
उत्तर प्रदेश गन्ना अनुसंधान परिषद, शाहजहांपुर ने स्वतंत्रता सेनानी राम प्रसाद बिस्मिल के नाम पर 'बिस्मिल' नाम की गन्ने की एक नई ज्यादा पैदावार वाली किस्म विकसित की है, जिसे अब चार और राज्यों में खेती के लिए मंजूरी मिल गई है, अधिकारियों ने गुरुवार को PTI को बताया. परिषद के निदेशक वी. के. शुक्ला ने कहा कि यह किस्म, जिसे पहले सिर्फ उत्तर प्रदेश के लिए मंजूरी मिली थी, अब केंद्रीय समिति की मंजूरी के बाद हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड और राजस्थान में खेती के लिए भी मंजूरी मिल गई है.
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना के तहत विकसित इस किस्म को आधिकारिक तौर पर CoSha 17231 (कोयंबटूर-शाहजहांपुर) नाम दिया गया है.
इसके ब्रीडर डॉ. अरविंद कुमार ने बताया कि यह किस्म गन्ने की फसल के लिए एक बड़े खतरे, रेड रॉट बीमारी के प्रति प्रतिरोधी है, और इसकी औसत पैदावार क्षमता 86.35 टन प्रति हेक्टेयर है, जिसमें चीनी रिकवरी (गन्ने में पोल प्रतिशत) 13.97 प्रतिशत है.
वरिष्ठ वैज्ञानिक अजय तिवारी ने कहा कि यह नई किस्म किसानों की आय में काफी बढ़ोतरी करेगी और साथ ही चीनी उत्पादन को भी बढ़ाएगी.
अधिकारियों ने बताया कि इस किस्म का नाम 1925 की काकोरी ट्रेन कार्रवाई के मुख्य व्यक्ति क्रांतिकारी राम प्रसाद बिस्मिल के सम्मान में 'बिस्मिल' रखा गया है, ताकि भारत के स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान को याद किया जा सके.
विस्तार अधिकारी संजीव पाठक ने कहा कि इस किस्म के बीज पहले ही उत्तर प्रदेश के सभी 42 गन्ना उगाने वाले जिलों में बांटे जा चुके हैं, और इसके नतीजे खुश करने वाले रहे हैं.
शुक्ला ने कहा कि ICAR ने हाल ही में 25 फसलों की 184 नई किस्मों को मंजूरी दी है, जिसमें CoSha 17231 भी शामिल है, जो इसकी वैज्ञानिक योग्यता और संभावित प्रभाव को दिखाता है.
इस साल गन्ने की खेती के रकबे में थोड़ी कमी के बावजूद उत्तर प्रदेश चीनी उत्पादन में अपनी मजबूत हिस्सेदारी रखे हुए है. इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (ISMA) की ओर से जारी शुरुआती अनुमानों के अनुसार, 2025-26 के पेराई सीजन में उत्तर प्रदेश का चीनी उत्पादन लगभग 2 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है, जो पिछले साल के 101 लाख मीट्रिक टन (LMT) की तुलना में बढ़कर लगभग 103 लाख मीट्रिक टन हो जाएगा.
उत्तर प्रदेश में गन्ने का रकबा 2024-25 में 23.3 लाख हेक्टेयर से घटकर इस सीजन में 22.57 लाख हेक्टेयर हो गया. फिर भी, बेहतर बीमारी मैनेजमेंट, ज्यादा पैदावार वाली गन्ने की किस्मों की शुरुआत और समय पर खेतों में दखल देने की वजह से फसल की सेहत के इंडिकेटर्स में काफी सुधार हुआ.