
देश में रबी फसलों की बुवाई ने रफ्तार पकड़नी शुरू कर दी है, लेकिन शुरुआती आंकड़े पिछले साल की तुलना में कमजोर तस्वीर दिखा रहे हैं. कृषि विभाग के 16 अक्टूबर 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, देश में कुल 3.43 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रबी फसलों की बुवाई हुई है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 4.65 लाख हेक्टेयर था. यानी कुल बुवाई क्षेत्र में 1.22 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है.
रबी सीजन की प्रमुख फसल गेहूं की बुवाई अभी शुरू नहीं हुई है. वहीं धान और तिलहन फसलों के रकबे में गिरावट देखने को मिली है. इसके विपरीत दलहन और कुछ मोटे अनाजों की बुवाई में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
देश में गेहूं का सामान्य रबी क्षेत्र 315.24 लाख हेक्टेयर है, लेकिन 16 अक्टूबर तक इसकी बुवाई शुरू नहीं हुई थी. आमतौर पर उत्तर भारत के प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में बुवाई अक्टूबर के आखिरी सप्ताह या नवंबर से शुरू होती है.
रबी धान की बुवाई 0.88 लाख हेक्टेयर में हुई है, जो पिछले साल के 1.34 लाख हेक्टेयर से 0.46 लाख हेक्टेयर कम है. फिलहाल केरल और तमिलनाडु में धान की बुवाई शुरू हुई है. शुरुआती चरण में धान का रकबा कम रहना कुल बुवाई क्षेत्र में गिरावट का एक बड़ा कारण माना जा रहा है.
दलहन फसलों का कुल रकबा 0.15 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष के 0.10 लाख हेक्टेयर से 0.05 लाख हेक्टेयर अधिक है.
श्री अन्न (मोटा अनाज) श्रेणी में 0.11 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई हुई है, जो पिछले वर्ष के 0.10 लाख हेक्टेयर से थोड़ा अधिक है.
ज्वार की बुवाई जम्मू-कश्मीर, असम और राजस्थान में शुरू हो चुकी है, जबकि मक्का की बुवाई कर्नाटक में और जौ की बुवाई राजस्थान में शुरू हुई है.
रबी सीजन की शुरुआती रिपोर्ट में सबसे ज्यादा चिंता तिलहन फसलों के क्षेत्र को लेकर है. तिलहनों की बुवाई 2.29 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 3.11 लाख हेक्टेयर थी. यानी 0.82 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है.
तिलहनों में सबसे बड़ी फसल रेपसीड-सरसों है. इसकी बुवाई 2.26 लाख हेक्टेयर में हुई है, जो पिछले साल के 3.10 लाख हेक्टेयर से 0.84 लाख हेक्टेयर कम है.
सरसों की बुवाई मुख्य रूप से तमिलनाडु में शुरू हुई है. आने वाले सप्ताहों में राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे बड़े उत्पादक राज्यों में बुवाई बढ़ने की उम्मीद है.
मूंगफली की बुवाई 0.03 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले वर्ष यह 0.01 लाख हेक्टेयर थी. यानी इसमें 0.02 लाख हेक्टेयर की वृद्धि दर्ज की गई है.
हालांकि कुसुम, सूरजमुखी, तिल और अलसी जैसी अन्य तिलहन फसलों की बुवाई अभी शुरू नहीं हुई है या बहुत सीमित स्तर पर है.
रिपोर्ट के अनुसार केरल, तमिलनाडु, राजस्थान, कर्नाटक, जम्मू-कश्मीर, असम, नागालैंड, मिजोरम और सिक्किम जैसे राज्यों में विभिन्न रबी फसलों की बुवाई शुरू हो चुकी है. हालांकि उत्तर भारत के प्रमुख कृषि राज्यों में अभी बड़े पैमाने पर बुवाई शुरू नहीं हुई है, इसलिए अगले कुछ हफ्तों में रकबे में तेजी आने की संभावना है.
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि रबी सीजन अभी शुरुआती चरण में है और गेहूं, सरसों और चना जैसी प्रमुख फसलों की बुवाई नवंबर में गति पकड़ती है. इसलिए वर्तमान आंकड़ों को शुरुआती संकेत माना जा रहा है. फिर भी तिलहन और धान के कम रकबे पर नजर रखना जरूरी होगा, क्योंकि इसका असर आगे उत्पादन पर पड़ सकता है.