यूपी के गन्ना किसानों को मिली 4 नई किस्में, ज्यादा पैदावार के साथ बढ़ेगी चीनी की रिकवरी

यूपी के गन्ना किसानों को मिली 4 नई किस्में, ज्यादा पैदावार के साथ बढ़ेगी चीनी की रिकवरी

उत्तर प्रदेश में गन्ने की चार नई किस्मों को खेती के लिए मंजूरी मिली है. इनमें को.शा.23232, को.शा.19235, को.शा.18232 और को.लख.21201 शामिल हैं. नई किस्मों में बेहतर पैदावार और चीनी परता के आंकड़े सामने आए हैं, जबकि कई पुरानी गन्ना किस्मों को चरणबद्ध तरीके से हटाने का भी फैसला लिया गया है.

Consumer price inflation rose to 4.45% in July 2026 from 4.38% in June, while food inflation was higher at 5.52% in July.Consumer price inflation rose to 4.45% in July 2026 from 4.38% in June, while food inflation was higher at 5.52% in July.
क‍िसान तक
  • लखनऊ,
  • Oct 01, 2026,
  • Updated Oct 01, 2026, 11:48 AM IST

उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों को अधिक पैदावार और बेहतर चीनी परता देने वाली चार नई गन्ना किस्मों का विकल्प मिला है. ‘उत्तर प्रदेश बीज गन्ना एवं गन्ना किस्म स्वीकृति उप समिति’ की बैठक में उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद, शाहजहांपुर द्वारा विकसित तीन किस्मों को.शा.23232, को.शा.19235 और को.शा.18232 और भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ द्वारा विकसित को.लख.21201 को खेती के लिए अनुमोदित किया गया है.

गन्ना आयुक्त की अध्यक्षता में 29 सितंबर को हुई उप समिति की बैठक में नई गन्ना किस्मों के अनुमोदन पर चर्चा की गई. इसमें वैज्ञानिकों ने प्रस्तावित किस्मों की उपज, पोल प्रतिशत और अन्य विशेषताओं से जुड़े आंकड़े पेश किए.

को.शा.23232 ने उपज में मानक किस्म को पछाड़ा

उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद, शाहजहांपुर द्वारा विकसित अगेती किस्म को.शा.23232 के औसत उपज आंकड़े 95.56 टन प्रति हेक्टेयर दर्ज किए गए. यह मानक किस्म को.0238 के मुकाबले 9.44 प्रतिशत अधिक है.

को.शा.23232 में पोल प्रतिशत केन नवंबर, जनवरी और मार्च में क्रमशः 13.10, 13.77 और 14.31 पाया गया. इन महीनों में यह मानक किस्म को.0238 से क्रमशः 0.09, 0.24 और 0.12 प्रतिशत अधिक रहा. पेड़ी की उपज 80.57 टन प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई, जो को.0238 के मुकाबले 3.16 प्रतिशत अधिक बताई गई है.

प्रेस नोट के अनुसार, को.शा.23232 लाल सड़न रोग के प्रति रोगरोधी है और इसमें पेड़ी की अच्छी क्षमता है.

को.लख.21201 की औसत उपज 86.57 टन प्रति हेक्टेयर

भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ द्वारा विकसित अगेती गन्ना किस्म को.लख.21201 को भी अनुमोदन मिला है. इसकी औसत उपज 86.57 टन प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई है, जो मानक किस्म को.0238 के लगभग समान है.

को.लख.21201 में पोल इन केन 13.94 प्रतिशत पाया गया, जो को.0238 के 13.71 प्रतिशत से अधिक है. प्रेस नोट के अनुसार यह किस्म लाल सड़न रोग के प्रति उच्च प्रतिरोधक क्षमता रखती है और इसमें पेड़ी की अच्छी क्षमता है. इसे पूरे उत्तर प्रदेश के लिए अनुमोदित किया गया है.

को.शा.19235 से 87.58 टन प्रति हेक्टेयर औसत उपज

समिति ने मध्य और देर से पकने वाली गन्ना किस्मों को भी मंजूरी दी है. को.शा.19235 की औसत उपज 87.58 टन प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई है, जो मानक प्रजाति को.शा.767 की औसत उपज 77.20 टन प्रति हेक्टेयर के मुकाबले 11.81 प्रतिशत अधिक है.

इस किस्म में नवंबर, जनवरी और मार्च में पोल प्रतिशत केन क्रमशः 11.89, 13.07 और 13.74 पाया गया. यह मानक किस्म को.शा.767 की तुलना में क्रमशः 0.88, 0.58 और 0.38 प्रतिशत अधिक है.

पेड़ी की उपज भी 73.90 टन प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई, जो मानक किस्म के मुकाबले 11.36 प्रतिशत अधिक है. इस किस्म को पूरे उत्तर प्रदेश में खेती के लिए अनुमोदित किया गया है.

को.शा.18232 की औसत उपज 92.38 टन प्रति हेक्टेयर

मध्य और देर से पकने वाली दूसरी किस्म को.शा.18232 ने भी उपज के मामले में बेहतर प्रदर्शन किया है. इसकी औसत उपज 92.38 टन प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई है. यह मानक किस्म को.शा.767 की तुलना में 26.51 प्रतिशत अधिक है.

इस किस्म में नवंबर, जनवरी और मार्च में पोल प्रतिशत केन क्रमशः 11.57, 12.87 और 14.05 पाया गया. प्रेस नोट के मुताबिक इसकी पेड़ी की औसत उपज 82.06 टन प्रति हेक्टेयर रही, जो मानक किस्म को.शा.767 के मुकाबले 23.70 प्रतिशत अधिक है.

8 नोटिफाइड गन्ना किस्में भी खेती के लिए मंजूर

भारत सरकार द्वारा नोटिफाइड आठ गन्ना किस्मों को भी प्रदेश में खेती के लिए अंगीकृत किया गया है. इनमें को.16030, को.17018, को.पी.18122, को.पी.11438, को.लख.16466, को.पी.17215, को.पी.18109 और को.पी.18213 शामिल हैं.

इनमें कुछ अगेती और कुछ मध्य और देर से पकने वाली गन्ना किस्में हैं. को.पी.16437, को.पी.11438 और को.लख.16466 अगेती गन्ना किस्में बताई गई हैं. प्रेस नोट के मुताबिक को.पी.16437 और को.पी.11438 पूरे उत्तर प्रदेश के लिए हैं, जबकि दूसरी नोटिफाइड किस्मों में कुछ को पश्चिमी और मध्य उत्तर प्रदेश के लिए अपनाया गया है.

8 पुरानी गन्ना किस्में दो साल बाद होंगी बाहर

उप समिति की बैठक में केवल नई किस्मों को जगह देने का फैसला नहीं हुआ, बल्कि पुरानी और अलोकप्रिय किस्मों को चरणबद्ध तरीके से हटाने पर भी निर्णय लिया गया.

अलोकप्रिय, नगण्य क्षेत्रफल वाली और पुरानी छह गन्ना किस्मों को.शा.95255, को.शा.97264, को.शा.96275, को.शा.97261, को.से.96436 और को.शा.98231 को अनुपयुक्त घोषित करते हुए अगले दो वर्षों में चरणबद्ध तरीके से हटाने का निर्णय लिया गया. इसके अलावा को.शा.96246 और को.शा.98231 को अस्वीकृत करने की प्रक्रिया भी अपनाई जाएगी.

नई गन्ना किस्मों की मंजूरी से किसानों के पास अब खेती के लिए ज्यादा विकल्प उपलब्ध होंगे. गन्ना विभाग का मानना है कि अधिक उपज और बेहतर चीनी परता देने वाली किस्मों के विस्तार से किसानों की गन्ना उपज बढ़ने के साथ प्रदेश में चीनी उत्पादन और चीनी परता में भी सुधार हो सकता है.

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