कपास किसानों के लिए अलर्ट: गुलाबी सुंडी और सफेद मक्खी पर रखें नजर, जानें कब और कैसे करें बचाव

कपास किसानों के लिए अलर्ट: गुलाबी सुंडी और सफेद मक्खी पर रखें नजर, जानें कब और कैसे करें बचाव

कपास की फसल में गुलाबी सुंडी, सफेद मक्खी, जैसिड, माहू और थ्रिप्स जैसे कीटों को लेकर किसानों को नियमित निगरानी की सलाह दी गई है. जानिए गुलाबी सुंडी का ETL क्या है और इसके नियंत्रण के लिए किसानों को कौन से IPM उपाय अपनाने चाहिए.

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क‍िसान तक
  • नई दिल्ली,
  • Sep 28, 2026,
  • Updated Sep 28, 2026, 4:48 PM IST

खरीफ सीजन में कपास की खेती करने वाले किसानों को फसल में कीटों की लगातार निगरानी करने की जरूरत है. राज्य कृषि विभागों के समन्वय से केंद्रीय और क्षेत्रीय एकीकृत कीट प्रबंधन केंद्रों द्वारा किए जा रहे सर्वेक्षण में गुलाबी सुंडी के साथ सफेद मक्खी, जैसिड, माहू और थ्रिप्स कपास के प्रमुख कीट के रूप में सामने आए हैं. राहत की बात यह है कि अभी कई राज्यों से मिली रिपोर्ट के मुताबिक इन कीटों का प्रकोप आर्थिक क्षति स्तर यानी ETL से नीचे है और किसी राज्य से बड़े पैमाने पर कीट प्रकोप की सूचना नहीं मिली है.

कपास खरीफ की प्रमुख व्यावसायिक फसलों में शामिल है. इसकी खेती पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना, कर्नाटक, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु सहित कई राज्यों में की जाती है.

गुलाबी सुंडी को लेकर क्यों जरूरी है सतर्कता?

गुलाबी सुंडी यानी Pink Bollworm (Pectinophora gossypiella) कपास की फसल को नुकसान पहुंचाने वाले खास कीटों में शामिल है. पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और महाराष्ट्र जैसे कपास उत्पादक राज्यों में इसका प्रकोप बढ़ने की आशंका बनी रहती है.

इसके अलावा रस चूसने वाले कीट भी किसानों की परेशानी बढ़ा सकते हैं. सफेद मक्खी, जैसिड, माहू और थ्रिप्स की संख्या अगर ETL से ऊपर पहुंचती है तो कपास की पैदावार को नुकसान हो सकता है.

सर्वेक्षण में लीफ माइनर, मिलीबग, रेड कॉटन बग, तंबाकू इल्ली, अमेरिकन बॉलवर्म और तंबाकू कटवर्म जैसे कीट भी देखे गए हैं, लेकिन फिलहाल इनका प्रकोप स्थानीय स्तर तक सीमित बताया गया है.

सप्ताह में दो बार करें खेत की निगरानी

किसानों को सलाह दी गई है कि वे कपास के खेत का सप्ताह में कम से कम दो बार निरीक्षण करें. जिन खेतों में पिछले साल गुलाबी सुंडी का प्रकोप ज्यादा रहा था, उन खेतों पर इस बार विशेष ध्यान रखने की जरूरत है.

गुलाबी सुंडी की निगरानी के लिए बुवाई के करीब 45 दिन बाद फेरोमोन ट्रैप लगाना शुरू किया जा सकता है. निगरानी के लिए प्रति हेक्टेयर 5 ट्रैप लगाने की सलाह दी गई है.

फूल और हरी बॉल की इस तरह करें जांच

कपास में फूल आने पर किसानों को फूलों के भीतर सुंडी की मौजूदगी देखते रहना चाहिए. अगर रोसेट फूल, यानी ऐसा फूल जिसकी पंखुड़ियां चिपकी हुई दिखाई दें, नजर आए तो उसे तोड़कर नष्ट कर देना चाहिए.

बॉल बनने के बाद खेत के अलग-अलग हिस्सों से प्रति एकड़ 20 हरी बॉल चुनकर उन्हें काटकर देखना चाहिए कि उनके अंदर गुलाबी सुंडी या उससे हुए नुकसान के निशान तो नहीं हैं.

कब माना जाएगा कि गुलाबी सुंडी ETL तक पहुंच गई?

गुलाबी सुंडी के मामले में किसानों के लिए आर्थिक क्षति स्तर यानी Economic Threshold Level (ETL) समझना बेहद जरूरी है. यह वह स्तर है जिसके बाद कीट से आर्थिक नुकसान की आशंका को देखते हुए नियंत्रण की कार्रवाई जरूरी हो जाती है.

इन स्थितियों को खतरे का संकेत माना गया है-

  • फूल आने की अवस्था में 10 प्रतिशत रोसेट या क्षतिग्रस्त फूल मिलें.
  • बॉल बनने की अवस्था में 10 प्रतिशत हरी बॉल क्षतिग्रस्त हों.
  • 20 हरी बॉल की जांच में कम से कम 2 बॉल में सुंडी या उसके बाहर निकलने का छेद दिखाई दे.
  • फेरोमोन ट्रैप में लगातार तीन दिनों तक प्रति ट्रैप 8 पतंगे मिलें.

ETL से पहले IPM उपाय अपनाने पर जोर

किसानों को कीटों की संख्या बढ़ने का इंतजार करने के बजाय शुरुआती अवस्था से ही Integrated Pest Management (IPM) यानी एकीकृत कीट प्रबंधन अपनाने की सलाह दी गई है.

गुलाबी सुंडी से बचाव के लिए क्षेत्र के मुताबिक अनुशंसित बीटी कपास की किस्म या हाइब्रिड की समय पर बुवाई करनी चाहिए. बहुत जल्दी बुवाई से बचने को कहा गया है क्योंकि इससे गुलाबी सुंडी का खतरा बढ़ सकता है.

खेत में पौधे और कतार की निर्धारित दूरी बनाए रखना भी जरूरी है. साथ ही बीटी कपास के साथ निर्धारित नॉन-बीटी रिफ्यूजिया की व्यवस्था करने की सलाह दी गई है.

ज्यादा यूरिया डालना पड़ सकता है भारी

कपास की फसल में जरूरत से ज्यादा नाइट्रोजन यानी यूरिया का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. अधिक यूरिया डालने से पौधों की अनावश्यक पत्ते की बढ़वार हो सकती है, जो कीट प्रबंधन को मुश्किल बना सकती है.

खेत को खरपतवार से साफ रखने और स्वयं उगे पुराने कपास या भिंडी के पौधों को हटाने की भी सलाह है. गर्मी के मौसम में गहरी जुताई करने से भी कीटों के जीवन चक्र को तोड़ने में मदद मिल सकती है.

मित्र कीटों को बचाएं, नीम आधारित उत्पादों का करें इस्तेमाल

कपास के खेत में मौजूद प्राकृतिक मित्र कीट गुलाबी सुंडी सहित कई हानिकारक कीटों की संख्या नियंत्रित रखने में मददगार होते हैं. इनमें Trichogramma, Chelonus, Campoletis, Bracon, Chrysoperla और लेडीबर्ड बीटल जैसे मित्र कीट शामिल हैं.

कीट प्रकोप की शुरुआती अवस्था में प्राकृतिक शत्रुओं को सुरक्षित रखते हुए अनुमोदित नीम आधारित जैव-कीटनाशकों का इस्तेमाल किया जा सकता है.
कीटनाशक का छिड़काव कब करें?

किसानों के लिए सबसे अहम बात यह है कि केवल कीट दिखाई देते ही अंधाधुंध रासायनिक कीटनाशक का छिड़काव न करें. कीट की संख्या आर्थिक क्षति स्तर यानी ETL पार करने पर ही अनुमोदित कीटनाशक का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है.

कीटनाशक इस्तेमाल करते समय केंद्रीय कीटनाशी बोर्ड एवं पंजीकरण समिति (CIB&RC) द्वारा अनुमोदित उत्पाद का चयन करना चाहिए और उसका प्रयोग लेबल पर दिए गए निर्देशों के अनुसार ही करना चाहिए.

कटाई के बाद भी खत्म नहीं होती जिम्मेदारी

गुलाबी सुंडी से अगले सीजन की फसल को बचाने के लिए कपास की कटाई के बाद खेत की सफाई महत्वपूर्ण है. फसल के बचे हुए डंठल और अधखुली बॉल को खेत से निकालकर नष्ट करने की सलाह दी गई है.

कपास के डंठलों के ढेर खेत में लंबे समय तक नहीं छोड़ने चाहिए. ऐसा करने का उद्देश्य डंठलों या फसल अवशेषों में सुप्त अवस्था में मौजूद गुलाबी सुंडी को अगले सीजन तक जीवित रहने से रोकना है.

किसानों के लिए काम की बात

फिलहाल बड़े प्रकोप की स्थिति सामने नहीं आई है, लेकिन कपास की मौजूदा अवस्था को देखते हुए नियमित निगरानी सबसे अहम बचाव है. किसान सप्ताह में दो बार खेत देखें, फेरोमोन ट्रैप से गुलाबी सुंडी की गतिविधि पर नजर रखें, रोसेट फूल और संक्रमित बॉल को नष्ट करें और ETL के आधार पर ही रासायनिक नियंत्रण का फैसला लें.

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