
सोनालिका ट्रैक्टर 30 साल पूरे कर रहा है. यह एक ऐसी कहानी है, जो बताती है कि अगर हम मेहनत और हौसले से काम करें तो कुछ भी असंभव नहीं है. पंजाब के छोटे शहर होशियारपुर से शुरू हुई यह कहानी एक साधारण आदमी और उसके दो बेटों के बड़े सपनों की कहानी है. लीडरशिप, हिम्मत और किसानों के लिए सच्चे समर्पण के साथ सोनालिका आज दुनिया में एक जाना-माना ट्रैक्टर ब्रांड बन गया है.
सोनालिका का सफर 1996 में शुरू हुआ. इसके संस्थापक एल डी मित्तल ने अपनी रिटायरमेंट के बाद सोचा कि वे कुछ नया करेंगे. उन्होंने अपने बेटों डॉ. ए.एस. मित्तल और डॉ. दीपक मित्तल के साथ मिलकर सोनालिका की नींव रखी. उनका सपना था कि भारतीय किसान के लिए मजबूत, भरोसेमंद और आधुनिक ट्रैक्टर बनाएं. शुरुआत में उन्होंने हल्के कृषि उपकरण बनाए, लेकिन किसानों की बढ़ती मांग ने ट्रैक्टर बनाने की दिशा में प्रेरित किया.
सोनालिका ने हमेशा किसानों को पहले रखा. जब बाकी कंपनियां केवल मार्केट की जरूरतों के हिसाब से ट्रैक्टर बनाती थीं, सोनालिका ने तय किया कि उनके ट्रैक्टर भारत की मिट्टी, फसल और मौसम के हिसाब से बनेंगे. यह सोच ही उन्हें अलग बनाती है. उनके पहले बनाए गए ट्रैक्टर आज भी आसानी से स्टार्ट हो जाते हैं, जो उनकी मजबूती और भरोसे का प्रतीक है.
जैसे-जैसे ट्रैक्टर की मांग बढ़ी, सोनालिका ने अपने उपकरण और पार्ट्स खुद बनाना शुरू किया. उन्होंने इंजन, गियरबॉक्स, शीट मेटल और अन्य जरूरी पार्ट्स को इन-हाउस बनाया. इससे उन्हें मजबूत और भारी ट्रैक्टर बनाने में मदद मिली. अब सोनालिका के पास छोटे और बड़े ट्रैक्टर की पूरी रेंज है, जो अलग-अलग राज्यों और फसलों के हिसाब से बनाए जाते हैं. जैसे, पंाडी स्पेशल महाबली, छत्रपति और महाराजा ट्रैक्टर. इसके अलावा 70 से ज्यादा कृषि उपकरण भी किसानों की मदद के लिए बनाए गए हैं.
सोनालिका ने 2004 में पहला ट्रैक्टर विदेश भेजा और 2011 में यूरोप में अपना कदम रखा. आज सोनालिका भारत का नंबर 1 ट्रैक्टर एक्सपोर्ट ब्रांड है. हर तीसरा ट्रैक्टर जो भारत से बाहर जाता है, वह सोनालिका के होशियारपुर प्लांट से बनता है. कंपनी के पास दुनिया के 150 से ज्यादा देशों में अपनी मौजूदगी है और 15 से ज्यादा देशों में वह नेतृत्व करती है.
सोनालिका ने हमेशा ईमानदारी और पारदर्शिता को महत्व दिया. 2022 में यह पहली कंपनी बनी जिसने अपने ट्रैक्टर की कीमत वेबसाइट पर दिखाई. 2025 में ट्रैक्टर की सर्विस का खर्च भी वेबसाइट पर दिखाया गया. यह किसानों के साथ विश्वास और सम्मान का वादा है.
अब सोनालिका अपने अगले 30 साल की तैयारी कर रहा है. प्लांट की उत्पादन क्षमता 3 लाख ट्रैक्टर प्रति साल तक बढ़ाई जाएगी. डिजिटल प्लेटफॉर्म, कनेक्टेड डाइग्नोस्टिक्स और व्यक्तिगत सेवा के जरिए किसान अनुभव को और आसान बनाया जाएगा. सोनालिका का मकसद है कि हर किसान को “जीतने का दम” मिले, चाहे वह भारत में हो या दुनिया के किसी भी हिस्से में.
सोनालिका की यह 30 साल की कहानी दिखाती है कि मेहनत, सोच और भरोसे से कोई भी सपना सच किया जा सकता है. छोटे शहर से शुरू होकर यह ब्रांड आज पूरे विश्व में किसान भाइयों और बहनों का भरोसेमंद साथी बन गया है.
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