
इंडिया टुडे किसान तक से छत्तीसगढ़ के कृषि औऱ पशुपालन मंत्री ने बताया कि अब छत्तीसगढ़ केवल धान पर नहीं, बल्कि अब कृषि विविधीकरण की तरफ तेजी से बढ़ रहा है.अब धान के साथ-साथ अब तेजी से किसानों की आमदनी बढ़ाने औऱ राज्य को तिलहन और दलहन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार औऱ केन्द्र सरकार मिलकर तेजी से काम कर रहे हैं.इसके लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने किसानों के लिए दूसरी फसलों औऱ पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए कई बेहतरीन स्कीम और आर्थिक सहायता दे रही है. राज्य की खेती में एक बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जिसका सीधा मकसद किसानों की माली हालत को बेहतर करना है. इसी विषय पर आगे बात करते हुए, कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने बताया कि सरकार की पूरी कोशिश है कि किसान पुरानी रिवायती खेती से बाहर निकलें और मुनाफे वाले नए विकल्पों को अपनाएं ताकि उनकी तरक्की मुमकिन हो सके.
किसानों को दलहन और तिलहन की तरफ मोड़ने के लिए सरकार अपना खजाना पूरी तरह से खोल रही है. कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने बताया कि कृषक उन्नति योजना के तहत जो किसान धान की जगह दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो, कुटकी या कपास जैसी वैकल्पिक फसलें उगाएंगे, उन्हें प्रति एकड़ पंद्रह हजार रुपये तक की शानदार आदान सहायता राशि दी जाएगी.यह पूरी रकम सीधे किसानों के बैंक खाते में ट्रांसफर की जाएगी, ताकि बिचौलियों का खेल हमेशा के लिए खत्म हो सके. इसका अहम मकसद मिट्टी की ताकत और उपजाऊपन बढ़ाना, पानी बचाना और किसानों की जेब में ज्यादा मुनाफा पहुंचाना है. इसके साथ ही, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के तहत किसानों को मुफ्त में उन्नत मिनीकिट बीज किसानों को अरहर, मूंग और उड़द के बीज बांटे गए हैं, ताकि उनकी पैदावार में भारी इजाफा हो
छत्तीसगढ़ सरकार राज्य में तिलहन उत्पादन बढ़ाने और धान पर निर्भरता कम करने के लिए 'ऑयल पाम' की खेती को बड़े पैमाने पर प्रमोट कर रही है. कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने बताया कि ऑयल पाम एक ऐसा फायदेमंद विकल्प है जो किसानों को लगभग तीस सालों तक लगातार भारी मुनाफा दे सकता है. इसमें बीमारियों का खतरा भी बहुत कम होता है. सरकार केंद्र के सहयोग से इस पर भारी-भरकम सब्सिडी दे रही है. प्रति हेक्टेयर 143 पौधों के रोपण के लिए उनतीस हजार रुपये की शानदार सब्सिडी मिलती है. पहले से चौथे साल तक बाग के रखरखाव और खाद-उर्वरक के लिए भी सरकार मदद दे रही है. इसके अलावा ड्रिप सिंचाई, बोरवेल, पंप सेट और खेतों की बाड़बंदी के लिए भी बेहतरीन अनुदान मुहैया कराया जा रहा है, ताकि किसानों पर कोई अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े.
खेती के नए और मुनाफेदार विकल्पों की इस बेहतरीन मुहिम में अब मखाना भी शामिल हो गया है. राज्य में मखाना की खेती पर खास तवज्जो दी जा रही है, क्योंकि बाजार में इसकी मांग बहुत तेजी से बढ़ रही है. कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने बताया कि मखाना एक उच्च मूल्य वाली बेहद पौष्टिक फसल है, जो किसानों की किस्मत बदलने का पूरा माद्दा रखती है.उन्होंने विभागीय अधिकारियों को साफ निर्देश दिए हैं कि मखाने के सिर्फ उत्पादन पर ही नहीं, बल्कि इसके प्रसंस्करण, वैल्यू एडिशन, अच्छी ब्रांडिंग और मार्केटिंग पर भी पूरा फोकस रखा जाए। सरकार की योजना है कि इस काम में महिला स्व-सहायता समूहों की भागीदारी को और भी ज्यादा मजबूत किया जाए। नवाचार पर आधारित ऐसी खेती को बढ़ावा देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को यकीनन एक नई और मजबूत गति दी जाएगी.
खेती के साथ-साथ पशुपालन को भी एक फायदे का सौदा बनाने के लिए सरकार बड़े और अहम कदम उठा रही है. आवारा पशुओं की हिफाजत के लिए राज्य में 'सुरभि गौधाम योजना' शुरू की गई है. इस योजना की खूबियों पर बात करते हुए, कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने बताया कि राज्य के हर विकासखंड में दस-दस 'सुरभि गौधाम' स्थापित किए जा रहे हैं. इनका असली मकसद निराश्रित मवेशियों को एक महफूज ठिकाना देना, उनकी नस्ल सुधारना और गांवों में रोजगार के नए रास्ते खोलना है. हर एक गौधाम में करीब दो सौ गौवंशों के लिए शेड, बिजली और चारे का मुकम्मल इंतजाम होता है. सरकार इन गौवंशों के भरण-पोषण के लिए रोजाना के हिसाब से बेहतरीन आर्थिक मदद भी देती है, जो पहले साल दस रुपये से शुरू होकर चौथे साल तक पैंतीस रुपये प्रति पशु हो जाती है.
राज्य में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और पशुपालकों की माली हालत सुधारने के लिए 'गौ समृद्धि कार्य योजना' भी बहुत तेजी से लागू की गई है. कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने बताया कि राज्य में डेयरी फार्मिंग को एक बड़े और मुनाफे वाले बिजनेस के तौर पर विकसित किया जा रहा है. राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड की मदद से उन्नत और संकर नस्ल के मवेशी बांटे जा रहे हैं. अगर कोई भी किसान या युवा अपना डेयरी फार्म खोलना चाहता है, तो उसे सरकार भारी सब्सिडी दे रही है. सामान्य वर्ग के लोगों को प्रोजेक्ट लागत का पचास प्रतिशत तक का अनुदान मिलता है, जबकि एससी/एसटी वर्ग को 66 प्रतिशत तक की भारी सब्सिडी दी जा रही है. इन तमाम कोशिशों से यह बिल्कुल साफ है कि छत्तीसगढ़ अब खेती और पशुपालन दोनों क्षेत्रों में तरक्की की नई इबारत लिख रहा है.