Mango bagging: अब हर आम बिकेगा खास दाम पर, बैगिंग तकनीक से होगा जहर-मुक्त और चमकदार फल

Mango bagging: अब हर आम बिकेगा खास दाम पर, बैगिंग तकनीक से होगा जहर-मुक्त और चमकदार फल

इस समय आम के बाग में बौर आ रहे हैं. आने वाले दिनों में पेड़ों पर फल बनेंगे, लेकिन अक्सर कीटों, बीमारियों और तेज धूप की वजह से फलों पर दाग-धब्बे पड़ जाते हैं और वे बेरंग दिखने लगते हैं, जिसके कारण बाजार में किसानों को उनकी मेहनत का सही दाम नहीं मिल पाता. इस समस्या का सबसे आसान समाधान है 'फ्रूट बैगिंग', जो आम को जहरीले कीटनाशकों से बचाकर उसे पूरी तरह सुरक्षित और जहर-मुक्त बनाती है.

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जेपी स‍िंह
  • नई दिल्ली,
  • Feb 19, 2026,
  • Updated Feb 19, 2026, 2:06 PM IST

आम की बागवानी से निर्यात और घरेलू बाजारों में अधिक और प्रीमियम दाम पाने के लिए फलों की गुणवत्ता सबसे अहम होती है. फ्रूट बैगिंग' यानी फलों को बैग में ढकना एक क्रांतिकारी तकनीक के रूप में उभरी है. यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें पेड़ पर लगे हर फलों को कागज, प्लास्टिक या कपड़े के बैग से ढक दिया जाता है. यह तकनीक न केवल फल को बाहरी कीटों और बीमारियों से बचाती है, बल्कि उसके चारों ओर बेहतर वातावरण भी बनाती है. विशेष रूप से आम जैसे फलों के लिए, यह विधि फलों के छिलका के रंग में सुधार करने, दाग-धब्बों को कम करने और उन्हें बाजार के लिए बेहद आकर्षक बनाने में सहायक है. आज के समय में जब उपभोक्ता रसायनों से मुक्त और स्वच्छ फलों की मांग कर रहे हैं, तो बैगिंग एक ऐसी स्थायी कृषि पद्धति बन गई है जो किसान की लागत घटाकर उनकी इनकम बढ़ाने में सक्षम है. 

आम में कीटनाशक घटाएं, फलों की क्वालिटी बढ़ाएं

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार आम के बागों में बैगिंग नहीं की जाती है, तो फल सीधे प्रकृति और कीटों के संपर्क में रहते हैं, जिससे उनकी गुणवत्ता बुरी तरह प्रभावित होती है. बिना बैगिंग के फलों पर फ्रूट फ्लाई कीट और एंथ्रेकनोज जैसी बीमारियों का प्रकोप अधिक होता है. इससे रासायनिक दवाओं का  प्रयोग होता है, जिससे किसानों की लागत बढ़ने के साथ कीटनाशक छिड़काव से फलों की क्वालिटी खराब होती है.

इसके अलावा अधिक धूप के कारण फलों का छिलका खराब हो जाता है जिससे उनका बाजार मूल्य गिर जाता है. ओलावृष्टि, भारी बारिश और तेज हवाओं के कारण फल आपस में टकराकर चोटिल हो जाते हैं या उन पर खरोंचें आ जाती हैं. पक्षियों द्वारा फलों को चोंच मारना भी एक बड़ी समस्या है.  

आम बाग में इस समय करें बैगिंग 

बैगिंग न होने से किसानों को इन समस्याओं से निपटने के लिए भारी मात्रा में कीटनाशकों का छिड़काव करना पड़ता है, जिससे न केवल लागत बढ़ती है, बल्कि फलों में रासायनिक अवशेष रह जाने का खतरा भी बना रहता है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है. आम में बैगिंग का सही समय बहुत महत्वपूर्ण है. आमतौर पर आम के फलों में कटाई से लगभग 30 दिन पहले बैगिंग की जानी चाहिए. कुछ किस्मों में यह काम फल के 'गोल्फ बॉल' (छोटे आकार) के होने पर भी किया जाता है.

उदाहरण के लिए, आम की 'कीट' किस्म में कटाई से 100 दिन पहले ही सफेद कागज के बैग लगा दिए जाते हैं ताकि बीमारियों को रोका जा सके. सही समय पर बैगिंग करने से फल के वजन और उसकी बनावट में सुधार होता है.

इस तरीके से करें बैगिंग  

बैगिंग के लिए मुख्य रूप से भूरे कागज, सफेद कागज, या कपड़े के बैग का इस्तेमाल होता है. प्रक्रिया बहुत सरल है: सबसे पहले स्वस्थ फल चुनें और बैग को उसके ऊपर सावधानी से चढ़ाएं. इसके बाद बैग के ऊपरी हिस्से को टहनी के साथ धागे या क्लिप से अच्छी तरह बांध दें ताकि हवा या बारिश से बैग गिरे नहीं. यह ध्यान रखना जरूरी है कि बैग फटे न हों और वे फल को पूरी तरह से ढक लें.

फल की क्वालिटी और कमाई दोगुनी 

फ्रूट बैगिंग से फल ज्यादा मीठे, स्वादिष्ट और बेहतर पोषण वाले बनते हैं. बैग के अंदर फल एक समान रूप से पकते हैं, जिससे उन्हें तोड़ना और बेचना आसान होता है. कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि बैगिंग वाले फल बिल्कुल साफ और दाग-रहित होते हैं, जिन्हें प्रीमियम मार्केट या विदेशों में बेचकर किसान ₹25,000 प्रति टन तक अधिक मुनाफा कमा सकते हैं.

साथ ही, बैगिंग से फलों की 'शेल्फ लाइफ' बढ़ती है, जिससे वे जल्दी खराब नहीं होते और दूर की मंडियों तक आसानी से भेजे जा सकते हैं. इस तकनीक की जानकारी के लिए सीआईएसएच, लखनऊ के वैज्ञानिकों से सम्पर्क कर सकते हैं.

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