Mango Farming: बरसात के मौसम में आम की ऐसे करें देखभाल, क्वालिटी बिगाड़ सकती हैं ये बीमारियां और कीड़े

Mango Farming: बरसात के मौसम में आम की ऐसे करें देखभाल, क्वालिटी बिगाड़ सकती हैं ये बीमारियां और कीड़े

बरसात के मौसम में आंधी, बारिश और छाए बादलों के कारण आम के बागों में हानिकारक कीड़े और फंगस की बीमारियां बहुत तेजी से फैलती हैं. CISH लखनऊ के कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, इस समय फल मक्खी, सेमीलूपर कीट और एन्थ्रेकनोज, शोल्डर ब्राउनिंग व उकठा जैसी बीमारियां आम की रंगत, साइज और पैदावार को भारी नुकसान पहुंचाती हैं.

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क‍िसान तक
  • नई दिल्ली,
  • Jul 03, 2026,
  • Updated Jul 03, 2026, 6:20 PM IST

बरसात के मौसम में आम की बागवानी करने वाले किसानों को बेहद सावधान और चौकन्ना रहने की जरूरत है. उत्तर प्रदेश के लखनऊ स्थित केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान के कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, इस मौसम में मौसम के मिजाज में तेजी से बदलाव आता है. जैसे लगातार बादल छाए रहना, तेज आंधी और भारी बारिश होना. इन बदलावों के कारण आम के बागों में कई तरह के हानिकारक कीड़े और फंगस  से होने वाली बीमारियां बहुत तेजी से हमला करती हैं. अगर समय रहते इन कीटों और रोगों के नियंत्रण का पुख्ता इंतजाम न किया जाए तो फलों की रंगत, उनका आकार और कुल पैदावार पर बहुत बुरा असर पड़ता है. इसलिए वैज्ञानिकों की राय है कि किसान किसी स्थानीय दवा बेचने वाले की गैर-भरोसेमंद सलाह के चक्कर में न पड़ें, बल्कि केवल प्रमाणित और वैज्ञानिक तरीकों को ही अपनाएं, ताकि आर्थिक नुकसान से बचा जा सके.

आम को सड़ा देगा यह दुश्मन कीट!

इस मौसम में आम की फसल का सबसे बड़ा दुश्मन 'फल मक्खी' कीट है, जो आम के अंतरराष्ट्रीय निर्यात और उसकी क्वालिटी को पूरी तरह खराब कर देता है. इसकी मादा मक्खी पक रहे फलों के छिलके के अंदर छेद करके अपने अंडों का गुच्छा दे देती है, जिनसे निकलने वाली छोटी सूंडियां अंदर ही अंदर फल के गूदे को खाकर उसे पूरी तरह सड़ा देती हैं. ऐसे फल बाहर से बिल्कुल ठीक दिखाई देते हैं, लेकिन अंदर से गलकर समय से पहले ही डाल से टूटकर गिर जाते हैं.

इसके साथ ही, सेमीलूपर और फल बेधक सूंडियां भी फलों की त्वचा को खुरचकर और जाला बनाकर भारी तबाही मचाती हैं. इनसे छुटकारा पाने के लिए बागों में प्रति हेक्टेयर 10 'मिथाइल यूजेनॉल सेक्स फेरोमोन ट्रैप' लगाएं और मक्खियों का हमला ज्यादा होने पर 1 लीटर पानी में 100 ग्राम गुड़ और 2 मिलीलीटर डेल्टामेथ्रिन 2.8 ई.सी. का घोल बनाकर पेड़ के तने पर छिड़कें, जबकि सेमीलूपर के लिए लैमडा-सायहालोथ्रिन 5 ई.सी. 1 मिलीलीटर प्रति लीटर) का छिड़काव करें.

यह रोग बिगाड़ देती है फलों की रंगत

बरसात के दिनों में हवा में नमी बढ़ने और बादलों के कारण फंगस से पैदा होने वाले दो बड़े रोग- 'एन्थ्रेकनोज' और 'शोल्डर ब्राउनिंग' बेहद आक्रामक हो जाते हैं जो फलों को बदरंग कर देते हैं. एन्थ्रेकनोज के हमले की वजह से आम पर गहरे भूरे या काले रंग के गोल दाग उभर आते हैं, जो धीरे-धीरे पूरे फल को सड़ा देते हैं. दूसरी तरफ, शोल्डर ब्राउनिंग रोग के कारण फलों के ऊपरी हिस्से पर मटमैले या काले रंग के फंगस की परत जम जाती है, जो चौसा और मल्लिका जैसी देर से पकने वाली किस्मों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाती है.

इस फंगस की आफत से फलों को सुरक्षित रखने के लिए मॉनसून आने से पहले ही फलों की बैगिंग करना सबसे बढ़िया तरीका है. इसके अलावा फलों की तुड़ाई से लगभग 21 दिन पहले प्रोपीकोनाजोल 13.9% + डाईफेनोकोनाजोल 13.9% ई.सी. दवा का 1 से 2 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें और तोड़ने के बाद संक्रमण से बचाने के लिए कच्चे फलों को 10 मिनट तक गर्म पानी में रखकर 'हॉट वॉटर ट्रीटमेंट' जरूर दें.

पेड़ को अंदर ही अंदर खोखला करता है यह कीट 

फलों के अलावा आम के पूरे पेड़ को सुखाकर मार देने वाले दो प्रमुख संकट 'तना भेदक कीट' और 'उकठा रोग ' हैं, जिनसे पौधों की रक्षा करना बेहद जरूरी है. तना भेदक की सूंडी पेड़ के मुख्य तने या उसकी मोटी शाखाओं के भीतर छेद करके अंदरूनी हिस्सों को खाती रहती है, जिससे शाखाएं और पूरा पेड़ धीरे-धीरे सूखकर मर जाता है.

इसके उपचार के लिए प्रभावित छेदों में से लोहे के तार या हुक की मदद से कीड़े को बाहर निकालें, फिर लैमडा-सायहालोथ्रिन 2 मिलीलीटर प्रति लीटर के घोल में भीगे हुए रूई के फाहे को छेद के अंदर डालकर उसे गीली मिट्टी से अच्छी तरह बंद कर दें ताकि अंदर गैस से कीड़ा खत्म हो जाए. इस तरह सटीक निवारण कर  मेहनत से उगाई गई आम की फसल को पूरी तरह सुरक्षित रख सकते है.

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