ICAR का 98वां स्थापना दिवस: 43 नई फसल किस्में लॉन्‍च, 100 क्‍लाइमेट स्‍मार्ट विलेज, खाद-बीज पर शिवराज का बड़ा बयान

ICAR का 98वां स्थापना दिवस: 43 नई फसल किस्में लॉन्‍च, 100 क्‍लाइमेट स्‍मार्ट विलेज, खाद-बीज पर शिवराज का बड़ा बयान

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के 98वें स्थापना दिवस पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विकसित भारत 2047 के लिए कृषि क्षेत्र का विज़न पेश किया. इस दौरान 43 नई फसल किस्में, 17 नई तकनीकें और 14 प्रकाशन जारी किए गए.

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क‍िसान तक
  • New Delhi,
  • Jul 16, 2026,
  • Updated Jul 16, 2026, 5:18 PM IST

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के 98वें स्थापना दिवस पर केंद्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के अनुरूप कृषि क्षेत्र के लिए व्यापक विजन पेश किया. नई दिल्ली स्थित भारत रत्न सी. सुब्रमणियम ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि खेती को केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रखा जा सकता, बल्कि अब गुणवत्ता, जलवायु के अनुकूल तकनीक और किसानों तक वैज्ञानिक शोध पहुंचाना सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए. इस दौरान ICAR की नई तकनीकों, फसल किस्मों और शोध उपलब्धियों को भी देश के सामने रखा गया.

नई किस्में, तकनीक और कर्मचारियों को बड़ी सौगात

स्थापना दिवस के अवसर पर ICAR ने 43 नई फसल किस्मों, 17 नई तकनीकों और उत्पादों और 14 प्रकाशनों का लोकार्पण किया. इनमें रोग प्रतिरोधी और पोषणयुक्त फसलें, पशुधन और मत्स्य क्षेत्र से जुड़ी वैक्सीन और डिजिटल कृषि समाधान शामिल हैं.

कार्यक्रम के दौरान 70 से अधिक तकनीकी लाइसेंस और समझौता ज्ञापनों पर भी हस्ताक्षर किए गए, ताकि इन तकनीकों को निजी क्षेत्र और स्टार्टअप के सहयोग से तेजी से किसानों तक पहुंचाया जा सके. इसके अलावा ICAR के 150 से अधिक दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को पहली बार नियमित नियुक्ति पत्र भी वितरित किए गए.

किसानों और वैज्ञानिकों की साझेदारी पर दिया जोर

अपने संबोधन में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि देश का किसान कृषि व्यवस्था की आत्मा है जबकि वैज्ञानिक उसका दिमाग हैं. उन्होंने कहा कि जब किसानों का अनुभव, वैज्ञानिकों का शोध और सरकार की नीतियां एक साथ काम करती हैं, तभी कृषि क्षेत्र में बड़ा बदलाव संभव होता है.

उन्होंने ICAR के पूर्व वैज्ञानिकों और संस्थान से जुड़े विशेषज्ञों के योगदान को याद करते हुए कहा कि उनकी मेहनत की वजह से देश आज खाद्यान्न उत्पादन में मजबूत स्थिति में पहुंचा है. साथ ही उन्होंने कहा कि आने वाले समय की चुनौतियों का समाधान भी वैज्ञानिक रिसर्च से ही निकलेगा.

उत्पादन के साथ गुणवत्ता और जलवायु पर फोकस

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश ने खाद्यान्न, बागवानी, दूध और मत्स्य उत्पादन में उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन अब केवल अधिक उत्पादन पर्याप्त नहीं है. उन्होंने साफ कहा कि कृषि को गुणवत्ता आधारित बनाना होगा, ताकि भारतीय उत्पाद वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा कर सकें.

उन्होंने जलवायु परिवर्तन और अल नीनो जैसी परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए क्लाइमेट रेजिलिएंट खेती, जिलेवार कृषि योजना और जोखिम प्रबंधन पर तेजी से काम करने की जरूरत बताई. उन्‍होंने कहा कि बदलते मौसम के बीच किसानों को नई तकनीकों और वैज्ञानिक सलाह से जोड़ना समय की मांग है.

100 क्लाइमेट स्मार्ट विलेज बनाने का लक्ष्य

शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की कि ICAR के 100वें स्थापना वर्ष से पहले देश में कम से कम 100 क्लाइमेट स्मार्ट विलेज विकसित किए जाएंगे. इन गांवों में जल संरक्षण, मृदा प्रबंधन, एकीकृत खेती और मौसम आधारित कृषि मॉडल को बढ़ावा दिया जाएगा. इसके साथ ही उन्होंने लक्ष्य रखा कि ICAR की तकनीक, शोध और आधुनिक कृषि समाधान देश के 10 करोड़ किसानों तक पहुंचाए जाएं. उन्होंने कहा कि यह लक्ष्य विकसित कृषि और समृद्ध किसान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा.

हर संस्थान से एक बड़ा नवाचार लाने की तैयारी

केंद्रीय कृषि मंत्री ने "वन इंस्टिट्यूट-वन ग्रांट इनोवेशन" पहल का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि ICAR के हर संस्थान को अगले दो वर्षों में कम से कम एक ऐसी तकनीक या समाधान विकसित करना चाहिए, जिसका राष्ट्रीय स्तर पर असर दिखाई दे. यह नवाचार नई फसल किस्म, वैक्सीन, डिजिटल प्लेटफॉर्म या जलवायु अनुकूल खेती से जुड़ा हो सकता है. उन्होंने कहा कि शोध का उद्देश्य केवल लैब तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसका लाभ सीधे किसानों को मिलना चाहिए.

KVK की भूमिका होगी और मजबूत

शिवराज सिंह चौहान ने अगले दो वर्षों को "मिशन ICAR-100" के रूप में चलाने का सुझाव दिया. उन्होंने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) को केवल प्रशिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि इनोवेशन हब, क्लाइमेट एडवाइजरी सेंटर और तकनीक प्रदर्शन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि ICAR ओपन डिजिटल नॉलेज प्लेटफॉर्म तैयार किया जाएगा, जहां किसान अपने मोबाइल फोन पर मुफ्त में वैज्ञानिक सलाह, फसल प्रबंधन, मौसम, मृदा परीक्षण और नई कृषि तकनीकों की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे.

नकली बीज और कीटनाशकों पर सख्ती की बात

कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री ने किसानों की सबसे बड़ी समस्याओं में शामिल नकली बीज और घटिया कीटनाशकों का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों पर सख्त कानून बनाने की जरूरत है. साथ ही वैज्ञानिकों से आग्रह किया कि ऐसी तकनीक विकसित की जाए जिससे खेत स्तर पर ही बीज और कीटनाशकों की गुणवत्ता की तुरंत जांच की जा सके. उन्‍होंने कहा कि इससे किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाया जा सकेगा और फसल उत्पादन भी सुरक्षित रहेगा.

समारोह में कई केंद्रीय मंत्री रहे मौजूद

इस अवसर पर केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह, कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर, भागीरथ चौधरी, मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज राज्य मंत्री प्रो. एस. पी. सिंह बघेल, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के सचिव और ICAR के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट और अतिरिक्त सचिव ज्ञानेंद्र डी. त्रिपाठी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे. कार्यक्रम में देशभर के कृषि विज्ञान केंद्रों, ICAR संस्थानों और कृषि विश्वविद्यालयों के वैज्ञानिक, कर्मचारी और छात्र वर्चुअल माध्यम से भी जुड़े.

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