गंगा का बढ़ता पानी बना आफत, डूबी गांव की फसलें, चारे के लिए नाव पर निर्भर किसान

गंगा का बढ़ता पानी बना आफत, डूबी गांव की फसलें, चारे के लिए नाव पर निर्भर किसान

नवगछिया में गंगा नदी उफान पर है और राघोपुर में जलस्तर खतरे के निशान से 22 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया है. बाढ़ के पानी से खेतों में लगी फसल और सब्जियां डूब गई हैं. वहीं, मवेशियों के चारे का संकट भी गहरा गया है. ग्रामीण नाव के सहारे जरूरी सामान और चारा लाने को मजबूर हैं.

नवगछिया में बाढ़ का बढ़ता खतरानवगछिया में बाढ़ का बढ़ता खतरा
क‍िसान तक
  • Naugachia,
  • Aug 26, 2026,
  • Updated Aug 26, 2026, 11:26 AM IST

बिहार के नवगछिया में गंगा नदी पूरे उफान पर है. लगातार बढ़ते जलस्तर से जिले के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी फैल गया है. खेतों में पानी भरने से किसानों की खड़ी फसल और सब्जियां डूब गई हैं. इससे किसानों को भारी नुकसान की चिंता सताने लगी है. वहीं, बाढ़ के कारण मवेशियों के लिए चारे की व्यवस्था करना भी मुश्किल हो गया है. नवगछिया के राघोपुर में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया है. यहां गंगा के लिए खतरे का निशान 33.68 मीटर है, जबकि नदी का जलस्तर फिलहाल 33.90 मीटर दर्ज किया गया है. यानी गंगा खतरे के निशान से 22 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है.

जलस्तर बढ़ने के साथ आसपास के इलाकों में बाढ़ का खतरा भी बढ़ता जा रहा है. कई जगहों पर लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है और नाव के सहारे आने-जाने की मजबूरी बनी हुई है.

खेतों में डूबी फसल और सब्जियां

गंगा का पानी खेतों तक पहुंचने से किसानों की परेशानी सबसे ज्यादा बढ़ गई है. खेतों में लगी फसल और सब्जियां पानी में डूब चुकी हैं. जिन किसानों ने महीनों मेहनत करके फसल तैयार की थी, अब उन्हें उसके खराब होने का डर सता रहा है. किसानों का कहना है कि अगर गंगा का जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो आने वाले दिनों में नुकसान और बढ़ सकता है. खेती के साथ-साथ पशुपालन करने वाले परिवारों के सामने भी बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है.

मवेशियों के चारे का संकट

बाढ़ से घिरे इलाकों में मवेशियों के लिए चारा जुटाना मुश्किल हो गया है. कई जगहों पर नाव के जरिए पशुओं के लिए घास और चारा पहुंचाया जा रहा है. कुछ किसान खुद नाव से गंगा के दूसरी ओर जाकर सब्जियां और पशुओं के लिए चारा लेकर लौट रहे हैं. तेज बहाव के बीच नाव से सफर करना भी जोखिम भरा है. इसके बावजूद लोगों के पास फिलहाल दूसरा विकल्प नहीं है.

'गांव गंगा की धारा में कब समा जाए, कोई गारंटी नहीं'

किसान धर्मेंद्र मंडल ने बताया कि इलाके की स्थिति बेहद गंभीर है. उनके मुताबिक प्रशासन अपनी तरफ से लगातार काम कर रहा है और कुछ हद तक रोकथाम भी हो रही है, लेकिन लोगों की परेशानी कम नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा परेशानी किसानों को हो रही है. खेतों की फसल और सब्जियां प्रभावित हो चुकी हैं. पशुओं के लिए चारा और खाने-पीने की व्यवस्था करना भी मुश्किल हो गया है. ग्रामीणों के मन में हर समय यह डर बना हुआ है कि जिस जगह वे आज खड़े हैं, पता नहीं वह जगह कब गंगा की धारा में समा जाए. धर्मेंद्र मंडल के मुताबिक किसानों को अपनी जान जोखिम में डालकर नाव से गंगा के दूसरी ओर जाना पड़ रहा है. तेज बहाव के बीच नाव से सब्जियां और पशुओं के लिए घास लाना बेहद जोखिम भरा है. ग्रामीणों को हर समय किसी हादसे का डर बना रहता है.

राघोपुर में कटाव से भी बढ़ी चिंता

किसान बैजनाथ दास ने बताया कि राघोपुर में स्थिति गंभीर है और कई जगह कटाव की समस्या बनी हुई है. उन्होंने कहा कि लोगों को जानवरों के लिए चारा लाने और खेतों से सब्जियां लाने में काफी परेशानी हो रही है. बाढ़ के कारण सामान भी नाव के जरिए ही लाना-ले जाना पड़ रहा है.

नाव बनी लोगों की जिंदगी का सहारा

बाढ़ के पानी से घिरे इलाकों में नाव अब लोगों के लिए सड़क का विकल्प बन गई है. रोजमर्रा की जरूरतों का सामान लाने से लेकर पशुओं के लिए चारा जुटाने तक के लिए लोग नाव पर निर्भर हैं. गंगा का बढ़ता जलस्तर अब सिर्फ एक आंकड़ा नहीं रह गया है. इसका सीधा असर उन परिवारों की जिंदगी पर पड़ रहा है, जिनके घर और खेत पानी से घिर चुके हैं. किसी की महीनों की मेहनत पानी में डूब गई है तो कोई अपने मवेशियों को बचाने और उनके लिए चारे की व्यवस्था करने में जुटा है.

ग्रामीणों को पानी और बढ़ने का डर

नवगछिया के ग्रामीणों को अब सबसे ज्यादा चिंता इस बात की है कि गंगा का जलस्तर और न बढ़े. बच्चों, घर-गृहस्थी और मवेशियों को लेकर परिवारों की चिंता बढ़ती जा रही है. लोगों को उम्मीद है कि नदी का पानी जल्द स्थिर होगा और बाढ़ की स्थिति में सुधार आएगा. फिलहाल, गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर ने नवगछिया के राघोपुर समेत आसपास के इलाकों में लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. प्रशासन की ओर से राहत और बचाव के प्रयास जारी हैं, लेकिन किसानों और ग्रामीणों की नजर अब गंगा के जलस्तर पर टिकी हुई है. (सुजीत कुमार का इनपुट)

ये भी पढ़ें: 

गन्ना, शीरा और इथेनॉल उत्पादन में UP पूरे देश में नंबर-1, किसानों को हुआ 3.25 लाख करोड़ रुपये का भुगतान
8 लाख की मदद से बदली किस्मत! JCB और खाद की दुकान से आत्मनिर्भर बनीं रोशन आरा

MORE NEWS

Read more!