सीताफल ने बदली तकदीर!आम,लीची,केला,सेब, संतरा और भी कई सारे फल हैं जिसे लोग रोज खाना पसंद करते हैं. लेकिन इन दिनों बाजार में सीताफल की मांग लगातार बढ़ती आजकल शादी और दूसरे बड़े कार्यक्रमों में सीताफल से बनी मिठाइयों की मांग बहुत बढ़ गई है. खासकर सीताफल रबड़ी लोगों को बहुत पसंद आ रही है. यही कारण है कि अब सीताफल का इस्तेमाल सिर्फ उसके मौसम में ही नहीं, बल्कि पूरे साल किया जा रहा है. इसके लिए सीताफल के गूदे यानी पल्प को सुरक्षित रखा जाता है ताकि बाद में भी उससे स्वादिष्ट चीजें बनाई जा सकें.
मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में उगने वाला सीताफल अब लोगों के लिए सिर्फ एक फल नहीं रहा, बल्कि कमाई का अच्छा साधन बन गया है. यहां की महिलाएं स्व-सहायता समूह बनाकर सीताफल का काम कर रही हैं और अपनी जिंदगी बदल रही हैं.
सिवनी जिले के जंगलों में सीताफल बहुत मात्रा में पाया जाता है. पहले यह फल जंगलों में ऐसे ही खराब हो जाता था, लेकिन अब महिलाएं इसे इकट्ठा करके उससे अलग-अलग चीजें बना रही हैं. महिलाएं सीताफल की सफाई, पैकिंग और बेचने का काम कर रही हैं.
छपारा विकासखंड के खेरमटाकोल गांव की महिलाओं ने बताया कि समूह से जुड़ने के बाद उन्हें नियमित काम मिलने लगा है. पहले कई महिलाएं आर्थिक परेशानी में रहती थीं, लेकिन अब उनकी आय बढ़ गई है. अब वे अपने बच्चों की पढ़ाई और घर के खर्च में मदद कर पा रही हैं.
सिवनी का सीताफल अपने मीठे स्वाद के लिए बहुत मशहूर हो रहा है. यही वजह है कि इसकी मांग अब सिर्फ गांव या जिले तक सीमित नहीं है. यह फल और उससे बने उत्पाद भोपाल, इंदौर, नागपुर जैसे बड़े शहरों के साथ-साथ छत्तीसगढ़ तक भेजे जा रहे हैं.
महिलाएं सीताफल की अच्छी पैकिंग करती हैं ताकि फल और उसका पल्प लंबे समय तक सुरक्षित रहे. लोगों को इसका स्वाद इतना पसंद आ रहा है कि बड़े शहरों में भी इसकी मांग लगातार बढ़ रही है.
सीताफल का मौसम कुछ ही महीनों का होता है, लेकिन अब इसे पूरे साल इस्तेमाल करने के लिए पल्प तैयार किया जाता है. जिले में दो खास मशीनों वाली इकाइयां बनाई गई हैं जहां सीताफल के गूदे को ठंडे तापमान में सुरक्षित रखा जाता है.
इससे शादी, पार्टी और बाजार की जरूरत के अनुसार सालभर सीताफल रबड़ी और दूसरी मिठाइयां बनाई जा सकती हैं. इससे महिलाओं को हर मौसम में काम मिलता है और उनकी कमाई भी बनी रहती है.
महिला समूहों से जुड़ी कई महिलाएं अब हर साल एक से डेढ़ लाख रुपये तक कमा रही हैं. पहले जो महिलाएं घर तक सीमित थीं, अब वे अपने पैरों पर खड़ी हो रही हैं. इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हुई है.
महिलाओं को काम करने के साथ-साथ नई चीजें सीखने का मौका भी मिला है. उन्हें ग्रेडिंग, पैकिंग और सामान बेचने की ट्रेनिंग दी गई है. इससे वे अपना काम और अच्छे तरीके से कर पा रही हैं.
सिवनी के सीताफल को “एक जिला एक उत्पाद” योजना में भी शामिल किया गया है. इससे इस फल को नई पहचान मिली है. अधिकारियों का कहना है कि सिवनी की जलवायु सीताफल के लिए बहुत अच्छी है, इसलिए यहां का फल ज्यादा मीठा और स्वादिष्ट होता है.
अब सिवनी जिले की महिलाएं अपने मेहनत और हौसले से आत्मनिर्भर बन रही हैं. सीताफल ने उनके जीवन में खुशियां और नई उम्मीदें ला दी हैं. यह काम अब दूसरे जिलों के लिए भी एक अच्छा उदाहरण बनता जा रहा है.
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