मुंबई में महंगा हुआ प्याज, ग्राहकों ने घटाई खरीदारी... व्यापारियों का कारोबार 30% तक प्रभावित

मुंबई में महंगा हुआ प्याज, ग्राहकों ने घटाई खरीदारी... व्यापारियों का कारोबार 30% तक प्रभावित

महाराष्ट्र में प्याज की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने आम उपभोक्ताओं की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है. मुंबई समेत कई शहरों में प्याज महंगा होने से मांग प्रभावित हुई है और थोक कारोबारियों का व्यापार 20 से 30 फीसदी तक घटने का दावा है. व्यापारी कम आवक और बढ़ती महंगाई को इसकी वजह बता रहे हैं, जबकि आम लोग सरकार से कीमतों पर नियंत्रण की मांग कर रहे हैं.

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क‍िसान तक
  • मुंबई/नासिक/अहमदाबाद,
  • Aug 25, 2026,
  • Updated Aug 25, 2026, 1:33 PM IST

मुंबई समेत पूरे महाराष्ट्र में प्याज के दामों ने खरीदारों को रुला दिया है. जिस प्याज को कभी गरीब की थाली का सहारा माना जाता था, आज वही प्याज जेब पर भारी पड़ रहा है. बढ़ती कीमतों का असर सिर्फ ग्राहकों की रसोई पर नहीं, बल्कि होलसेल कारोबारियों के व्यापार पर भी साफ दिखाई दे रहा है. व्यापारियों का कहना है कि बढ़े हुए दामों की वजह से ग्राहक अब पहले के मुकाबले कम माल खरीद रहे हैं. इसका सीधा असर उनके कारोबार पर पड़ा है और करीब 20 से 30 प्रतिशत तक व्यापार प्रभावित होने की बात कही जा रही है.

व्यापारियों का आरोप-सरकार जिम्मेदार

चंद्रकांत मालुसरे, प्याज थोक व्यापारी ने कहा, "मुंबई में प्याज के दाम बढ़े हैं क्योंकि बाजार में आवक पहले के मुकाबले कम हो गई है. हालांकि कीमतें बढ़ने के बावजूद ग्राहक अब पहले जितनी मात्रा में खरीदारी नहीं कर रहे हैं. सरकार की नीतियों की वजह से आम लोगों पर बोझ बढ़ रहा है और लोगों की खरीदने की शक्ति प्रभावित हो रही है."

मोहम्मद अकरम, नींबू थोक व्यापारी ने कहा, "सरकार को जमीनी स्तर पर कारोबारियों और आम लोगों की समस्याओं को समझना चाहिए. एयर कंडीशनर वाले दफ्तरों में बैठकर हालात का सही अंदाजा नहीं लगाया जा सकता. महंगाई का सबसे ज्यादा असर गरीब और मध्यम वर्ग पर पड़ रहा है. लोगों की अपेक्षा है कि सरकार राहत देने वाले कदम उठाए और बाजार में कीमतों को नियंत्रित करे."

वहीं, आम लोग भी महंगे प्याज को लेकर सरकार से नाराज नजर आ रहे हैं. लोगों का कहना है कि महंगाई का बोझ लगातार उनकी जेब पर बढ़ रहा है. इसी नाराजगी के बीच एक महिला ने सरकार की लाडली बहन योजना पर तंज कसते हुए कहा कि, “लाडली बहन को 2000 रुपये देते हैं, लेकिन हमसे ही 5000 रुपये ले लेते हैं.” 

यानी सवाल सिर्फ प्याज की कीमत का नहीं है, सवाल उस आम आदमी की रसोई का है, जिसकी थाली में सब्जियां कम और महंगाई ज्यादा नजर आने लगी है. इसी बीच एक व्यापारी ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा—“जो अच्छे दिन चाहिए थे, वह यही हैं!”

कब मिलेगी महंगे प्याज से राहत

अब सवाल यही है कि प्याज के बढ़ते दामों से जनता को कब राहत मिलेगी? क्योंकि आंसू प्याज काटने से निकल रहे हैं या महंगाई से—ये फर्क करना अब मुश्किल होता जा रहा है.

दूसरी ओर, प्याज के सबसे ज्यादा उत्पादन वाले जिले नाशिक में दाम 40 रुपये किलो तक पहुंच गए हैं. एक ही दिन में सोमवार को दाम 5 से 8 रु किलो से बढ़ गए. यही प्याज थोक भाव में 60 रुपये किलो बिक रहा है. पिछला साल छोड़ दें तो बीते 5 सालों के अगस्त महीने में औसतन प्याज के भाव 30 रुपये के आसपास रहे. 2025 में यह भाव 15 से 20 रुपये किलो था. 

प्याज किसान मनोहर नागरे कहते हैं कि यूरिया की कीमत 350 रुपये प्रति बोरी हो गई है जो मार्च महीने के मुकाबले 50 रुपये महंगी है. प्याज उगाने की इस साल लागत प्रति क्विंटल 2500 रुपये हो गई है.

नासिक के किसानों की मानें तो अभी मिलने वाला दाम उचित है जिसमें किसानों को थोड़ा बहुत फायदा हो रहा है, नहीं तो पिछले साल नुकसान ही हुआ था. मई महीने में बेमौसम बरसात ने रबी प्याज का नुकसान किया था. स्टोरेज किया हुआ रबी प्याज का हर महीने वजन कम होता है, सड़न होती है, इसलिए 3 महीने में 30% ज्यादा उपज का नुकसान है. अभी भाव 30 रुपये के पार गए हैं, यह दाम पिछले कुछ महीनों के नुकसान की भरपाई करेंगे.

नेफेड, NCCF के कदम का विरोध

किसान संगठन के नेता भारत दिघोले कहते हैं कि जब प्याज नुकसान में बेचे तो कोई मदद नहीं मिली. अगर सरकार अब नियंत्रण लाने की कोशिश करेगी तो मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के किसानों के गुस्से का सामना उन्हें करना पड़ेगा. सरकार नेफेड और NCCF के भ्रष्टाचार को रोकती तो आज उनके पास पर्याप्त प्याज का भंडारण होता, जो वह कंज्यूमर को सस्ते दाम में बेच सकती थी. अब सरकार 2 लाख मीट्रिक टन प्याज जो NCCF और नेफेड के द्वारा मई महीने में सस्ते में खरीदी गई थी, अब मार्केट में लाने की तैयारी है. सरकार ने एजेंसियों के जरिये 12 रुपये किलो के रेट पर किसानों से प्याज खरीदे थे, जिसे मार्केट में उतारा जाएगा.

वहीं महाराष्ट्र राज्य के मार्केटिंग बोर्ड के पूर्व डायरेक्टर और लासलगांव मंडी के पूर्व अध्यक्ष जयदत्त होलकर ने कहा कि प्याज की बढ़ती कीमतों को देखते हुए सरकार 840 मीट्रिक टन प्याज को एक स्पेशल ट्रेन 'कांदा एक्सप्रेस' से दिल्ली भेजेगी, जिससे वहां कंज्यूमर को सस्ते दाम में प्याज मिलेगा. अगर प्याज अप्रैल में बेचा जाता तो उस वक्त 1500 रुपये भी दाम मिलते तो ठीक था. लेकिन अब किसान थोड़ा-थोड़ा प्याज मार्केट में उतार रहा है. डिमांड की वजह से साधारण प्याज का 30 रुपये और एक्सपोर्ट क्वालिटी को 40 रुपये भाव मिल रहे हैं. अब सरकार इसमें कोई खलल न डाले. 

जानकारों की मानें तो मंडी में प्याज की आवक अभी सामान्य है. प्याज की अचानक डिमांड क्यों बढ़ी और 15 दिन में दाम 50% क्यों बढ़ गए, इस पर सरकार को ध्यान देने की जरूरत है. यह भी सोचना होगा कि हर साल अगस्त में ही इस तरह प्याज के भाव में इतनी तेजी क्यों आती है. अगर जमाखोरी इसकी वजह है तो सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए और कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए.

गुजरात में भी तेजी से बढ़े दाम

देशभर में बीते एक हपते से लगातार प्याज की कीमतों में बढ़ौतरी हो रही है. अहमदाबाद में एक हपते पहले होलसेल मार्केट में प्याज की कीमत 35 रुपये प्रति किलो थी, वो आज 60 रुपये प्रति किलो तक जा पहुंची है. व्यापारियों के मुताबिक अगर यही स्थिति रही तो प्याज की कीमत 80 से 100 रुपये प्रति किलो तक जाने की आशंका है.

अहमदाबाद के पालड़ी में स्थित वेजिटेबल मार्केट के व्यापारी सुनीलभाई ने 'आजतक' से कहा, होलसेल बाजार में प्याज की कीमत रोजाना क्विंटल पर 300 से 500 रुपये तक बढ़ रही है. एक हपते पहले 3500 रुपये क्विंटल प्याज आ रहा था, अब 5500 रुपये तक कीमत जा पहुंची है. बढ़ती कीमतों की वजह को लेकर व्यापारी ने कहा, गुजरात में प्याज महाराष्ट्र के नासिक और मध्यप्रदेश से आता है. लेकिन बीते दिनों में हुई भारी बारिश की वजह से डिमांड एंड सप्लाई में बहुत बड़ी चुनौती खड़ी हुई है.

सरकार बाजार में बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण के अपने प्रयास कर रही है लेकिन संभव नहीं हो पा रहा. अगर यही हाल रहा तो प्याज की कीमत 80 से 100 रुपये तक पहुंचने की संभावना है. अगर प्याज की बात करें तो पहले APMC में प्याज की 60 गाड़िया आती थीं, वो घटकर 25 हो गई हैं जो कि बड़ी चुनौती है. सप्लाई घटना चिंता का विषय है.(मुबंई से दीपेश त्रिपाठी, नासिक से प्रवीण ठाकरे और अहमदाबाद से अतुल तिवारी की रिपोर्ट)

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