पराली अब जलाएंगे नहीं, आलू उगाएंगे! PZTM तकनीक रायसेन मेले में छाई

पराली अब जलाएंगे नहीं, आलू उगाएंगे! PZTM तकनीक रायसेन मेले में छाई

रायसेन मेले में PZTM जैसी पराली-आधारित तकनीकें यहां लाइव डेमो के जरिए दिखाई जा रही हैं, जो किसानों को आकर्षित कर रही हैं क्योंकि मध्य प्रदेश में भी धान-गेहूं सिस्टम में पराली प्रबंधन की जरूरत है।

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धर्मेंद्र सिंह
  • Raisen ,
  • Apr 13, 2026,
  • Updated Apr 13, 2026, 8:11 AM IST

रायसेन (मध्य प्रदेश): पंजाब और हरियाणा के किसान पराली जलाने के मामलों को लेकर अक्सर चर्चा में रहते हैं. मध्य प्रदेश में भी पराली जलाने की समस्या कम नहीं है. रायसेन जिले सहित प्रदेश के कई इलाकों में पराली जलाने की बढ़ती घटनाएं अब पर्यावरण और कृषि दोनों के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही हैं. इससे वायु प्रदूषण, मृदा की उर्वरता में गिरावट और मानव स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है.

ऐसे में “जीरो टिलेज और मल्च आधारित आलू उत्पादन तकनीक (PZTM)” किसानों के लिए एक प्रभावी और टिकाऊ समाधान बनकर सामने आई है. यह तकनीक किसानों को पराली जलाने के बजाय उसका उपयोग मल्च के रूप में करने के लिए प्रोत्साहित करती है.

PZTM तकनीक: कैसे करती है काम

International Potato Center के अंतर्गत संचालित CIP-साउथ एशिया रीजनल सेंटर इस तकनीक को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. इस संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ अंशुल शर्मा ने बताया PZTM तकनीक के जरिए किसान धान की पराली को खेत में ही मल्च के रूप में उपयोग करते हैं, जिससे मिट्टी की नमी बनी रहती है, खरपतवार पर नियंत्रण होता है और पोषक तत्वों की उपलब्धता बेहतर होती है.

कृषि महोत्सव में दिखा उत्साह

रायसेन में आयोजित उन्नत कृषि महोत्सव-2026 में पिछले तीन दिनों से इस तकनीक को लेकर किसानों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है. CIP-CSARC के स्टॉल पर बड़ी संख्या में किसान पहुंच रहे हैं और इस तकनीक को व्यवहारिक एवं लाभकारी विकल्प के रूप में अपना रहे हैं.

उन्नत किस्मों ने खींचा ध्यान

मेले में प्रदर्शित आलू की उन्नत किस्मों ने भी आगंतुकों को आकर्षित किया. खासतौर पर ‘कुफरी उदय’ किस्म, जो लाल छिलके वाली, जल्दी तैयार होने वाली और पोषक तत्वों से भरपूर है, किसानों के बीच चर्चा का केंद्र बनी रही.

मंत्री ने भी तकनीक में दिखाई रुचि

रायसेन की उन्नत कृषि महोत्सव में मध्य प्रदेश के उद्यानिकी मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने भी CIP-साउथ एशिया रीजनल सेंटर के स्टॉल का अवलोकन किया और इस तकनीक में गहरी रुचि दिखाई.

किसानों के लिए फायदेमंद पहल

PZTM तकनीक न केवल पराली जलाने की समस्या का समाधान प्रस्तुत करती है, बल्कि कम लागत में अधिक उत्पादन के जरिए किसानों की आय बढ़ाने में भी मददगार साबित हो रही है. साथ ही यह तकनीक पर्यावरण संरक्षण और सतत कृषि को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में उभर रही है.

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