयोग सीमित हो जाएगा. उस समय कंपनी तीसरे पक्ष के निर्माता के जरिए आपूर्ति जारी रखने की योजना बना रही थी, लेकिन बाद में व्यावसायिक परिस्थितियों को देखते हुए उसने बिक्री बंद करने का फैसला कर लिया.

पार्किंसन रोग को लेकर बहस जारी

‘द‍ गार्जियन’ के मुताबि‍क, मेलबर्न के न्यूरोलॉजिस्ट एसोसिएट प्रोफेसर वेस थेवाथासन ने हाल ही में कहा था कि वैश्विक स्तर पर इस विषय पर काम करने वाले विशेषज्ञों के बीच यह व्यापक सहमति बन चुकी है कि पैराक्वाट के संपर्क में आने से पार्किंसन रोग का खतरा बढ़ सकता है. उनके अनुसार, कई महामारी विज्ञान आधारित अध्ययनों और वास्तविक परिस्थितियों के शोध में यह संकेत मिला है कि पैराक्वाट के संपर्क से पार्किंसन होने का जोखिम लगभग तीन गुना तक बढ़ सकता है.

किसानों के सामने विकल्प घटने की चिंता

वहीं, ग्रेन प्रोड्यूसर्स ऑस्‍ट्रेलिया के प्रवक्ता एंड्रयू वीडेमैन ने कहा कि सिंजेंटा के इस फैसले से किसानों के सामने कई सवाल खड़े हो गए हैं. उन्‍होंने कहा कि ऑस्‍ट्रेलिया एग्रोकेमिकल के लिए अपेक्षाकृत छोटा बाजार है और अगर कंपनियां यहां अपने उत्पाद बनाए रखने में पर्याप्त व्यावसायिक संभावना नहीं देखेंगी तो किसानों के पास खरपतवार नियंत्रण के विकल्प कम हो सकते हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे समय में यह चिंता और बढ़ जाती है, जब खरपतवारों में बढ़ते प्रतिरोध से निपटने के लिए नए और प्रभावी उत्पादों की जरूरत है.

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