Lichi Orchard : लीची की बंपर पैदावार कैसे लें, तो फलों की चमक और साइज बढ़ाने के लिए अपनाएं ये तरीका

Lichi Orchard : लीची की बंपर पैदावार कैसे लें, तो फलों की चमक और साइज बढ़ाने के लिए अपनाएं ये तरीका

बिहार की लीची को दुनिया भर में पसंद किया जाता है, लेकिन अच्छा मुनाफा कमाने के लिए फलों का बड़ा, मीठा और चमकदार होना जरूरी है। जनवरी का महीना शुरू होते ही किसानों को बगीचों की तैयारी तेज कर देनी चाहिए.अक्सर खाद और पानी की कमी या कीटों के हमले से फलों की क्वालिटी खराब हो जाती है, जिससे बाजार में सही दाम नहीं मिल पाते। बंपर पैदावार के लिए अभी से पेड़ों के पोषण, सही समय पर सिंचाई और रोगों से बचाव पर ध्यान देना जरूरी है

क‍िसान तक
  • नई दिल्ली,
  • Jan 09, 2026,
  • Updated Jan 09, 2026, 3:28 PM IST

बिहार और उत्तर प्रदेश की लीची अपनी मिठास और खुशबू के लिए दुनिया भर में मशहूर है. जनवरी की महीना शुरू हो चुका है लीची की अच्छी फसल और बेहतर मुनाफे के लिए अभी से तैयारी करना बहुत जरूरी है. हमारे देश से लीची का बड़े पैमाने पर निर्यात होता है, लेकिन बाज़ार में अच्छे दाम तभी मिलते हैं जब फल आकार में बड़े, मीठे और चमकदार हों. अक्सर खाद, पानी और कीट प्रबंधन में लापरवाही की वजह से फलों की क्वालिटी खराब हो जाती है, जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है. इसलिए, अगर आप इस बार बंपर पैदावार और शानदार क्वालिटी चाहते हैं, तो अभी से पेड़ों के खाद - पानी और देखभाल पर ध्यान दें. सही समय पर सिंचाई और रोगों से बचाव की तकनीकी जानकारी अपनाकर आप न केवल अपने बगीचे को बेहतर पैदावार ले सकते हैं, बल्कि अपनी आय को भी कई गुना बढ़ा सकते हैं.

बंपर पैदावार चाहिए ये काम ना करे

लीची की अच्छी फसल के लिए 'मंजर' आने से लेकर फल बनने तक का समय सबसे संवेदनशील होता है. इस दौरान सबसे बड़ी सावधानी सिंचाई को लेकर रखनी चाहिए. जब पेड़ों पर फूल आ रहे हों (फ्लावरिंग स्टेज), तो उस समय भूलकर भी सिंचाई या पटवन नहीं करना चाहिए. अगर इस समय पानी दिया गया, तो फूल झड़ सकते हैं और पैदावार कम हो सकती है. सिंचाई तभी शुरू करें जब फल का आकार कम से कम सरसों के दाने के बराबर हो जाए. इससे फलों का विकास तेजी से होता है और वे रसदार बनते हैं.

अधिक बौर और बेहतर फलत के लिए जरूरी काम

लीची के 12 वर्ष से अधिक उम्र के पेड़ों को सही पोषण देना अनिवार्य है. विशेषज्ञों के अनुसार, एक स्वस्थ पेड़ को साल भर में लगभग 750 ग्राम नाइट्रोजन, 500 ग्राम फास्फोरस और 750 ग्राम पोटाश की जरूरत होती है. इसकी आधी मात्रा जून के महीने (कटाई-छंटाई के बाद) में दें. बची हुई मात्रा, यानी करीब 500 ग्राम यूरिया और 400 ग्राम पोटाश, अप्रैल के पहले हफ्ते में तब डालें जब फल लौंग के आकार के हो जाएं. याद रखें, उर्वरक हमेशा तभी डालें जब मिट्टी में पर्याप्त नमी हो.

अधिक फल के लिए सफल तरीका

फलों के बेहतर आकार और विकास के लिए 'ग्रोथ रेगुलेटर' का इस्तेमाल बहुत फायदेमंद होता है. जब फल मटर के दाने के बराबर हो जाएं, तब हल्की सिंचाई के बाद इनका छिड़काव करें. ध्यान रहे कि ग्रोथ रेगुलेटर को सीधे पानी में घोलने के बजाय पहले स्प्रिट जैसे किसी घोल में मिलाएं. इसके साथ ही, परागण  के लिए मधुमक्खियां लीची के लिए वरदान हैं. अपने बाग के पास मधुमक्खी के बक्से रखें या प्राकृतिक छत्तों को नुकसान न पहुंचाएं; इससे फल अधिक मात्रा में सेट होते हैं.

कीटों और रोगों  पर रखें खास नजर

लीची में बौर आने के समय और फल बनने के बाद कीटों का हमला सबसे अधिक होता है. जब 50 प्रतिशत फूल खिल चुके हों, तब किसी भी रासायनिक दवा का छिड़काव न करें, क्योंकि इससे मित्र कीट मर सकते हैं. मंजर निकलने पर नीम के तेल 4 मिली प्रति लीटर या नीम बीज अर्क का छिड़काव करें, ताकि कीट अंडे न दे पाएं. जब फल लौंग के आकार के हो जाएं, तब 'थियाक्लोप्रिड' या 'नोवाल्यूरान' जैसी दवाओं का पहला छिड़काव करें. दूसरा छिड़काव फल तोड़ने से करीब 15 दिन पहले करें ताकि फल पूरी तरह स्वस्थ और दाग-धब्बे रहित रहें.

लीची अच्छी गुणवत्ता से मिलेगा बेहतर बाजार भाव

चाहे आपकी लीची स्थानीय बाजार में जाए या विदेश निर्यात हो, उसकी 'क्वालिटी' ही आपकी पहचान है. अगर आप खाद, पानी और कीट प्रबंधन सही समय पर करते हैं, तो फल चमकदार और बड़े होंगे. फटने की समस्या कम होगी और मिठास भरपूर रहेगी. याद रखें, अच्छी खेती केवल मेहनत से नहीं, बल्कि सही तकनीक और सही समय पर लिए गए निर्णयों से सफल होती है. विशेषज्ञों की इन सलाहों को अपनाकर आप इस सीजन में लीची की रिकॉर्ड तोड़ पैदावार हासिल कर सकते हैं

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