Zaid Sowing: जायद फसलों की बुवाई में तेजी, दलहन-तिलहन में बढ़ोतरी, धान का ऐसा है हाल

Zaid Sowing: जायद फसलों की बुवाई में तेजी, दलहन-तिलहन में बढ़ोतरी, धान का ऐसा है हाल

ग्रीष्मकालीन यानी जायद फसलों की बुवाई ने इस बार रफ्तार पकड़ ली है. मूंगफली, मक्का और दालों के बढ़ते रकबे से खरीफ दाल उत्पादन में आई गिरावट की भरपाई की उम्मीद बन रही है. बेहतर जलस्तर और बढ़ता क्षेत्रफल इस सीजन को अहम बना रहा है.

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क‍िसान तक
  • Noida,
  • Feb 19, 2026,
  • Updated Feb 19, 2026, 4:00 PM IST

रबी सीजन के बाद अब ग्रीष्मकालीन यानी जायद फसलों की बुवाई ने इस बार शुरुआती बढ़त बना ली है. मूंगफली और मक्का के रकबे में इजाफे से कुल जायद क्षेत्रफल पिछले साल के मुकाबले आगे निकल गया है, जिससे कमजोर खरीफ दाल उत्पादन की आंशिक भरपाई की संभावना बन रही है. कृषि मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, 13 फरवरी तक जायद फसलों की बुवाई 15.18 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई, जो पिछले साल की समान अवधि के 14.75 लाख हेक्टेयर से करीब 3 प्रतिशत ज्यादा है. 

धान का रकबा घटा, मोटे अनाज की बुवाई तेज

कृषि मंत्रालय की साप्ताहिक बुवाई रिपोर्ट के अनुसार, इस बार जायद धान का रकबा 2.7 प्रतिशत घटकर 12.80 लाख हेक्टेयर रह गया है, जो पिछले साल 13.16 लाख हेक्टेयर था. वहीं, मोटे अनाजों का क्षेत्रफल बढ़कर 82 हजार हेक्टेयर हो गया है, जबकि साल भर पहले यह 50 हजार हेक्टेयर था. इनमें मक्का का रकबा 0.63 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जो पिछले साल 0.48 लाख हेक्टेयर था. ज्वार 0.03 लाख हेक्टेयर, रागी 0.09 लाख हेक्टेयर और बाजरा 0.06 लाख हेक्टेयर में बोया गया है.

दहलन के मोर्चे पर हल्‍की बढ़त

दालों के मोर्चे पर जायद बुवाई में हल्की मजबूती दिखी है. कुल जायद दाल क्षेत्र 0.58 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले साल 0.50 लाख हेक्टेयर था. इसमें मूंग की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा 0.44 लाख हेक्टेयर रही, जबकि उड़द का रकबा 0.10 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया. 

मध्य प्रदेश, बिहार, ओडिशा, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और गुजरात जायद दालों के प्रमुख उत्पादक राज्य माने जाते हैं. जानकारों के मुताबिक, खरीफ दालों में गिरावट के समय जायद दालें आपूर्ति संतुलन में अहम भूमिका निभाती हैं. 2025-26 में खरीफ दाल उत्पादन 7.41 मिलियन टन रहने का अनुमान है, जो 2024-25 के 7.73 मिलियन टन से कम है.

तिलहन की बुवाई में भी तेजी

ति‍लहन फसलों में भी तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है. जायद ति‍लहन का रकबा 0.99 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो पिछले साल 0.59 लाख हेक्टेयर था. इसमें मूंगफली 0.87 लाख हेक्टेयर, जबकि सूरजमुखी और तिल दोनों 0.06-0.06 लाख हेक्टेयर में बोए गए हैं.

बीते पांच सालों में जायद फसलों का औसत रकबा 75.37 लाख हेक्टेयर रहा है, जबकि 2024-25 में यह रिकॉर्ड 83.92 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया था. इसी साल कुल खाद्यान्न उत्पादन 357.73 मिलियन टन में जायद फसलों का योगदान 19.11 मिलियन टन यानी करीब 5.3 प्रतिशत था.

तालाबों में जलस्‍तर पिछले सालों से ज्‍यादा

इस बार जायद सीजन की बुवाई रफ्तार में इसलिए भी है, क्योंकि इस समय जलाशयों में जलस्तर साल भर पहले के मुकाबले ज्‍यादा है. जायद फसलें रबी कटाई के बाद और खरीफ बुवाई से पहले उगाई जाती हैं. कुछ साल पहले तक इनका आंकड़ा खरीफ या रबी में ही जोड़ा जाता था, लेकिन अब इन्हें अलग श्रेणी में दर्ज किया जा रहा है.

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