World Water Day 2026: सेंसर, AI irrigation से होगी पानी की बचत, जानें कैसे फसल को मिलेगा सही मात्रा में पानी

World Water Day 2026: सेंसर, AI irrigation से होगी पानी की बचत, जानें कैसे फसल को मिलेगा सही मात्रा में पानी

22 मार्च को हर साल विश्व जल दिवस के रूप में मनाया जाता है. जिसमें मीठे पानी के संरक्षण का संदेश दिया जाता है. अब जैसे-जैसे नई तकनीकें विकसित हो रही है, इसका फायदा बढ़ता जा रहा है. इसी क्रम में खेती में पानी बचाने की नई तकनीकों पर भी दु‍निया का जोर बढ़ा है. सेंसर और AI आधारित सिंचाई सिस्टम अब मिट्टी की नमी और मौसम के डेटा के आधार पर तय करते हैं कि कब और कितना पानी देना है, जिससे पानी की बचत और बेहतर उत्पादन संभव हो रहा है.

Water Conservation IN Farming through AIWater Conservation IN Farming through AI
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Mar 22, 2026,
  • Updated Mar 22, 2026, 7:00 AM IST

दुनियाभर में हर साल 22 मार्च को विश्व जल दिवस मनाया जाता है. यह दिन हमें याद दिलाता है कि पानी सिर्फ एक संसाधन नहीं, बल्कि जीवन की बुनियाद है. इस साल की थीम पानी और लैंगिक समानता से जुड़ी है, यानी जहां पानी की सही पहुंच होती है, वहां जिंदगी भी बेहतर होती है. ऐसे में जब पानी की कमी लगातार बढ़ रही है, खेती में इसका समझदारी से इस्तेमाल करना और भी जरूरी हो गया है. अब इस काम में नई तकनीक, खासकर AI और सेंसर, किसानों के लिए मददगार बनकर सामने आ रहे हैं.

आज भी देश के ज्यादातर किसान सिंचाई के लिए अपने अनुभव और अंदाज पर भरोसा करते हैं. कई बार यह तरीका काम कर जाता है, लेकिन कई बार जरूरत से ज्यादा पानी खेत में चला जाता है या फिर कम पड़ जाता है. इसका असर सीधा फसल और पानी दोनों पर पड़ता है. यहीं से सेंसर आधारित सिंचाई की जरूरत महसूस होती है.

मिट्टी की नमी मापते हैं सेंसर

इस नई तकनीक को आसान भाषा में समझें तो खेत में छोटे-छोटे सेंसर लगाए जाते हैं, जो मिट्टी की नमी को लगातार मापते रहते हैं. यानी जमीन खुद बताती है कि उसे पानी चाहिए या नहीं. इसके साथ ही मौसम और तापमान जैसी जानकारी भी सिस्टम तक पहुंचती रहती है. यह सारा डेटा AI के पास जाता है, जो उसे समझकर किसान को सलाह देता है कि कब सिंचाई करनी है और कितनी.

सबसे अच्छी बात यह है कि कई सिस्टम अब खुद ही मोटर या ड्रिप सिंचाई को चालू और बंद कर सकते हैं. यानी किसान को बार-बार खेत तक भागना नहीं पड़ता और पानी भी बेवजह खर्च नहीं होता. इससे खेती थोड़ी आसान और ज्यादा समझदार बन रही है.

30-50 प्रत‍िशत पानी की बचत संभव

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरीके से 30 से 50 प्रतिशत तक पानी बचाया जा सकता है. साथ ही फसल को जरूरत के हिसाब से पानी मिलने से उसकी सेहत भी बेहतर रहती है और उत्पादन में भी सुधार देखने को मिलता है. खासकर फल और सब्जी की खेती में इसका फायदा ज्यादा दिख रहा है.

भारत सरकार भी खेती में AI को दे रही बढ़ावा

भारत सरकार भी इस दिशा में काम कर रही है और विभ‍िन्‍न माध्‍यमों से खेती में एआई के इस्‍तेमाल को प्रमोट कर रही है. इसके लिए सरकार ने “Future Farming in India: AI Playbook for Agriculture” की लॉन्‍च की है. इस पहल में साफ कहा गया है कि आने वाले समय में खेती को डेटा और तकनीक के सहारे ही आगे बढ़ाना होगा. इसमें छोटे किसानों तक आसान और सस्ती तकनीक पहुंचाने पर भी जोर दिया गया है.

खेती में AI के इस्‍तेमाल में अभी कई चुनौतियां

हालांकि, अभी यह बदलाव हर खेत तक नहीं पहुंच पाया है. कई किसानों के लिए यह तकनीक नई है और इसकी लागत भी एक चुनौती है. लेकिन जैसे-जैसे जानकारी बढ़ेगी और सुविधाएं सस्ती होंगी, इसका दायरा भी बढ़ेगा. आने वाले समय की खेती वही होगी, जहां हर बूंद की कीमत समझी जाएगी. AI और सेंसर उसी दिशा में एक मजबूत कदम हैं, जो खेती को आसान, समझदार और टिकाऊ बना सकते हैं.

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