ढैंचा की खेती से किसानों को होगा डबल मुनाफा, Kanpur agriculture University के वैज्ञानिकों ने दिए काम के टिप्स

ढैंचा की खेती से किसानों को होगा डबल मुनाफा, Kanpur agriculture University के वैज्ञानिकों ने दिए काम के टिप्स

Dhaincha Farming: उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही का कहना है कि राज्य सरकार का लक्ष्य मिट्टी की उर्वरता को प्राकृतिक रूप से बढ़ाना है. रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने के लिए 'ढैंचा' जैसे हरी खाद वाले बीजों को प्राथमिकता दी जा रही है. इससे न केवल मिट्टी को नाइट्रोजन मिलता है, बल्कि आने वाली मुख्य फसल की पैदावार भी बेहतर होती है.

उत्तर प्रदेश सरकार खरीफ सीजन में हरी खाद को बढ़ावा दे रही हैउत्तर प्रदेश सरकार खरीफ सीजन में हरी खाद को बढ़ावा दे रही है
क‍िसान तक
  • LUCKNOW,
  • May 06, 2026,
  • Updated May 06, 2026, 8:51 AM IST

उत्तर प्रदेश सरकार खरीफ सीजन में हरी खाद को बढ़ावा दे रही है. इसी क्रम में चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कानपुर के प्रसार निदेशालय के लाल बहादुर सभागार कक्ष में किसानों को खेती के वैज्ञानिक टिप्स दिए गए. बैठक में निदेशक प्रसार डॉ वीके त्रिपाठी ने किसानों को हरी खाद के महत्व पर जानकारी दी. उन्होंने कहा- किसान 30 से 40 किलोग्राम ढैंचा का बीज प्रति हेक्टेयर की दर से बुवाई करें. साथ ही समय-समय पर सिंचाई करते रहें.

40 दिन पर मिट्टी में मिला दें तो मिलेगी नाइट्रोजन

ढैंचा की फसल को 35 से 40 दिन पर मिट्टी में मिला दें. इससे मृदा में 84 से 129 किलोग्राम नाइट्रोजन प्रति हेक्टेयर प्राप्त होती है. डॉ त्रिपाठी ने बताया कि हरे पदार्थ की मात्रा 20 से 25 टन प्रति हेक्टेयर प्राप्त होता है, जिससे किसानों की फसल लागत में कमी आती है तथा रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है. और फसल की गुणवत्ता अच्छी होती है.वैज्ञानिक डॉक्टर यूएन शुक्ला ने किसानों को धान की नर्सरी का प्रबंधन विषय पर जानकारी दी.

ढैंचा क्यों है किसानों के लिए फायदेमंद?

डॉ वीके त्रिपाठी के मुताबिक, ढैंचा एक प्रमुख हरी खाद वाली फसल है, जिसे खेत में बोने के बाद कुछ समय में जुताई कर मिट्टी में मिला दिया जाता है. इससे खेत में जैविक पदार्थ बढ़ता है और नाइट्रोजन की मात्रा प्राकृतिक रूप से बढ़ती है. धान, गन्ना, मक्का और दूसरी खरीफ फसलों से पहले ढैंचा बोने से मिट्टी की सेहत बेहतर होती है और अगली फसल की पैदावार में सुधार होता है.

योगी सरकार का क्या है उद्देश्य 

बता दें कि योगी सरकार का लक्ष्य रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग को कम करना और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देना है. लगातार रासायनिक खाद के उपयोग से कई इलाकों में मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हुई है. ऐसे में ढैंचा जैसी हरी खाद फसलें मिट्टी को दोबारा उपजाऊ बनाने में मददगार मानी जाती हैं.

रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करना

उधर, उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही का कहना है कि राज्य सरकार का लक्ष्य मिट्टी की उर्वरता को प्राकृतिक रूप से बढ़ाना है. रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने के लिए 'ढैंचा' जैसे हरी खाद वाले बीजों को प्राथमिकता दी जा रही है. इससे न केवल मिट्टी को नाइट्रोजन मिलता है, बल्कि आने वाली मुख्य फसल की पैदावार भी बेहतर होती है.

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