
किसान अब नए ही नहीं बल्कि पुराने ट्रैक्टर भी लोन पर खरीद रहे हैं. ऐसे में किसानों को खेती करने के लिए मशीन तो मिल जाती है लेकिन उनके ऊपर लोन और इसकी किश्तें भरने की चिंता चढ़ी रहती है. इसका कारण ये है कि किसानों की आय कभी निश्चित नहीं रहती, क्योंकि कभी मौसम उनकी फसल खेत में ही खराब कर देता है तो कभी फसल उगाने के बाद भी मंडी में भाव के लिए तरसते रहते हैं. ऐसे हालातों में किसान के लिए ट्रैक्टर की किश्तें चुकाना बहुत कठिन काम हो जाता है. इसलिए हम आज आपको कुछ टिप्स दे रहे हैं, जिनसे आप ट्रैक्टर के लोन की किश्तें कम कर सकते हैं और साथ ही ब्याज भी बचा सकते हैं.
आप कहेंगे कि बड़ी किश्त तो किसान को चुकाना और भी भारी पड़ सकती है. लेकिन बड़ी किश्त बनवाने का फायदा ये है कि ट्रैक्टर के लोन की अवधि छोटी हो जाएगी. लोन का समय कम होने की वजह से उतनी ही कम किश्तें बनेंगी और आपको ब्याज भी उतना ही कम देने पड़ेगा. इसके साथ ही आप बड़ी किश्त के लिए कहीं और से भी पैसे का इंतजाम कर लेंगे और जल्दी लोन चुकाकर ब्याज बचा लेंगे.
वहीं अगर आप ट्रैक्टर लोन की किश्तें छोटी करवाते हैं तो लोन की अवधि भी बढ़ जाएगी और साथ ही उतना ही ज्यादा ब्याज भी लगेगा. हालांकि छोटी किश्त जमा करने में किसान को बहुत ज्यादा चिंता नहीं करनी पड़ती, कम रकम का इंतजाम आराम से हो जाता है.
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अगर आप बड़ी किश्तें नहीं बनवा सकते तो कोशिश करें कि ट्रैक्टर खरीदते वक्त ज्यादा से ज्यादा पैसा डाउन पेमेंट में भर दें. ताकि लोन की रकम जितनी कम होगी, आपको किश्तें और ब्याज उतना ही कम लगेगा. अगर बचत में डाउन पेमेंट के लिए ज्यादा पैसा नहीं है तो सगे-संबंधियों से थोड़ा पैसा मांग लें, क्योंकि उस पैसे पर ब्याज नहीं लगेगा मगर बैंक के लोन पर भारी ब्याज लगता है.
ट्रैक्टर की चालू लोन अवधि के बीच अगर फसल अच्छी हो जाती है या फिर किसी अन्य जरिए ये पैसा बचत में आ जाए तो कोशिश करें कि पहले ट्रैक्टर का लोन एक बार में चुकाकर खत्म कर दें. इससे किश्तों की चिंता कम हो जाएगी और अच्छा खासा ब्याज भी बचा लेंगे. इसलिए कोशिश करें कि पैसा बचत में आते लोन प्री-क्लोज करा दें.
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स्टेपअप ईएमआई किसानों के लिए बड़ी काम की सुविधा है. इस स्टेपअप ईएमआई में किसानों को अलग-अलग सीजन के हिसाब से अलग-अलग रकम की किश्तें भरने का ऑप्शन रहता है. जैसे जिन महीनों में किसान की आय नहीं हो रही होती है, उन महीनों में किश्तें हल्की भरनी होती हैं और जिन महीनों फसल कटाई और आय का सीजन होता है, तब किश्तें बड़ी और ज्यादा राशि की भरने का विकल्प मिल जाता है.
बहुत सारे किसान ऐसे होते हैं जो सरकारी स्कीम और सुविधाओं से जागरूक नहीं रह पाते. इसलिए ट्रैक्टर खरीदने से पहले अपने निकटतम जन सेवा केंद्र पर जाकर ट्रैक्टर से जुड़ी सरकारी स्कीम के बारे में जरूर पता करें. इससे आपको ट्रैक्टर पर अच्छी सब्सिडी भी मिल सकती है.
अपने ट्रैक्टर लोन की किश्तें कम करने के लिए रिफाइनेंस एक बढ़िया विकल्प हो सकता है. अगर आपको कहीं दूसरी जगह से कम ब्याज पर ट्रैक्टर की बकाया लोन राशि के बराबर दूसरा लोन मिल जाता है, तो इस लोन से पैसे लेकर ट्रैक्टर का लोन बंद करा सकते हैं. इससे फिर आप छोटी किश्त और कम ब्याज वाला लोन आराम से भर सकते हैं.
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