Basmati Aroma Tori: अब तोरई में आएगी बासमती चावल जैसी खुशबू, IIVR ने विकसित की ये अनोखी वैरायटी

Basmati Aroma Tori: अब तोरई में आएगी बासमती चावल जैसी खुशबू, IIVR ने विकसित की ये अनोखी वैरायटी

वाराणसी स्थित IIVR ने 8 साल की मेहनत के बाद बासमती खुशबू वाली तोरई विकसित की है. VRSG 7-17 नाम की यह किस्म 55–60 दिनों में तैयार होती है और किसानों को ज्यादा मुनाफा देगी.

तोरी की खेतीतोरी की खेती
रवि कांत सिंह
  • New Delhi ,
  • Jan 07, 2026,
  • Updated Jan 07, 2026, 11:29 AM IST

कुछ दिनों में आप ऐसी तोरई खा सकेंगे जिसमें आपको बासमती की खुशबू आएगी. वैसे तो तोरई सब्जी है, लेकिन इसमें बासमती की झलक मिलना खास बात है. तोरई की इस वैरायटी को वाराणसी स्थित भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान यानी IIVR ने विकसित की है. इसका नाम VRSG 7-17 है. इस खास तरह की तोरई को बनाने में आईआईवीआर के वैज्ञानिक पिछले 8 साल से लगे हुए थे. इतनी कड़ी मेहनत के बाद उन्हें सफलता मिली है. इसका फायदा ये होगा कि आप कुछ ही दिनों में ऐसी तोरई का स्वाद चखेंगे जिससे बासमती की खुशबू आएगी.

मांग और स्वाद दोनों बढ़ाएगी यह किस्म

बासमती चावल की दुनिया भर में मांग इसलिए है क्योंकि इसकी खुशबू बहुत शानदार होती है. पतले दाने के अलावा इस चावल की खुशबू भूख और स्वाद को बढ़ा देती है. यही वजह है कि आईआईवीआर के वैज्ञानिकों ने तोरई में बासमती की खुशबू देकर तोरई की मांग और स्वाद दोनों को बढ़ाने का काम किया है. तोरई की यह वैरायटी अभी वैज्ञानिक स्तर पर तैयार की गई है, बस कुछ ही दिनों में कमर्शियल इस्तेमाल के लिए भी इसे उतार दिया जाएगा.

बासमती वाली तोरई की खास बातें

इस तोरई के साथ दो खास बातें हैं. एक, जिस खेत में इसकी बुआई होगी, वहां से बासमती की खुशबू आएगी. दो, जिस किचन में इसकी सब्जी बनेगी, वहां से भी बासमती की खुशबू आएगी. आपने देखा होगा, जब भी बासमती चावल बनता है तो उसकी खुशबू दूर से ही पता चल जाती है. यही बात इस तोरई के साथ भी होगी.

तोरई की इस नई वैरायटी का रंग हल्का हरा है. बिहार और यूपी के कुछ जिलों में हल्के हरे रंग वाली तोरई को काफी पसंद किया जाता है. इनमें यूपी के बस्ती और गोरखपुर मंडल से सटे इलाके शामिल हैं. आईआईवीआर वाराणसी के निदेशक डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि तोरई की यह किस्म अपने आप में सबसे अनोखी है. 

जल्द जारी होंगे कमर्शियल बीज

इस प्रजाति को विकसित करने वाले आईआईवीआर के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. त्रिभुवन चौबे ने बताया कि बासमती जैसी खुशबू वाली इस तोरई की नई प्रजाति को नेशनल ब्यूरो ऑफ प्लांट जेनेटिक रिसोर्सेज, नई दिल्ली में रजिस्टर भी किया गया है. इसे
वीआरएसजी 7-17 नाम दिया गया है.

IIVR अब इस किस्म के बीजों को तैयार कर किसानों के लिए नई वैरायटी के रूप में जारी करने की तैयारी कर रहा है. डॉ. त्रिभुवन चौबे ने बताया कि तोरई की यह प्राकृतिक प्रजाति अपने आप में अनूठी किस्म है. चौबे ने बताया कि जल्द ही किसान बासमती जैसी खुशबू वाली इस तोरई को अपने खेतों में उगा सकेंगे. भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान जल्द ही इसके सीड्स किसानों को खेती के लिए उपलब्ध कराएगा.

किचन से आएगी बासमती की महक

इस किस्म की और भी खास बातें हैं. तोरई को बनाने के कई घंटे बाद तक उसमें बासमती की खुशबू आती रहेगी. रही बात खेती की, तो यह बाकी किस्मों की तुलना में जल्दी तैयार होने वाली वैरायटी है. महज 55 से 60 दिनों में इसके पौधों पर तोरई के फल आने लगेंगे. फल का आकार भी अच्छा रहेगा. एक पौधे से औसतन सवा किलो तक उत्पादन मिल सकेगा.

किसानों की बढ़ेगी कमाई

आईआईवीआर में तैयार यह तोरई किसानों के साथ-साथ उपभोक्ताओं के लिए भी अनूठी होने वाली है. इससे किसानों की कमाई बढ़ेगी क्योंकि वे बासमती की खुशबू वाली वैरायटी को महंगे रेट पर बेच सकेंगे. दूसरी ओर, ग्राहकों के लिए यह अनूठी किस्म होगी क्योंकि उन्हें तोरई जैसी सब्जी से बासमती की खुशबू और स्वाद का मजा मिलेगा. 

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