
बारिश की पहली फुहार के साथ ही खेतों में धान की तैयारियां भी तेज हो गई हैं. इन दिनों उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों के किसान सुगंधित काला नमक चावल की नर्सरी तैयार करने में जुटे हुए हैं. अपनी अनोखी खुशबू, बेहतरीन स्वाद और पोषक गुणों के कारण काला नमक धान की मांग देश ही नहीं, विदेशों में भी लगातार बढ़ रही है. ऐसे में अच्छी पैदावार और बेहतर क्वालिटी पाने के लिए नर्सरी की सही तैयारी बेहद जरूरी है. यदि किसान वैज्ञानिक तरीके से सही बीज दर, समय पर बुवाई और संतुलित खाद प्रबंधन अपनाते हैं, तो स्वस्थ पौधे तैयार होते हैं, जिससे रोपाई के बाद फसल की बढ़वार अच्छी होती है और उत्पादन के साथ मुनाफा भी बढ़ने की संभावना रहती है.
डॉ राम चेत चौधरी के मुताबिक, काला नमक धान की खेती के लिए प्रति हेक्टेयर 25 से 30 किलोग्राम बीज पर्याप्त माना जाता है, इसकी बुवाई खरीफ सीजन में की जाती है. वहीं, नर्सरी डालने का सबसे बेस्ट समय 15 जून से जुलाई के पहले सप्ताह तक माना जाता है. सामान्य परिस्थितियों में नर्सरी तैयार होने में करीब 30 दिन लगते हैं।. इसके बाद पौधे खेत में रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं. समय पर नर्सरी तैयार करने से पौध मजबूत बनती है और रोपाई के बाद उसकी बढ़वार भी अच्छी रहती है.
नर्सरी के लिए ऐसी जमीन चुनें, जहां पानी की निकासी अच्छी हो और सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हो. खेत की 2-3 बार अच्छी तरह जुताई करके उसे भुरभुरा बना लें. इसके बाद खेत को समतल कर छोटे-छोटे बेड तैयार करें, ताकि सिंचाई और जल निकासी में परेशानी न हो. एक हेक्टेयर मुख्य खेत के लिए लगभग 1000 वर्ग मीटर नर्सरी क्षेत्र पर्याप्त होता है. खेत तैयार करते समय प्रति 1000 वर्ग मीटर नर्सरी में लगभग 5 क्विंटल सड़ी हुई गोबर की खाद अच्छी तरह मिला दें. इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और पौधों की शुरुआती बढ़वार तेजी से होती है.
नर्सरी में पौधों को शुरुआती पोषण देने के लिए रासायनिक खाद का भी संतुलित उपयोग जरूरी है. प्रति 1000 वर्ग मीटर नर्सरी में लगभग 1.5 किलोग्राम नाइट्रोजन, 1.5 किलोग्राम फॉस्फोरस और 1.5 किलोग्राम पोटाश देना चाहिए. इन खादों को अंतिम जुताई के समय मिट्टी में अच्छी तरह मिला दें. यदि नर्सरी में पौधों की बढ़वार धीमी दिखाई दे तो 500 ग्राम यूरिया का छिड़काव किया जा सकता है. वहीं, यदि पौधों में जिंक की कमी दिखाई दे तो 250 ग्राम जिंक सल्फेट को पानी में घोलकर छिड़काव करना फायदेमंद माना जाता है.
काला नमक धान की नर्सरी में पानी का सही प्रबंधन बहुत जरूरी है. बीज अंकुरित होने तक खेत में हल्की नमी बनाए रखें. अंकुर निकलने के बाद जरूरत के अनुसार सिंचाई करें. खेत में लंबे समय तक पानी भरने या पूरी तरह सूखने दोनों स्थितियों से बचना चाहिए. संतुलित नमी रहने पर पौधों की जड़ें मजबूत बनती हैं और उनका विकास तेजी से होता है.
विशेषज्ञों का मानना है कि अच्छी नर्सरी ही बेहतर फसल की नींव होती है. यदि किसान सही समय पर नर्सरी तैयार करें, संतुलित मात्रा में खाद का प्रयोग करें और पौधों की नियमित निगरानी करें, तो मजबूत पौधे तैयार होंगे. ऐसी पौध खेत में रोपाई के बाद तेजी से बढ़ती है और रोगों का सामना भी बेहतर ढंग से करती है. इससे काला नमक चावल की क्वालिटी और उत्पादन दोनों में सुधार होता है, जिसका सीधा फायदा किसानों की कमाई पर पड़ता है.