2 एकड़ से शुरू हुआ सफर, अब 400 एकड़ में सब्जियों की खेती; खंडवा के किसान का टमाटर-खीरा दुबई तक एक्सपोर्ट

2 एकड़ से शुरू हुआ सफर, अब 400 एकड़ में सब्जियों की खेती; खंडवा के किसान का टमाटर-खीरा दुबई तक एक्सपोर्ट

मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के जावर गांव के किसान अश्विन बादल सिंह सावले ने 2 एकड़ से सब्जी की खेती शुरू कर आज 160 किसानों के एफपीओ के साथ 400 एकड़ में उत्पादन का मॉडल तैयार किया है. यहां उगने वाला टमाटर और खीरा दुबई तक निर्यात हो रहा है, जबकि किसानों को प्रति एकड़ 4 से 5 लाख रुपये तक की आय मिल रही है.

धर्मेंद्र सिंह
  • Khandwa ,
  • Jul 09, 2026,
  • Updated Jul 09, 2026, 11:22 AM IST

मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के जावर गांव के किसान अश्विन बादल सिंह सावले ने यह साबित कर दिया कि यदि खेती वैज्ञानिक तरीके से की जाए और किसानों को एक मंच पर जोड़ा जाए, तो स्थानीय उत्पादन भी अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच सकता है. महज 2 एकड़ में खीरा और टमाटर की खेती से शुरुआत करने वाले अश्विन आज 160 किसानों के साथ मिलकर 400 एकड़ में आधुनिक तरीके से सब्जियों का उत्पादन कर रहे हैं. उनके खेतों में तैयार होने वाला टमाटर और खीरा दुबई तक निर्यात हो रहा है.

2 एकड़ से शुरू हुई खेती, अब 400 एकड़ तक पहुंचा दायरा

अश्विन बादल सिंह सावले ने करीब चार वर्ष पहले अपने दो एकड़ खेत में खीरा और टमाटर की खेती शुरू की. पहली ही फसल में अच्छा मुनाफा मिलने के बाद उन्होंने खेती का रकबा बढ़ाया. इसके साथ ही गांव के अन्य किसानों को भी आधुनिक सब्जी उत्पादन से जोड़ा और एक कृषक उत्पादक संगठन (एफपीओ) का गठन किया.

आज इस एफपीओ में 160 किसान जुड़े हुए हैं, जो सामूहिक रूप से 400 एकड़ क्षेत्र में सब्जियों की खेती कर रहे हैं.

देश के बड़े शहरों से लेकर दुबई तक पहुंच रही सब्जियां

एफपीओ के माध्यम से उत्पादित टमाटर, खीरा, करेला, लौकी और नींबू देश की प्रमुख मंडियों में भेजे जा रहे हैं. इनकी सब्जियां मुंबई, नई दिल्ली, लखनऊ, लुधियाना, नोएडा और पठानकोट जैसे बड़े बाजारों तक पहुंच रही हैं.

अश्विन बताते हैं कि उनके खेत का टमाटर मुंबई के व्यापारियों के माध्यम से दुबई तक निर्यात किया जाता है, जिससे किसानों को बेहतर कीमत मिलती है.

विदेश भेजने के लिए गुणवत्ता पर विशेष ध्यान

अश्विन के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में वही सब्जियां स्वीकार की जाती हैं, जिनकी गुणवत्ता उच्च स्तर की हो. इसलिए वे बीज चयन से लेकर उत्पादन, ग्रेडिंग, पैकिंग और परिवहन तक हर चरण में गुणवत्ता नियंत्रण का विशेष ध्यान रखते हैं.इसी वजह से उनके उत्पाद बड़े बाजारों में बेहतर दाम पर बिकते हैं और निर्यात के लिए भी चयनित होते हैं.

प्रति एकड़ 4 से 5 लाख रुपये तक की आय

एफपीओ मॉडल का सबसे बड़ा फायदा किसानों की आय में वृद्धि के रूप में सामने आया है.अश्विन के अनुसार संगठन से जुड़े किसानों को प्रति एकड़ 4 से 5 लाख रुपये तक की आय प्राप्त हो रही है.सामूहिक उत्पादन, बेहतर विपणन और गुणवत्ता आधारित खेती ने किसानों की आमदनी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है.

आईटीसी कंपनी से भी चल रही बातचीत

अश्विन ने बताया कि उनकी आईटीसी कंपनी से भी बातचीत चल रही है. यदि समझौता होता है तो मिर्च, टमाटर, नींबू और आम जैसे उत्पाद सीधे कंपनी को उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे किसानों को स्थायी बाजार मिलने की संभावना बढ़ेगी.

सोलर ड्रायर से बढ़ा मुनाफा

अश्विन ने अपने फार्म पर 6 सोलर ड्रायर लगाए हैं.इनके माध्यम से टमाटर, करेला, मिर्च, नींबू और आम को सुखाकर मूल्य संवर्धित उत्पाद तैयार किए जाते हैं.

जब बाजार में टमाटर की कीमत कम होती है, तब उसे सोलर ड्रायर में सुखाकर बेचा जाता है.इससे फसल खराब होने से बचती है और किसानों को अधिक लाभ मिलता है. यही सूखे उत्पाद निर्यात के लिए भी भेजे जाते हैं.

किसानों के लिए बना प्रेरणा का मॉडल

खंडवा के जावर गांव का यह मॉडल बताता है कि यदि किसान आधुनिक तकनीक, एफपीओ मॉडल, गुणवत्ता नियंत्रण और मूल्य संवर्धन को अपनाएं, तो छोटी शुरुआत भी बड़े व्यवसाय में बदल सकती है. आज अश्विन बादल सिंह सावले का यह प्रयास न केवल स्थानीय किसानों की आय बढ़ा रहा है, बल्कि मध्य प्रदेश की सब्जियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक भी पहचान दिला रहा है.

 

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