Crop Damage: 5 राज्यों में गेहूं की फसल बर्बाद, बारिश-ओलों ने छीनी किसानों की उम्मीद

Crop Damage: 5 राज्यों में गेहूं की फसल बर्बाद, बारिश-ओलों ने छीनी किसानों की उम्मीद

देशभर में बेमौसम बारिश, आंधी और ओलावृष्टि ने गेहूं समेत कई फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है. पंजाब, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात में खेतों से लेकर मंडियों तक फसल बर्बाद हो गई है. कटाई के मुहाने पर खड़ी फसल गिरने और भीगने से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है. प्रभावित किसान सरकार से सर्वे और मुआवजे की मांग कर रहे हैं.

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क‍िसान तक
  • Lucknow/Chandigarh/Jaipur/Ahmedabad,
  • Apr 09, 2026,
  • Updated Apr 09, 2026, 5:16 PM IST

बेमौसम बारिश ने देश के कई राज्यों में भारी तबाही मचाई है. खेतों में कटने के लिए तैयार गेहूं की फसल पानी में भीग गई है. यहां तक कि तेज हवा से पौधे खेतों में गिर गए हैं. इससे दानों के सड़ने का खतरा बढ़ गया है. सबसे बड़ा नुकसान पंजाब और उत्तर प्रदेश में है जबकि हरियाणा, राजस्थान और गुजरात में भी तबाही आई है. गेहूं के अलावा सब्जी और दलहन की फसलें प्रभावित हुई हैं. प्रभावित किसानों ने फसलों का सर्वे कराने और तत्काल राहत दिलाने की मांग की है.

उत्तर प्रदेश

यूं तो गर्मी की शुरुआत काफी दिन पहले हो गई थी.लेकिन अप्रैल के महीने में बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि और तेज आंधी से फसलों को भी काफी नुकसान हुआ है. उत्तर प्रदेश के प्रयागराज, लखीमपुर, पीलीभीत, बरेली, कासगंज और एटा सहित कई जिलों में बेमौसम बरसात ने अन्नदाताओं की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है. बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं की फसल को काफी नुकसान होने की खबरें हैं. 

अलीगढ़: अलीगढ़ में दो दिन हुई मूसलाधार बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है. खेतों में कटी फसल पूरी तरह पानी में भीग गई है. जिन किसानों ने खेतों से गेहूं काटकर मंडी में रखवाया था, वहां भी तेज बारिश की वजह से उनका गेहूं भीग गया. इस वजह से मंडी के आढ़तियों की भी हालत दयनीय बन गई है. किसानों ने बताया कि गेहूं की फसल से बहुत उम्मीद थी, लेकिन बारिश ने सभी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है. अब नहीं पता लागत कैसे निकलेगी.

प्रयागराज: प्रयागराज में भी आंधी तूफान और बारिश का असर देखने को मिला है. किसानों की कई बीघा गेहूं की फसल खराब हो गई है. जिले के करछना, मेजा, फूलपुर और अन्य ग्रामीण इलाकों में देर रात तेज आंधी के साथ बारिश हुई जिससे गेहूं की कटी फसल बर्बाद हो गई. वहीं खेतों में खड़ा गेहूं तेज हवा के कारण बैठ गया. कई किसानों ने गेहूं की फसल काटकर गट्ठर बना लिया था, लेकिन तेज हवा के कारण दूसरे के खेतों में उड़ कर चले गए.

पीलीभीत: पीलीभीत में मंगलवार की रात से ही मौसम ने अचानक करवट ले ली. तेज आंधी के साथ शुरू हुई हवाओं ने दिन निकलते-निकलते मूसलाधार बारिश का रूप ले लिया. इस बेमौसम बारिश का सबसे ज्यादा असर तराई क्षेत्र के किसानों पर पड़ा है. जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि नुकसान का सही आकलन करने के लिए लेखपाल और तहसीलदार स्तर पर सर्वे कराया जा रहा है. सर्वे रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी. 

अयोध्या: बुधवार को तेज हवाओं और बूंदाबांदी के चलते खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका गहरा गई है. मौसम की यह अनिश्चितता कृषि क्षेत्र के लिए नई चुनौती बनकर उभरी है. मायाबाजार क्षेत्र के किसान करुणेश प्रताप सिंह ने बताया कि अचानक हुई बारिश और तेज हवा के कारण उनकी फसलों को हल्का-फुल्का नुकसान उठाना पड़ा है. उन्होंने कहा कि यदि ऐसे हालात बने रहे, तो आने वाले दिनों में नुकसान और बढ़ सकता है.

आगरा: आगरा के फतेहपुर सीकरी लोकसभा क्षेत्र के कई गांवों में खेतों में खड़ी गेहूं और सब्जियों की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है, जिससे किसानों के सामने आजीविका का गहरा संकट खड़ा हो गया है. सांसद राजकुमार चाहर ने बताया कि फतेहपुर सीकरी, फतेहाबाद, खेरागढ़, आगरा ग्रामीण विधानसभाओं में किसानों की फसलें नष्ट हो गई हैं. किसानों की ऋण वसूली स्थगित कर दी जाए और बिजली बिल की वसूली भी स्थगित की जाए. 

एटा और कासगंज: एटा और कासगंज जिले में लगातार हो रही तेज बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है. इन दोनों जनपदों में सैकड़ों बीघा में खड़ी फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है. सबसे ज्यादा नुकसान गेहूं की फसल को हुआ है, जो खेतों में गिरकर बिछ गई है. वहीं सरसों की फसल भी भारी तबाही की चपेट में आ गई है. जनपद एटा से अवागड़ के किसान अंकुर सिंह ने बताया कि लगातार हो रही बारिश ने गेहूं की फसल की कमर तोड़ दी है. वहीं जनपद कासगंज में खेतों में पानी भरने से फसल खराब हो गई.

फिरोजाबाद: फिरोजाबाद जनपद के नारखी ब्लॉक क्षेत्र में हुई तेज बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. अचानक बदले मौसम के चलते कई गांवों में खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचने की आशंका है, जिससे किसानों में चिंता का माहौल है. ब्लॉक नारखी के कनवार, भून नागरिया, रैमजा सहित आसपास के कई गांवों में बारिश के साथ ओले गिरे. इस दौरान खेतों में खड़ी रबी की फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं.

लखीमपुर: लखीमपुर खीरी जिले में हुई भारी बारिश और ओलों से खेतों में लगी गेहूं की खड़ी फसल गिरकर बर्बाद हो गई. इस नुकसान को देखते हुए किसानों ने प्रशासन से जल्द फसलों का सर्वे कराने और मुआवजा देने की मांग की. जब उपज को मंडी में ले जाने का समय आया तो बारिश ने सबकुछ चौपट कर दिया. इससे किसानों की चिंता और बढ़ गई है.

हरियाणा

नूंह: नूंह जिले में हुई बेमौसमी बारिश ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. खेतों में खड़ी गेहूं की फसल जहां भीगकर खराब हो रही है, वहीं अनाज मंडियों में पहुंचा गेहूं भी अव्यवस्थाओं के कारण बारिश की भेंट चढ़ रहा है. पुन्हाना अनाज मंडी सहित जिले की अन्य मंडियों में खुले में रखा अनाज भीगने से सड़ने लगा है, जिससे बदबू फैल रही है और किसानों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है.

पुन्हाना अनाज मंडी में हालात बहुत खराब बताए जा रहे हैं, जहां शेड होने के बावजूद कई स्थानों पर आढ़तियों का कब्जा होने के कारण अनाज खुले में पड़ा हुआ है. लगातार हो रही बारिश के चलते यह अनाज भीग गया है और अब उसमें सड़न आने लगी है. किसानों का कहना है कि उनकी करीब आधी उपज बेमौसमी बारिश से खराब हो चुकी है, जबकि जो फसल वे मंडी तक लेकर पहुंचे हैं, वह भी सुरक्षित नहीं रह पा रही है. इससे उनकी आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ रहा है, क्योंकि उनके पास आय का कोई अन्य साधन नहीं है. 

बुधवार को अतिरिक्त उपायुक्त ज्योति ने पुन्हाना अनाज मंडी का निरीक्षण किया, लेकिन किसानों का आरोप है कि भीगते हुए अनाज की समस्या को लेकर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई गई. दूसरी ओर, मार्केट कमेटी सचिव ने मंडी की व्यवस्थाओं को संतोषजनक बताते हुए किसी बड़े नुकसान से इनकार किया है और किसानों से अपील की है कि वे फसल को सुखाकर मंडी में लाएं ताकि नमी की समस्या से बचा जा सके. किसानों ने सरकार से मांग की है कि बेमौसमी बारिश से खराब हुई फसल का जल्द सर्वे कराया जाए और उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए.

पंजाब

पंजाब का मालवा क्षेत्र बारिश से बुरी तरह प्रभावित हुआ है और इसके कारण अनुमानित 1.25 लाख एकड़ खेतों में भारी नुकसान पहुंचा है. गेहूं की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है. कोट सदर गांव के किसान हरजिंदर सिंह, जिनके पास 3 एकड़ ठेके की ज़मीन है, ने कहा, "सिर्फ बारिश ही नहीं, बल्कि ओलावृष्टि ने भी मेरे लिए सब कुछ तबाह कर दिया है. मेरे पास ठेके पर तीन एकड़ जमीन है और मैं ठेके के तौर पर प्रति एकड़ 80,000 रुपये दे रहा हूं, लेकिन अब सब कुछ पूरी तरह से बर्बाद हो गया है. हमारे बड़े सपने थे और हम फसल काटने ही वाले थे, लेकिन इस मौसम ने सब कुछ बिगाड़ दिया." 

मोहाली के आसपास के इलाकों में बारिश से भारी तबाही हुई है. मोहाली के बड़ी गांव के किसानों ने बताया कि बारिश और तेज हवा से उनकी फसल पूरी तरह खेतों में बिछ गई है. कुछ दिनों में फसल का सड़ना शुरू हो जाएगा. 

पंजाब के कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डिया ने बताया कि पंजाब में गेहूं की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है. चूंकि मौसम अभी भी खराब है, इसलिए नुकसान का सही-सही अंदाजा अभी तक नहीं लगाया जा सका है. बारिश की वजह से मोटे तौर पर 1.25 लाख एकड़ फसल खराब हो गई है. नुकसान का सही-सही आकलन करने के लिए करीब 500 कर्मचारियों को काम पर लगाया गया है.

उधर मोगा जिले के धर्मकोट क्षेत्र के कई गांव इस प्राकृतिक आपदा से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. बारिश और ओलावृष्टि में करीब 15–20 गांवों में हजारों एकड़ फसल तबाह हो गई. इसके बाद मंगलवार को फिर से हुई बारिश और ओलावृष्टि ने बची-खुची फसल को भी पूरी तरह खत्म कर दिया. किसानों की चिंता का मुख्य कारण यह है कि अधिकांश किसान ठेके पर जमीन लेकर खेती करते हैं और एक एकड़ जमीन के लिए उन्हें लगभग 80 हजार रुपये तक जमीन मालिक को देने पड़ते हैं. 

फाजिल्का में लगातार बरसात और ओलावृष्टि होने से गेहूं की फसल नष्ट हो गई है. प्रभावित किसानों ने केंद्र सरकार और राज्य सरकार से अनुरोध किया है कि सर्वे कराकर तत्काल राहत राशि जारी की जाए. राजस्थान के साथ लगते अबोहर में बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं सहित कई फसलें बर्बाद हो गई हैं. यह पहली बार नहीं है जब उन्हें नुकसान हुआ हो, इससे पहले भी उनकी सब्जियों की फसल खराब हो चुकी है. लेकिन अब तक उन्हें सरकार की ओर से कोई मुआवजा नहीं मिला है.

अमृतसर जिले में लगातार हो रही बेमौसमी बारिश और तेज आंधी ने किसानों की हालत बेहद खराब कर दी है. गेहूं की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है. खेतों में खड़ी फसल जमीन पर गिर चुकी है, जिससे किसानों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है. पहले असमय गर्मी के कारण गेहूं का दाना छोटा रह गया और कीटों के प्रकोप के चलते बार-बार स्प्रे करनी पड़ी, जिससे लागत काफी बढ़ गई. इसके बाद आई बेमौसमी बारिश, ओलावृष्टि और तेज हवाओं ने बची-खुची फसल भी तबाह कर दी.

किसानों ने सरकार से अपील की है कि तुरंत पटवारी और तहसीलदार को भेजकर फसल का सर्वे करवाया जाए और उन्हें कम से कम 70 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा दिया जाए, ताकि वे इस संकट से उबर सकें. किसानों ने चेतावनी दी कि अगर जल्द मदद नहीं मिली, तो उनकी आर्थिक स्थिति पूरी तरह से तबाह हो सकती है.

गुजरात

गुजरात के कई जिलों में बेमौसम बारिश, आंधी-तूफान और ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान हुआ है. इसमें वडोदरा, मेहसाणा, साबरकांठा, खेड़ा और अरावली के इलाके शामिल हैं. मौसम की अचानक मार से खेतों में खड़ी फसलें गिर गईं और बर्बादी का खतरा बढ़ गया है. वडोदरा जिले के सावली और डेसर क्षेत्र में मौसम विभाग की चेतावनी के बीच, भीषण चक्रवाती हवाओं के साथ बेमौसम बारिश ने भारी तबाही मचाई है. कुदरत के इस कहर ने न केवल जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है, बल्कि किसानों की कमर भी तोड़ दी है.

मेहसाणा जिले में बेमौसम बारिश ने भारी तबाही मचाई है. जिले में कई जगहों पर ओले और तेज हवाओं के साथ बेमौसम बारिश (मावठू) हुई है. मेहसाणा, विसनगर, बहुचराजी, सांपावाडा और ऊंझा क्षेत्र में बारिश हुई. बारिश के चलते भले ही मौसम में ठंडक घुल गई हो, लेकिन किसानों पर चिंता के बादल मंडराने लगे हैं. तेज हवाओं के कारण जिले के कई इलाकों से नुकसान की खबरें मिली हैं. 

साबरकांठा जिले के हिम्मतनगर तहसील के कई ग्रामीण इलाकों में झमाझम बारिश हुई. इससे किसानों की कई समस्याएं बढ़ गई हैं. साबरकांठा के वडाली समेत हिम्मतनगर तहसील के कई गांवों में गेहूं, चने, तंबाकू की फसल को नुकसान की आशंका है. इन सभी फसलों की कटाई चल रही है. मंडी में रखी उपजों के नुकसान की भी खबर है.

राजस्थान

राजस्थान के कई जिलों में ओलावृष्टि और तेज अंधड़ के कारण कई फसलें बर्बाद हो गई हैं. खेतों में खड़ी पकी-पकाई फसलों पर ओलों की मार पड़ने से वे पूरी तरह जमीन पर बिछ गई हैं. कटाई के मुहाने पर खड़ी फसलें तबाह होने से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है. ​वहीं, महीनों की मेहनत के बाद जब फसल घर आने वाली थी, तब कुदरत के इस 'सफेद कहर' ने सब कुछ तहस-नहस कर दिया. इस नुकसान के बाद अब किसानों की नजरें सरकार और प्रशासन पर टिकी हैं. किसानों ने मांग की है कि गिरदावरी करवाकर जल्द से जल्द उचित मुआवजे का ऐलान किया जाए, ताकि उन्हें इस संकट की घड़ी में कुछ राहत मिल सके.

गेहूं के साथ सरसों को भी भारी नुकसान झेलना पड़ा है. किसानों ने बताया कि सरसों में रोग लगने से पैदावार कम हुई थी और अब बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं में भी पैदावार कम होगी. बारिश के बाद गेहूं की बालियों में दाना सड़ जाएगा या फिर अंकुरित हो जाएगा. मौसम विभाग ने सात और आठ अप्रैल को फिर बारिश और ओलावृष्टि की चेतावनी दी है तो इस भीगी फसल के सूखने की संभावना भी कम है.

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