छत्तीसगढ़ में 'पीली क्रांति' की शुरुआत, धमतरी का नगरी बनेगा हल्दी उत्पादन का नया हब

छत्तीसगढ़ में 'पीली क्रांति' की शुरुआत, धमतरी का नगरी बनेगा हल्दी उत्पादन का नया हब

छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के नगरी विकासखंड में 250 किसानों ने वैज्ञानिक तरीके से हल्दी की खेती शुरू की है। प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग और एफपीओ आधारित विपणन मॉडल के जरिए किसानों को बेहतर दाम दिलाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में यह अहम पहल मानी जा रही है।

धर्मेंद्र सिंह
  • Raipur ,
  • Jul 03, 2026,
  • Updated Jul 03, 2026, 8:20 AM IST

छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल धमतरी जिले का नगरी विकासखंड अब हल्दी उत्पादन के क्षेत्र में नई पहचान बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. कृषि विविधीकरण को बढ़ावा देने और वनांचल के किसानों की आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यहां वैज्ञानिक तरीके से हल्दी उत्पादन का महत्वाकांक्षी अभियान शुरू किया गया है. इस पहल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि किसानों को केवल खेती तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उत्पादन, प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग), ब्रांडिंग और विपणन की पूरी वैल्यू चेन से जोड़ा जाएगा, ताकि उन्हें अपनी उपज का अधिकतम मूल्य मिल सके.

250 किसानों ने शुरू की वैज्ञानिक हल्दी खेती

परियोजना के पहले चरण में नगरी और मगरलोड विकासखंड के 250 किसानों ने लगभग 10 टन उच्च गुणवत्ता वाले हल्दी बीज (राइजोम) की बुवाई की है. आगामी सीजन में 250 टन हल्दी उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़कर गुणवत्तापूर्ण उत्पादन सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है.

उत्पादन से बाजार तक बनेगी मजबूत वैल्यू चेन

यह परियोजना केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है.किसानों को उत्पादन–प्रसंस्करण–ब्रांडिंग–विपणन की संपूर्ण प्रक्रिया से जोड़ा जा रहा है. इससे बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी और किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा.

जिला प्रशासन, पंचायत और 'प्रदान' संस्था का संयुक्त प्रयास

कलेक्टर के मार्गदर्शन में जिला पंचायत धमतरी, जनपद पंचायत नगरी और 'प्रदान' संस्था के सहयोग से इस परियोजना को अमलीजामा पहनाया जा रहा है. किसानों को गट्टासिल्ली किसान उत्पादक कंपनी (एफपीसी) के माध्यम से उच्च गुणवत्ता वाले हल्दी बीज उपलब्ध कराए गए हैं.

कोर्रेमुडा में बनेगी आधुनिक हल्दी प्रोसेसिंग यूनिट

कच्ची हल्दी को सीधे बाजार में बेचने के बजाय उसका मूल्य संवर्धन किया जाएगा.इसके लिए ग्राम कोर्रेमुडा में आधुनिक हल्दी प्रसंस्करण इकाई स्थापित की जा रही है.यहां हरिभूमि किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) के माध्यम से हल्दी पाउडर सहित अन्य मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार किए जाएंगे.

इसके बाद आकर्षक पैकेजिंग और ब्रांडिंग के साथ इन उत्पादों को गट्टासिल्ली एफपीसी के जरिए बाजार में उतारा जाएगा, जिससे किसानों को बेहतर दाम मिलने के साथ स्थानीय उत्पादों को नई पहचान भी मिलेगी.

तकनीकी प्रशिक्षण से बढ़ेगी उत्पादन क्षमता

परियोजना की सफलता सुनिश्चित करने के लिए ग्राम पंचायत झुझरकस्सा के आश्रित ग्राम कोर्रेमुडा में एक दिवसीय तकनीकी प्रशिक्षण आयोजित किया गया. इसमें नगरी और मगरलोड विकासखंड के कृषि मित्रों एवं पीआरपी ने भाग लिया.

विशेषज्ञों ने किसानों को भूमि सुधार, रोगमुक्त राइजोम चयन, बीज उपचार, संतुलित पोषण प्रबंधन और वैज्ञानिक खेती की आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी.लगभग 270 दिनों की फसल अवधि के दौरान कृषि मित्र नियमित रूप से खेतों का निरीक्षण कर किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन देंगे.

ऊपरी और पथरीली भूमि बनेगी आय का नया स्रोत

नगरी विकासखंड का बड़ा हिस्सा ऊपरी और पथरीली भूमि वाला है, जहां पारंपरिक धान की खेती अपेक्षाकृत कम लाभदायक रहती है.कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यही भूमि हल्दी जैसी नकदी फसलों के लिए अत्यंत उपयुक्त है. इससे अनुपयोगी मानी जाने वाली भूमि का बेहतर उपयोग होगा और किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी.

ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार को मिलेगा नया आधार

हल्दी उत्पादन, प्रोसेसिंग और विपणन की यह समन्वित व्यवस्था स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगी.मूल्य संवर्धन के माध्यम से कृषि आधारित उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा और वनांचल की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी.

नगरी बनेगा हल्दी उत्पादन का नया हब

जिला प्रशासन की यह पहल आने वाले वर्षों में धमतरी के नगरी विकासखंड को छत्तीसगढ़ का प्रमुख हल्दी उत्पादन एवं मूल्य संवर्धन केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है. यदि यह मॉडल सफल रहा तो इसे राज्य के अन्य वनांचल क्षेत्रों में भी लागू किया जा सकेगा, जिससे किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभाई जा सकेगी. 

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