मूंग पर जहरीले केमिकल का खतरा, किसान महापंचायत ने सरकार से की तत्काल बैन करने की मांग

मूंग पर जहरीले केमिकल का खतरा, किसान महापंचायत ने सरकार से की तत्काल बैन करने की मांग

किसान महापंचायत ने मूंग की फसल में इस्तेमाल हो रहे एक जहरीले खरपतवारनाशी पर रोक लगाने की मांग उठाई है. संगठन का कहना है कि इससे किसानों की आय और बाजार में मांग पर असर पड़ सकता है, इसलिए सरकार को तुरंत निर्णय लेना चाहिए.

Moong Crop Chemical Ban DemandMoong Crop Chemical Ban Demand
क‍िसान तक
  • Noida,
  • May 09, 2026,
  • Updated May 09, 2026, 4:29 PM IST

देश के कुल दलहन उत्‍पादन में अहम स्‍थान रखने वाली मूंग फसल को लेकर राजस्‍थान में एक बड़ी मांग उठी है. किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा को ज्ञापन भेजकर ‘पैराक्वाट डाइक्लोराइड’ नाम के खरपतवारनाशी पर तुरंत प्रतिबंध लगाने की मांग की है. संगठन का कहना है कि राज्‍य में कटाई के समय मूंग को एक साथ सुखाने के लिए इस केमिकल के इस्तेमाल की आशंका है, जो सीधे तौर पर आम लोगों की सेहत और किसानों के ‘बाजार’ दोनों के लिए खतरा बन सकता है.

इतना खतरनाक है पैराक्वाट डाइक्लोराइड खरपतवारनाशी

किसान महापंचायत ने ज्ञापन में कहा है कि पैराक्वाट डाइक्लोराइड एक बेहद विषैला केमिकल है. इसके संपर्क से फेफड़े, किडनी और लिवर को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है और कैंसर जैसी बीमारियों की आशंका भी रहती है. किसान महापंचायत ने इसे मानव जीवन के लिए घातक बताते हुए इसके उपयोग पर तुरंत रोक लगाने की मांग उठाई है. साथ ही यह भी सवाल उठाया कि दूसरे राज्यों ने इस पर प्रतिबंध के लिए कदम उठाया है तो यहां क्यों देरी की जा रही है?

इन राज्‍यों में लग चुका है बैन: किसान महापंचायत

किसान संगठन ने सरकार के सामने उदाहरण रखते हुए कहा कि तेलंगाना में इसकी बिक्री पर रोक लग चुकी है. ओडिशा में वर्ष 2023 में ही प्रतिबंध लागू हो चुका है. मध्य प्रदेश में भी इसके चलते बाजार में लोगों का भरोसा डगमगाया है. जायद मूंग की फसल में इसके दुष्प्रभाव सामने आए हैं. इसके बाद उपभोक्ता ऐसी मूंग खरीदने से बचने लगे हैं. इससे साफ है कि अगर इस खतरनाक केमिकल पर रोक नहीं लगी तो मूंग की मांग और कीमत दोनों प्रभावित हो सकती हैं.

'राजस्थान के किसानों पर होगा सीधा असर'

किसान महापंचायत ने कहा कि राजस्थान देश में मूंग उत्पादन में पहले स्थान पर है और कुल उत्पादन का लगभग 50 प्रतिशत यहीं होता है. ऐसे में अगर इस केमिकल के कारण मूंग की छवि प्रभावित होती है तो इसका सीधा असर किसानों की आय पर पड़ेगा. इससे मांग में गिरावट का खतरा, दाम घटने की आशंका, बाजार में भरोसा कमजोर होने जैसे स्थित‍ि बनेगी, जो सीधे तौर पर किसानों की आर्थिक सुरक्षा से जुड़ा विषय है.

पहले अस्थायी बैन और आगे स्थायी रोक की मांग

किसान महांपचायत ने ज्ञापन में सुझाव दिया है कि राज्य सरकार पहले 60 दिन का प्रतिबंध लागू करे, फिर इसे 90 दिन तक बढ़ाए. साथ ही यह भी मांग की है कि वह स्थायी प्रतिबंध के लिए केंद्र सरकार को भी इस बारे में प्रस्ताव भेजे. संगठन का कहना है कि जायद की कटाई और खरीफ बुवाई का समय नजदीक है इसलिए फैसले में देरी नुकसानदायक होगी.

‘केमिकल फ्री’ मूंग की ब्रांडिंग पर जोर दे राजस्‍थान: रामपाल जाट

किसान महापंचायत ने सुझाव दिया है कि राजस्थान की मूंग को कीट और खरपतवारनाशी मुक्त बनाकर ब्रांडिंग की जाए. इससे उपभोक्ताओं को सुरक्षित और गुणवत्तायुक्त दाल मिलेगी और किसानों को बेहतर दाम मिल सकेंगे. रामपाल जाट ने कहा कि जन स्वास्थ्य और किसानों के हितों को देखते हुए पैराक्वाट डाइक्लोराइड पर तुरंत प्रतिबंध जरूरी है. उन्होंने राज्य सरकार से अपील की है कि समय रहते निर्णय लेकर मूंग की गुणवत्ता और किसानों की आय दोनों की रक्षा सुनिश्चित की जाए.

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