प्राकृतिक विधि से आंवले की खेती में फायदे ही फायदे, ऐसे बढ़ाएं किसान अपनी आय

प्राकृतिक विधि से आंवले की खेती में फायदे ही फायदे, ऐसे बढ़ाएं किसान अपनी आय

प्राकृतिक विधि से आंवले की फसल को लगाकर कम लागत में ज्यादा फायदा लिया जा सकता है. आंवले का सबसे ज्यादा औषधि इस्तेमाल होता है.कोरोना  के बाद आंवले की डिमांड में काफी ज्यादा इजाफा भी हुआ है.आंवला के सेवन से शरीर में कैल्शियम ,आयरन फास्फोरस, विटामिन ए ,विटामिन इ और विटामिन सी की कमी को पूरा किया जा सकता है.

आवला की बागवानी आवला की बागवानी
धर्मेंद्र सिंह
  • lucknow ,
  • Dec 27, 2022,
  • Updated Dec 27, 2022, 1:35 PM IST

आंवले की खेती उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा प्रतापगढ़ जनपद में की जाती है.प्रतापगढ़ जिला आंवले के लिए पूरे देश में मशहूर माना जाता है.यहां पर 50000 हेक्टेयर से ज्यादा भूमि पर आंवले के बाग लगे हुए हैं.वहीं राजधानी लखनऊ के केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान में भी आंवले की बागवानी प्राकृतिक विधि से हो रही है.प्राकृतिक विधि से आंवले की फसल को लगाकर कम लागत में ज्यादा फायदा लिया जा सकता है. आंवले का सबसे ज्यादा औषधि इस्तेमाल होता है.कोरोना  के बाद आंवले की डिमांड में काफी ज्यादा इजाफा भी हुआ है.आंवला के सेवन से शरीर में कैल्शियम ,आयरन फास्फोरस, विटामिन ए ,विटामिन इ और विटामिन सी की कमी को पूरा किया जा सकता है.वहीं आंवले की प्रोसेसिंग से मुरब्बा, अचार चटनी, पाउडर ,जूस जैसे उत्पाद को बनाकर बाजारों में बेचा जा रहा है.

आंवले की खेती में किसानों को फायदा ही फायदा


उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा आंवला पैदा किया जाता है .प्रदेश का प्रतापगढ़ जनपद आंवले की खेती के लिए जाना जाता है.आंवले का औषधि प्रयोग सबसे ज्यादा है .वही आंवले को प्रोसेसिंग करके कई सारे उत्पाद भी बनाए जा रहे हैं.आंवले का पेड़ बंजर और उसर जमीन पर भी बड़ी आसानी से उग जाता है.वही एक पेड़ से प्रतिवर्ष 1 क्विंटल तक आंवले का उत्पादन होता है.वही प्राकृतिक विधि से आंवले की बागवानी करने पर लागत काफी कम हो जाती है जिससे किसानों को फायदा ही फायदा होता है .आंवले की बागवानी करने पर किसान 60 साल तक कमाई कर सकता है क्योंकि आंवले का एक पेड़ 55 से 60 साल तक फल देता है.

साल भर रहती है आंवले की मांग

बाजारों में आंवले की मांग पूरी साल बनी रहती है.सर्दियों के मौसम में आंवले की खपत सबसे ज्यादा बढ़ जाती है.आंवले का सबसे ज्यादा प्रयोग चवनप्राश बनाने में दवा कंपनियां करती है.इसके अलावा आंवले की चटनी ,मुरब्बा और जैम की भी बाजार में सबसे ज्यादा डिमांड है.विटामिन सी का सबसे अच्छा स्रोत आंवला को माना गया है.केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान के निदेशक डॉ देवेंद्र पांडे बताते हैं कि आंवला औषधि गुणों से भरपूर है.वहीं इसकी बागवानी में खर्च कम आता है.आंवले के साथ-साथ कई से फसली खेती की जा सकती है.आंवले के साथ हल्दी, लेमन ग्रास और पशुओं के चारों की खेती को करके किसान अपनी आय में इजाफा कर सकते हैं.

औषधीय गुणों का खजाना है आंवला

आंवले को औषधि गुणों का खजाना माना जाता है.  हर रोज एक आंवले का सेवन करने से शरीर में कभी भी विटामिन सी की कमी नहीं होगी.केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान के निदेशक डॉ देवेंद्र पांडे बताते हैं कि आंवला विटामिन सी का एक सस्ता स्रोत माना जाता है.वहीं इसके सेवन मात्र से कैल्शियम, आयरन ,फास्फोरस विटामिन ए ,विटामिन सी ,विटामिन ई की पूर्ति भी होती है .वही ब्यूटी प्रोडक्ट में भी आंवले का इस्तेमाल सबसे ज्यादा होता है .इसी वजह से पूरे साल इसकी मांग बनी रहती है.

इन बीमारियों में वरदान है आंवला

सर्दियों के मौसम में आंवले के सेवन करने से शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है .आयुर्वेदाचार्य कमलेश कुशवाहा बताते हैं कि नियमित आंवला खाकर मौसमी बीमारियों से दूर रह सकते हैं.इसके अलावा आंवला विटामिन सी का सबसे बड़ा स्रोत माना जाता है .आंवले के सेवन से कब्ज की समस्या से राहत मिल सकती है .वहीं आंवले के नियमित प्रयोग से त्वचा और बालों के लिए यह काफी फायदेमंद माना गया है .इसके अलावा शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने का काम भी करता है.

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