बिहार-यूपी के किसानों के लिए बेस्ट हैं धान की ये 5 पछेती किस्में, अच्छी पैदावार के साथ मिलेगा बढ़िया मुनाफा

बिहार-यूपी के किसानों के लिए बेस्ट हैं धान की ये 5 पछेती किस्में, अच्छी पैदावार के साथ मिलेगा बढ़िया मुनाफा

अगर मॉनसून की वजह से धान की रोपाई में देरी हो गई है, तो सही किस्म का चयन आपकी पैदावार बचा सकता है. बिहार और उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए ऐसी 5 पछेती धान किस्में मौजूद हैं, जो देर से रोपाई होने पर भी बेहतर उत्पादन और अच्छी गुणवत्ता देती हैं.

धान की 5 पछेती किस्मेंधान की 5 पछेती किस्में
संदीप कुमार
  • Noida,
  • Jul 02, 2026,
  • Updated Jul 02, 2026, 12:31 PM IST

अगर मॉनसून की बारिश देर से पहुंचे या किसी वजह से धान की रोपाई समय पर न हो पाए, तो किसानों की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है. लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है. दरअसल, कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसी स्थिति में सही पछेती धान किस्म का चुनाव करके अच्छी पैदावार हासिल की जा सकती है. ऐसे में अगर आप बिहार और उत्तर प्रदेश के किसान हैं तो देर से रोपाई होने वाली इन किस्मों से बेहतर उत्पादन ले सकते हैं. बता दें कि ये किस्में कई प्रमुख रोगों के प्रति भी काफी हद तक सहनशील होती हैं. आइए जानते हैं धान की ऐसी 5 बेहतरीन पछेती किस्मों के बारे में, जो कम जोखिम में किसानों को अच्छा मुनाफा दिला सकती हैं.

धान की ये 5 पछेती किस्में

1. स्वर्णा (MTU-7029): स्वर्णा धान बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश की सबसे अधिक बोई जाने वाली किस्मों में से एक है. यह किस्म देर से रोपाई होने की स्थिति में भी अच्छा उत्पादन देने के लिए जानी जाती है. इसकी फसल लगभग 145 से 150 दिनों में तैयार हो जाती है और औसतन 55 से 65 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज दे सकती है. बात करें इसकी खासियत की तो इसके दाने अच्छी क्वालिटी वाले होते हैं, जिससे बाजार में इसकी अच्छी मांग रहती है. मध्यम और भारी मिट्टी वाले क्षेत्रों के लिए यह एक बेहतर विकल्प मानी जाती है.

2. राजेंद्र स्वेता: राजेंद्र स्वेता बिहार कृषि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित एक उन्नत धान किस्म है, जो देर से रोपाई के लिए उपयुक्त मानी जाती है. यह लगभग 135 से 140 दिनों में पककर तैयार हो जाती है. इस किस्म में अच्छी उत्पादन क्षमता के साथ कई प्रमुख रोगों के प्रति सहनशीलता भी पाई जाती है. कम लागत में अच्छी पैदावार मिलने के कारण बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के किसान इसे तेजी से अपना रहे हैं.

3. सहभागी धान: सहभागी धान उन किसानों के लिए बेहतर विकल्प है, जहां बारिश अनियमित होती है या पानी की कमी रहती है. यह किस्म करीब 105 से 110 दिनों में तैयार हो जाती है और कम पानी में भी अच्छी पैदावार देती है. सूखा सहन करने की इसकी क्षमता इसे देर से बुवाई और बदलते मौसम की परिस्थितियों के लिए उपयुक्त बनाती है. छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह एक लाभकारी किस्म मानी जाती है.

4. सरयू-52: सरयू-52 उत्तर प्रदेश और बिहार की लोकप्रिय धान किस्मों में शामिल है. यह लगभग 130 से 135 दिनों में पककर तैयार होती है और 50 से 60 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन दे सकती है. इस किस्म के दानों की क्वालिटी अच्छी होती है और यह झुलसा जैसे कई प्रमुख रोगों के प्रति सहनशील मानी जाती है. बेहतर गुणवत्ता के कारण किसानों को बाजार में इसका अच्छा दाम भी मिलता है.

5. नरेंद्र-97 (NDR-97): नरेंद्र-97 को विशेष रूप से उत्तर प्रदेश और बिहार की जलवायु को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है. यह किस्म 125 से 130 दिनों में तैयार हो जाती है और देर से रोपाई होने पर भी अच्छा उत्पादन देने की क्षमता रखती है. यह अलग-अलग प्रकार की मिट्टियों में सफलतापूर्वक उगाई जा सकती है. साथ ही कई रोगों और कीटों के प्रति अपेक्षाकृत सहनशील है. कम जोखिम और बेहतर उत्पादन के कारण यह किसानों के लिए एक अच्छा विकल्प साबित हो रही है.

किस्म चुनते समय इन बातों का रखें ध्यान

देर से रोपाई की स्थिति में हमेशा कृषि विश्वविद्यालय या कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) द्वारा अनुशंसित किस्मों का ही चयन करें. बीज प्रमाणित होना चाहिए और समय पर रोपाई के साथ संतुलित उर्वरक, उचित सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण पर विशेष ध्यान दें. इससे पछेती खेती में भी बेहतर उत्पादन और अच्छी क्वालिटी वाला धान प्राप्त किया जा सकता है. यदि किसान अपने क्षेत्र और मौसम के अनुसार सही पछेती किस्म का चयन करते हैं, तो देर से रोपाई होने के बावजूद अच्छी पैदावार और बेहतर मुनाफा हासिल कर सकते हैं. 

MORE NEWS

Read more!