
खेती में अच्छी पैदावार के लिए केवल उन्नत बीज, सिंचाई और खाद ही पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि मिट्टी की जांच (Soil Testing) भी उतनी ही जरूरी है. लेकिन कई बार किसान मिट्टी का नमूना लेते समय ऐसी छोटी-छोटी गलतियां कर बैठते हैं, जिससे जांच रिपोर्ट सही नहीं आती. इसका सीधा असर खेत में डाली जाने वाली खाद की मात्रा और फसल की पैदावार पर पड़ता है. इसी को देखते हुए बिहार कृषि विभाग ने किसानों के लिए मिट्टी का नमूना लेते समय बरती जाने वाली 7 जरूरी सावधानियां साझा की हैं. विभाग का कहना है कि यदि नमूना सही तरीके से लिया जाए, तभी मिट्टी की वास्तविक उर्वरता का पता चलता है और उसी के आधार पर खाद और उर्वरकों का सही उपयोग किया जा सकता है.
1. गीली मिट्टी से नमूना न लें: मिट्टी का नमूना हमेशा सामान्य या सूखी अवस्था में लेना चाहिए. गीली मिट्टी से लिया गया नमूना सही परिणाम नहीं देता और जांच रिपोर्ट प्रभावित हो सकती है.
2. जहां खाद या उर्वरक डाला हो, वहां से नमूना न लें: जिस स्थान पर हाल ही में गोबर की खाद, रासायनिक उर्वरक या अन्य पोषक तत्व डाले गए हों, वहां से नमूना लेने से बचें. इससे मिट्टी की वास्तविक पोषक स्थिति का सही आकलन नहीं हो पाता.
3. पेड़ों के नीचे की मिट्टी से बचें: पेड़ों के नीचे की मिट्टी में पोषक तत्वों का संतुलन सामान्य खेत से अलग हो सकता है, इसलिए वहां से नमूना लेने पर पूरी जमीन की सही स्थिति का पता नहीं चलता.
4. सिंचाई की नाली के पास से न लें नमूना: सिंचाई की नालियों के आसपास की मिट्टी में नमी और पोषक तत्वों का स्तर अलग हो सकता है, इसलिए खेत के बीच के हिस्से से नमूना लेना अधिक उपयुक्त माना जाता है.
5. खड़ी फसल वाले खेत से नमूना न लें: यदि खेत में फसल खड़ी है तो उस समय मिट्टी का नमूना लेने से बचना चाहिए. फसल की कटाई के बाद या बुवाई से पहले नमूना लेना बेहतर रहता है.
6. सही गहराई से लें नमूना: सामान्य फसलों के लिए मिट्टी का नमूना 6 इंच (करीब 15 सेंटीमीटर) की गहराई से लेना चाहिए. इससे जड़ों वाले क्षेत्र की मिट्टी की सही जानकारी मिलती है.
7. बागवानी फसलों के लिए रखें अलग गहराई: यदि बागवानी या फलदार पौधों के लिए मिट्टी की जांच करानी है, तो नमूना करीब 65 सेंटीमीटर की गहराई तक से लेना चाहिए. इससे गहरी जड़ों वाले पौधों के लिए मिट्टी की सही स्थिति का पता चलता है.
विशेषज्ञों का कहना है कि मिट्टी की जांच रिपोर्ट के आधार पर किसान जरूरत के अनुसार ही खाद और उर्वरकों का इस्तेमाल करते हैं. इससे उत्पादन लागत कम होती है, मिट्टी की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है और फसल की पैदावार में भी बढ़ोतरी होती है. इसलिए मिट्टी का नमूना लेते समय इन सावधानियों का पालन करना हर किसान के लिए बेहद जरूरी है. अगर किसान वैज्ञानिक तरीके से मिट्टी का नमूना लेकर उसकी जांच कराते हैं, तो वे न केवल उर्वरकों पर होने वाले अनावश्यक खर्च को कम कर सकते हैं, बल्कि बेहतर उत्पादन और अधिक मुनाफा भी हासिल कर सकते हैं.