
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (IIWBR), करनाल ने गेहूं की नई उन्नत किस्म DBW 425 तैयार की है. यह किस्म विशेष रूप से केंद्रीय क्षेत्र में देर से बोई जाने वाली सिंचित खेती के लिए तैयार की गई है और बदलती जलवायु परिस्थितियों में बेहतर प्रदर्शन करने का दावा किया गया है.
संस्थान के अनुसार DBW 425 एक उच्च उपज देने वाली और जलवायु-अनुकूल (क्लाइमेट रेजिलिएंट) गेहूं किस्म है. इसमें गर्मी और सूखे को सहन करने की क्षमता है, जिससे प्रतिकूल मौसम की स्थिति में भी उत्पादन स्थिर रहने की संभावना रहती है.
जानकारी के मुताबिक DBW 425 की औसत उपज 47.9 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है, जबकि इसमें 12.3 प्रतिशत प्रोटीन पाया जाता है. बेहतर दाना क्वालिटी और पोषण मूल्य के कारण यह किसानों के साथ-साथ खाने वालों के लिए भी लाभकारी मानी जा रही है.
ICAR का कहना है कि नई किस्म जलवायु परिवर्तन से पैदा हो रही चुनौतियों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है. गर्मी और सूखे जैसी परिस्थितियों में भी इसकी उत्पादकता बनाए रखने की क्षमता किसानों की आय बढ़ाने में सहायक हो सकती है. संस्थान को उम्मीद है कि DBW 425 आने वाले वर्षों में गेहूं उत्पादन और खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.
अन्य वैरायटी की बात करें तो कम पानी में अच्छी उपज देने वाली गेहूं किस्मों में डीबीडब्ल्यू 359, सीजी 1040 और सीजी 1036 शामिल हैं. एक और किस्म एचआई 1683 विकसित की जा रही है जो अभी लॉन्च नहीं हुई है.
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR) द्वारा विकसित गेहूं की उन्नत किस्म HD 3388 किसानों के लिए बेहतरीन विकल्प साबित हो रही है. यह किस्म सिंचाई वाले क्षेत्रों और समय पर बुवाई के लिए पूरी तरह अनुकूल है. इस किस्म से प्रति हेक्टेयर लगभग 52.0 क्विंटल (q/ha) तक की बंपर पैदावार हासिल की जा सकती है. यह फसल मात्र 125 दिनों की अवधि में पककर पूरी तरह तैयार हो जाती है.
उच्च तापमान और गर्मी के तनाव को झेलने के लिए इसमें विशेष प्रतिरोधक क्षमता (HSI 0.89) मौजूद है. इस गेहूं से बनने वाली चपाती (रोटी) बहुत ही बेहतर क्वालिटी की होती है.
कृषि वैज्ञानिकों ने इस किस्म को मुख्य रूप से पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल (पहाड़ी क्षेत्रों को छोड़कर), ओडिशा और असम के किसानों के लिए अनुशंसित किया है. इस किस्म के गेहूं का बीज लेने के लिए ICAR-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली से संपर्क किया जा सकता है.