बारिश-ओलों की मार भी नहीं रोक पाई रफ्तार, गेहूं खरीद में बना नया रिकॉर्ड

बारिश-ओलों की मार भी नहीं रोक पाई रफ्तार, गेहूं खरीद में बना नया रिकॉर्ड

भारत में गेहूं की सरकारी खरीद ने इस साल नया रिकॉर्ड बनाया है. 31 मई तक 3.49 करोड़ टन गेहूं की खरीद हो चुकी है, जो सरकार के संशोधित लक्ष्य से अधिक है. पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश ने इसमें अहम योगदान दिया. रिकॉर्ड खरीद के बाद एफसीआई के भंडार में गेहूं का स्टॉक बफर मानक से काफी ऊपर पहुंच गया है.

गेहूं खरीद में सरकार का बड़ा कमाल!गेहूं खरीद में सरकार का बड़ा कमाल!
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Jun 02, 2026,
  • Updated Jun 02, 2026, 9:59 AM IST

देश में इस साल गेहूं की सरकारी खरीद ने नया रिकॉर्ड बनाया है. भारतीय खाद्य निगम (FCI) और अन्य सरकारी एजेंसियों ने 31 मई तक 3.49 करोड़ टन (34.99 मिलियन टन) गेहूं किसानों से खरीदा है. यह मात्रा सरकार द्वारा तय किए गए संशोधित लक्ष्य 3.45 करोड़ टन से भी अधिक है. पिछले साल इसी समय तक 2.98 करोड़ टन गेहूं खरीदा गया था. इस तरह इस वर्ष गेहूं खरीद में करीब 17 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

सरकार हर साल किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं खरीदती है. इस गेहूं को सरकारी भंडार में रखा जाता है ताकि जरूरत पड़ने पर देश में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और गरीबों को राशन उपलब्ध कराया जा सके.

बढ़ा उत्पादन तो बढ़ाया गया खरीद लक्ष्य

शुरुआत में सरकार ने इस वर्ष 3.03 करोड़ टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य तय किया था. लेकिन कई राज्यों ने अधिक खरीद की मांग की. इसके बाद अप्रैल के अंतिम सप्ताह में लक्ष्य बढ़ाकर 3.45 करोड़ टन कर दिया गया.

कृषि मंत्रालय ने पहले अनुमान लगाया था कि इस साल देश में 12.02 करोड़ टन गेहूं का उत्पादन होगा. बाद में इसे बढ़ाकर 12.06 करोड़ टन कर दिया गया. यह पिछले वर्ष के मुकाबले लगभग 2.3 प्रतिशत अधिक है. अच्छी पैदावार के कारण सरकार को उम्मीद थी कि किसानों से अधिक मात्रा में गेहूं खरीदा जा सकेगा और ऐसा हुआ भी.

मौसम की मार के बावजूद हुई रिकॉर्ड खरीद

इस साल कई इलाकों में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि हुई थी. इससे गेहूं की फसल को कुछ नुकसान पहुंचा और दानों की चमक भी कम हो गई. इसके बावजूद सरकार ने किसानों को राहत देने के लिए गुणवत्ता मानकों में कुछ छूट दी. यही कारण है कि खरीदे गए कुल गेहूं में से लगभग 67 प्रतिशत गेहूं को विशेष छूट वाले गुणवत्ता मानकों के तहत खरीदा गया.

इस फैसले से किसानों को बड़ा फायदा मिला क्योंकि खराब मौसम के कारण उनकी फसल पूरी तरह से अस्वीकृत नहीं हुई और उन्हें अपनी उपज बेचने का अवसर मिला.

सरकारी भंडार में बढ़ा गेहूं का स्टॉक

खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग की संयुक्त सचिव सी. शिखा के अनुसार, इस वर्ष लगभग 3.5 करोड़ टन गेहूं खरीदने के बाद एफसीआई के केंद्रीय भंडार में कुल गेहूं का स्टॉक 5.13 करोड़ टन तक पहुंच गया है. यह 1 जुलाई के लिए निर्धारित 2.75 करोड़ टन के बफर स्टॉक मानक से काफी अधिक है.

इसका मतलब है कि देश के पास आने वाले महीनों के लिए पर्याप्त मात्रा में गेहूं उपलब्ध रहेगा और खाद्य सुरक्षा को लेकर किसी तरह की चिंता नहीं है.

पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश का बड़ा योगदान

पंजाब एक बार फिर गेहूं खरीद में सबसे आगे रहा. राज्य से 1.21 करोड़ टन से अधिक गेहूं खरीदा गया, जो पिछले साल से थोड़ा अधिक है. हालांकि पंजाब में बेमौसम बारिश के कारण गेहूं की गुणवत्ता प्रभावित हुई थी, फिर भी सरकार ने किसानों की फसल खरीदी.

हरियाणा में 81 लाख टन से ज्यादा गेहूं खरीदा गया, जो सरकार के लक्ष्य से अधिक है. वहीं मध्य प्रदेश ने इस बार सबसे शानदार प्रदर्शन किया. राज्य से 1.04 करोड़ टन गेहूं खरीदा गया, जो पिछले साल की तुलना में लगभग 34 प्रतिशत अधिक है.

मध्य प्रदेश में शुरुआत में खरीद की रफ्तार धीमी थी. खरीद केंद्रों और बारदाने की कमी जैसी समस्याएं सामने आई थीं. लेकिन बाद में सरकार ने व्यवस्थाओं में सुधार किया और खरीद लक्ष्य को भी बढ़ाया. इसका परिणाम यह रहा कि राज्य ने निर्धारित लक्ष्य को पार कर लिया.

उत्तर प्रदेश, राजस्थान और बिहार में भी बढ़ी खरीद

उत्तर प्रदेश में इस बार 17.2 लाख टन गेहूं खरीदा गया, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 10.3 लाख टन था. राजस्थान में भी खरीद बढ़कर 24.3 लाख टन तक पहुंच गई. बिहार में सरकारी खरीद पिछले साल के मुकाबले दोगुनी से अधिक रही.

इन राज्यों में बेहतर खरीद को देखते हुए केंद्र सरकार ने खरीद लक्ष्य भी बढ़ाया था. इसका फायदा किसानों को मिला और अधिक किसानों ने अपनी फसल MSP पर बेची.

किसानों और देश दोनों को हुआ फायदा

इस साल की रिकॉर्ड गेहूं खरीद किसानों और सरकार दोनों के लिए अच्छी खबर है. किसानों को अपनी फसल का उचित मूल्य मिला है, जबकि सरकार के पास पर्याप्त अनाज भंडार तैयार हो गया है. इससे सार्वजनिक वितरण प्रणाली को मजबूत करने में मदद मिलेगी और भविष्य में खाद्यान्न की उपलब्धता भी सुनिश्चित रहेगी.

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह खरीद व्यवस्था मजबूत रहती है और किसानों को समय पर सुविधाएं मिलती हैं, तो आने वाले वर्षों में भी देश खाद्यान्न उत्पादन और भंडारण के मामले में नई उपलब्धियां हासिल कर सकता है.

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