
लद्दाख के लेह जिले के चोगलामसर में देश की सबसे ऊंचाई पर व्यावसायिक लिली (लिलियम) फूलों की खेती की शुरुआत हो गई है. सिंधु नदी के किनारे करीब 93 हजार वर्गमीटर क्षेत्र में विकसित किए जा रहे इस फ्लोरीकल्चर पार्क में पिछले तीन दिनों के दौरान 50 हजार से अधिक प्रीमियम लिलियम बल्ब लगाए गए हैं. सितंबर के पहले हफ्ते तक यहां पहली बार फूल खिलने की उम्मीद है. लगभग 3265 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह परियोजना उत्तराखंड के माना स्थित 3200 मीटर ऊंचे फूल क्षेत्र से भी आगे निकल जाएगी.
सीएसआईआर-हिमालयन बायोरिसोर्स टेक्नोलॉजी संस्थान (CSIR-IHBT), पालमपुर इस प्रोजेक्ट को वैज्ञानिक और तकनीकी सहयोग दे रहा है. चोगलामसर फ्लावर फील्ड की आधारशिला 22 जून को लद्दाख के उप राज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने रखी थी. प्रोजेक्ट का उद्देश्य लद्दाख को हाई क्वालिटी फूलों के उत्पादन का प्रमुख केंद्र बनाना, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक इसकी पहुंच मजबूत करना है.
पहले साल में कृषि विभाग इस पूरे फूल क्षेत्र का विकास करेगा और फूल खिलने के बाद इसे स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और सहकारी समितियों को सौंप देगा. विभाग शुरुआती चरण में उत्पादन और मार्केटिंग दोनों में इन समूहों का मार्गदर्शन करेगा, ताकि किसानों को बेहतर मूल्य मिल सके. अगले साल से सहकारी समितियां खुद व्यावसायिक खेती, कटाई और वैल्यू एडिशन का काम संभालेंगी. इसके लिए स्थानीय किसानों और युवाओं को आधुनिक फ्लोरीकल्चर तकनीकों की ट्रेनिंग भी दी जा रही है.
लद्दाख की जलवायु लिलियम की खेती के लिए बेहद अनुकूल मानी जाती है. यह पौधा माइनस 4 डिग्री से लेकर 4 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में बेहतर प्रदर्शन करता है. इसकी एक बड़ी विशेषता यह भी है कि लगभग तीन साल बाद इसके बल्ब प्राकृतिक रूप से बढ़ने लगते हैं, जिससे बिना अतिरिक्त निवेश के उत्पादन और किसानों की आय दोनों में बढ़ोतरी हो सकती है.
लिलियम दुनिया के सबसे लोकप्रिय कट फ्लावर में शामिल है और इसकी मांग फूल उद्योग और होटल सेक्टर में लगातार बनी रहती है. घरेलू खुदरा बाजार में इसकी प्रीमियम किस्मों की कीमत 150 से 200 रुपये प्रति स्टिक तक पहुंचती है. प्रशासन का लक्ष्य इस परियोजना के जरिए लद्दाख के किसानों, महिलाओं और युवाओं के लिए आय का स्थायी सोर्स तैयार करना है. इसके साथ ही चोगलामसर का यह फ्लोरीकल्चर पार्क पर्यटन के लिए भी एक नया आकर्षण बनने की उम्मीद है. (एएनआई)